आरक्षित वन भूमि पर 03 वर्षों से अतिक्रमण कर 05 कृषक कर रहे थे खेती
अंबिकापुर। सरगुजा जिला के वन परिक्षेत्र लुण्ड्रा अन्तर्गत ग्राम दर्रीडीह बताशबहरी टोंगरी में ग्राम सिकिलमा के पांच ग्रामीणों द्वारा आरक्षित शासकीय भूमि को जोतकर लगातार 03 वर्षों से टमाटर व अन्य फसलों की खेती की जा रही थी। ग्राम दर्रीडीह व ग्राम रघुनाथपुर के लोगों ने आरक्षित वन भूमि पर अतिक्रमण कर खेती किए जाने की शिकायत न्यायालय में की थी, जिसे संज्ञान में लेते हुए राजस्व निरीक्षक, पटवारी व वन विभाग के वन परिक्षेत्र अधिकारी लुण्ड्रा राज बहादुर राय, डिप्टी रेंजर चेन्द्रा वर्मा व वन रक्षकों की उपस्थिति में अतिक्रमणकारियों के चंगुल से वन आरक्षित भूमि को मुक्त कराया गया। ग्राम दर्रीडीह व ग्राम रघुनाथपुर के ग्रामवासियों ने लिखित में इस आशय का वचन पत्र दिया कि भविष्य में कभी भी उक्त भूमि पर कोई कब्जा नहीं किया जाएगा।
वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम सिकिलमा निवासी रामपाल पिता समल साय, करम साय पिता खोरा, मुन्ना राम पिता कवरा, रजन पिता रामसाय, शंकर पिता समल साय सभी जाति उरांव को वर्ष 2007-2008 में वन भूमि पट्टा प्रदान किया गया था, किन्तु उक्त कृषकों के द्वारा अन्यत्र वन आरक्षित भूमि पर 03 वर्षों से टमाटर व अन्य फसलों की खेती की जा रही थी। राजस्व निरीक्षक व पटवारी ने दस्तावेज अवलोकन करने के बाद पाया कि उक्त स्थल का पट्टा बना ही नहीं है। अंतत: ग्रामवासियों की सहमति से वन आरक्षित भूमि पर पांचों कृषकों के द्वारा बड़े पैमाने पर लगे हुए टमाटर की खेती पूर्णत: होने के उपरांत उक्त स्थल पर खेती नहीं करने का हस्ताक्षरित वचन पत्र ग्रामीणों के समक्ष लिखित में लिया गया। वन विभाग की टीम ने इस दौरान ग्रामीणों से जंगलों की रक्षा करने का वचन भी लिया।

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