पांच दिनों तक चलने वाली कार्यशाला का आज होगा समापन
अंबिकापुर। सरगुजा जिला मुख्यालय अंबिकापुर में पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के द्वारा बलरामपुर जिला में पर्यटन के माध्यम से आर्थिक उन्नयन के संदर्भ में पांच दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन सरगवां पैलेस रिसॉर्ट्स में 6 नवम्बर से किया जा रहा है, जो 10 नवम्बर तक चलेगा।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज, विशिष्ट अतिथि श्रीमती रेना जमील आईएएस, सीईओ जिला पंचायत बलरामपुर, डॉ. पुनीत कुमार राय प्राचार्य शंकरगढ़ महाविद्यालय, एनके सिंह प्रभारी प्राचार्य बलरामपुर, शासकीय महाविद्यालय एवं मनीष यादव प्रभारी प्राचार्य शासकीय महाविद्यालय राजपुर रहे। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता प्रो. राजीव प्रकाश डायरेक्टर आई.आई.टी. भिलाई के द्वारा की गई। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. नितेश कुमार मिश्र हैं, जो पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के वरिष्ठ सहायक प्राध्यापक हैं। कार्यशाला में कई प्रदेशों से विषय विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत सिंह अमरकंटक विश्वविद्यालय, डॉ. अनिल टमटा, अंबिकापुर से जयेश वर्मा, डॉ. मुकेश सिंह अहिरवार, डॉ. एसबी ओट शामिल हैं। कार्यशाला में पर्यटन से परिचय, पर्यटन के मूल घटक, विरासत पर्यटन, पर्यटन व्यवसाय, साहसिक पर्यटन, आदिवासी पर्यटन आदि विषयों पर व्याख्यान हो रहे हैं। इसी क्रम में 6 नवम्बर को पर्यटन से परिचय विषय पर डॉ. श्यामनारायण सिंह, पर्यटन के मूल घटक पर डॉ. प्रशांत कुमार सिंह, 7 नवम्बर को पर्यटन व्यवसाय विषय पर डॉ. दीपक त्रिपाठी, विरासत पर्यटन पर डॉ. पुनीत राय, साहसिक पर्यटन पर डॉ. मुकेश सिंह अहिरवार, आदिवासी पर्यटन विषय पर डॉ. दिनेश कुमार परस्ते एवं 9 नवम्बर को जयेश वर्मा द्वारा ‘सरगुजा क्षेत्र में पर्यटन का वर्तमान परिदृश्यÓ विषय पर व्याख्यान दिया। उत्तराखण्ड से आए डॉ. अनिल कुमार तामता द्वारा आतिथ्य व्यवसाय विषय पर हिमांशु शेखर द्वारा टूर गाइडिंग और एस्कोर्टिंग पर डॉ. प्रशांत कुमार सिंह द्वारा पर्यटन उद्योग में रोजगार के अवसर विषय पर व्याख्यान दिया गया। इस कार्यशाला में देश के विभिन्न भागों से विषय विशेषज्ञ आए हैं, उनके साथ-साथ बलरामपुर, शंकरगढ़ और राजपुर महाविद्यालय के 45 छात्र-छात्राएं भाग ले रहे हैं। सभी को बलरामपुर के पर्यटन स्थलों का भ्रमण भी कराया गया। यह कार्यशाला विज्ञान एवं प्रोद्यौगिकी विभाग भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित व आईआईटी भिलाई से सहयोग प्राप्त है।

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