प्रधानमंत्री के स्वप्न को तार-तार कर रहे जिम्मेदार, कागजों में पहुंच रहा नलों से पानी
फैक्ट-करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी ग्रामीण कुआं, हैंडपंप के भरोसे
अंबिकापुर। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना के तहत सरगुजा के 569 गांवों में दिसम्बर 2024 तक पीने के लिए साफ पानी उपलब्ध कराना है। योजना के क्रियान्वयन में 1365 करोड़ रुपये खर्च होना है, इसके लागत में भी समय के अनुसार 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। अगर समय पर काम नहीं हुआ तो शासन पर 270 करोड़ रुपये से अधिक का भार पड़ेगा। वर्तमान में सरगुजा में 200 करोड़ से अधिक घर-घर पानी पहुंचाने के नाम पर खर्च किए जा चुके हैं। इसके एवज में महज 14 गावों में पानी पहुंचाने का दावा विभाग कर रहा है, लेकिन गांव में जाने के बाद स्थिति विपरीत देखने को मिल रही है। ऐसे में सरगुजा के 1.86 लाख घरों तक नल से पानी पहुंचाने का लक्ष्य फेल होता नजर आ रहा है, वहीं कागजों में 1.28 लाख घरों में नल का प्लेटफार्म बन गया है। योजना के तहत 1043 पानी टंकी के एवज में मात्र 340 पानी टंकी का ही निर्माण हुआ है। टंकियों में पानी भरने के लिए 250 बोरवेल का खनन भी किया गया, इसमें से कई बोरवेल फेल हो गए।
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना का हकीकत जानना है, तो शहर से महज 10 किलोमीटर के फासले में स्थित स्थित ग्राम मेण्ड्राकला में हकीकत से रूबरू हो सकते हैं। यह गांव ऐसा है जो लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की उस सूची में शामिल हैं, जिसमें 14 गांवों का उल्लेख करके घर-घर पानी सप्लाई किए जाने का दावा किया जा रहा है। सरगुजा जिले में अब तक योजना के तहत 200 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन स्थित पूर्ववत है। कहां कुएं से कहीं हैंडपंप लोगों का आज भी सहारा है। गांव के हर घर तक शुद्ध पानी पहुंचाने के लिए अरबों रुपये सरकार खर्च कर रही है। काम के आड़ में ठेकेदार और अधिकारी लाल हो रहे हैं। सरगुजा जिले में पिछले 2 वर्षों से योजना के तहत काम चल रहा है। योजना के तहत दिसंबर 2024 तक काम पूरा करके हर घर तक नल के माध्यम से पानी सप्लाई किया जाना था, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही से यह योजना पूरी तरह से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। इसके लिए जो पानी टंकी और नलों के प्लेटफार्म बनाए गए हैं, वे इतने निम्न स्तर के हैं कि निर्माण के बाद उसका उपयोग ही नहीं हो रहा है। कई जगह प्लेटफार्म टूट गए, तो कई जगह पाइप लाइन तहस-नहस हो गई है। यही नहीं जिन गांवों में पानी पहुंचाने का दावा करते अधिकारी गाल बजाते नजर आते हैं, उनमें से महज 8 से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम मेंड्राकला इनके द्वारा घर-घर पानी सप्लाई करने के किए जाने वाले दावा की पोल खोलने के लिए काफी है। कागजों में तो यह गांव घर-घर में नल से पहुंचाए जा रहे साफ पानी से आबाद है, लेकिन गांव के लोग कुछ और ही राग अलापते हुए अपना दर्द बयां करने लगते हैं। इनका कहना है अधिकारी झूठ बोल रहे हैं। ऐसे में जल जीवन मिशन के तहत हर घर तक साफ पानी पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो सपना देखा था, वह अधिकारियों की लापरवाही की वजह से आम आदमी के लिए ख्वाब साबित हो रहा है। दिसंबर 2024 तक इस योजना का काम पूरा होना था, लेकिन अब तक सरगुजा जिले के सिर्फ 14 गांव में ही पानी पहुंचाया गया, इनमें से अधिकांश गांव के घरों तक सिर्फ कागजों में पानी पहुंच रहा है।


कुछ दिन में पानी मिलना बंद हो गया
मेंड्राकला के ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें जल जीवन मिशन के तहत बने पानी टंकी से कुछ दिनों तक ही पानी मिला, इसके बाद पानी आना बंद हो गया। स्थानीय लोग योजना के तहत हुए काम में निम्न स्तर का निर्माण होने का आरोप भी लगा रहे हैं। कहना है कि घटिया निर्माण की वजह से ही पाइप लाइन से उनके घर तक नलों में पानी नहीं पहुंच रहा है। ऐसा हाल सिर्फ मेंड्राकला गांव का नहीं बल्कि सरगुजा जिले के अधिकतर गांवों का है, जो विभाग के ऑन रिकार्ड में घर-घर पानी सप्लाई को लेकर ओके हैं। सरकार और नेताओं को खुश करने के लिए अफसर कागजों में योजनाओं के सफल क्रियान्वयन का दावा बखूबी कर जाते हैं। इसे सही मानने से आम आदमी का दर्द बरकरार रह जाता है और आम लोगों की नाराजगी सामने आने लगती है। ढीठ अधिकारी अपनी गलती मानने को तैयार नहीं रहते, क्योंकि उन्हें पोल खुलने का भय रहता है। यही वजह है कि जल जीवन मिशन योजना सरगुजा में पूरी तरीके से हासिए पर है। सवाल यह उठता है कि जिला प्रशासन की सक्रियता के बाद भी कागजों में योजनाओं का संचालन किस दम पर हो रहा है।
पंचायत स्तर पर लापरवाही का फोड़ रहे ठीकरा
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि 14 गांव में पानी सप्लाई शुरू कर दिया गया था, लेकिन ग्राम पंचायत को पूरे प्रोजेक्ट को हैंडओवर करने के बाद इसके क्रियान्वयन में पंचायत स्तर पर लापरवाही हो रही है। पंचायत स्तर पर अभी तक यह तय नहीं हुआ है कि इसका संचालन आखिर कैसे किया जाएगा, क्योंकि कहीं मोटर खराब हो रहे हैं तो कहीं पाइप लाइन में परेशानी आ रही है, वहीं इसकी देखरेख के लिए कर्मचारियों की भी नियुक्ति की जानी है लेकिन कर्मचारियों को पैसे कहां से दिए जाएंगे यह भी तय नहीं है और यही वजह है कि एक तरफ नलों के माध्यम से पानी सप्लाई शुरू किया जा रहा है और कुछ महीनों बाद ही पानी की सप्लाई बंद हो जा रही है। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर करोडों के प्रोजेक्ट में ऐसी क्या गड़बड़ी हुई है कि इतनी जल्दी खराबी आ रही है।

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