करोड़ों की जमीन के मालिक आवेदन लेकर नहीं पहुंचे, इसलिए अधिकारियों से नहीं हुई मुलाकात
अंबिकापुर। तस्वीर पुलिस अधीक्षक सरगुजा के कार्यालय की है। एक वृद्ध लाठी टेकते तो दूसरा झुकी कमर लिए जमीन के सहारे कार्यालय से बाहर निकलते नजर आ रहे हैं। ये ग्रामीण करोड़ों की जमीन के मालिक हैं, जो दर-दर भटकने मजबूर हैं। कोई शहर में भिक्षाटन कर रहा है, तो किसी को बची-खुची जमीन के लुटने का डर सता रहा है। बुजुर्ग पिछले दिनों पुलिस अधीक्षक सरगुजा के कार्यालय में अपना दुखड़ा सुनाने के लिए पहुंचे थे। बिना लिखित आवेदन के जब ये साहब से मिलने पहुंचे, तो इनका सामना दरबान से हुआ। उसने इन बुजुर्गों से आने का कारण पूछा, तो उन्होंने साहब से मिलने के लिए आने की बात कही, लेकिन इनके पास ऐसा कोई आवेदन नहीं था, जिससे दरबान को माजरा समझ में आ सके। ऐसे में कलेक्टर और पुलिस कप्तान से मिलने की तमन्ना अधूरी रह गई।
पुलिस अधीक्षक से मुलाकात नहीं होने का मलाल लिए चंद मिनटों में बाहर लौटे इन बुजुर्गों से बात करने पर पता चला कि वर्षों तक जिस भूमि के वे मालिक थे, उस पर आज उनके अपने ही हक जताकर उन्हें न घर का और न घाट का होने की स्थिति में ला दिए हैं। इनकी हालत बदतर हो गई है। आरा से आए ग्रामीण रामदीन ने बताया कि उसके पांच संतान्र हैं। सभी को वह 6-7 एकड़ जमीन का बंटवारा कर दिया है। इसके बाद 35 डिसमिल जमीन अपने उपयोग के लिए बचाकर रखा था, जिस पर चौथे नंबर के पुत्र की नजर गड़ी है और वह उस जमीन पर पक्का मकान बनाने पर आमादा है। ग्रामीण ने कहा कि उसकी जमीन को उसके बेटे ने ही लूट लिया, जिस कारण उसे अपना शेष जीवन बिताने की चिंता सता रही है। इन्हीं हालातों से अवगत कराने वह आरा ग्राम के ही अपने उस मित्र नंदलाल के साथ पुलिस अधीक्षक को अवगत कराने आया था, जो कभी लगभग सात एकड़ जमीन का मालिक था। आज की तिथि में साथी नंदलाल अंबिकापुर में रहकर भिक्षाटन करता है। प्रशासन की पहल पर उसे समाज कल्याण विभाग की ओर से ट्राइसिकल मिल गई है, जिसमेें घूम-घूमकर वह अपनी रोजी के जुगाड़ में रोजाना नजर आता है। नंदलाल बताता है कि गांव में पुश्तैनी 50 एकड़ से अधिक जमीन थी। उसके अविवाहित होने का फायदा उठाते हुए अपनों ने ही जमीन पर कब्जा कर लिया, जिससे उसे दर-दर की ठोकर खानी पड़ रही है।

निर्वाचक नामावली पुनरीक्षण कार्यक्रम की तिथि अब 30 तक
जरही। नगर पालिका निर्वाचक नामावली पुनरीक्षण कार्यक्रम 16 अक्टूबर से प्रात: 10 से शाम 5 बजे तक एवं अंतिम तिथि 23 अक्टूबर को अपरान्ह 3 बजे तक निर्धारित की गई थी। आयोग द्वारा इसमें एक सप्ताह की वृद्धि की गई है। ऐसे में दावा-आपति प्राप्त करने की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर तक है।

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