बिश्रामपुर। एसईसीएल बिश्रामपुर के गायत्री भूमिगत खदान परियोजना से रोजाना बड़ी मात्रा में कोयला चोरी हो रही है, जिस पर अंकुश लगा पाने में प्रबंधन नाकाम दिखाई पड़ रही है। प्रबंधन यहां रोड शेल में ही व्यस्त है। गौरतलब है कि गायत्री भूमिगत खदान में जी सिक्स ग्रेड का कोयला उत्पादित होता है। यहां बीस माह पूर्व सीएम मशीन से कोयला उत्पादन का कार्य निजी कंपनी मेसर्स गेन वेल द्वारा किया जा रहा है। पूर्व में जब खदान प्रबंधन खुद कोयला उत्पादन करती थी, तब महज पांच से सात सौ टन कोयला उत्पादन होता था लेकिन जब आधुनिक तकनीक से सैकड़ों करोड़ की मशीन से कोयला उत्पादन निजी कंपनी ने शुरू किया तब यहां कोयला का उत्पादन बढ़ गया है। वर्तमान में यहां पर रोजाना करीब ढाई हजार टन कोयला उत्पादन हो रहा है। 
 
आश्चर्य की बात यह है कि कोयला उत्पादन के लिए सैकड़ों करोड़ रुपए कंपनी ने मशीनी उपकरणों की खरीदी व ठेका कंपनी के अनुबंध में फूंक दिए लेकिन उत्पादित कोयला को सुरक्षित रखने प्रबंधन के गंभीर प्रयास के अभाव में उत्पादित कोयला चोरों व माफियाओं के लिए लंबे समय से अवैध कमाई का जरिया बना हुआ है। वर्तमान में बारिश के सीजन में रोजाना चालीस से पचास की संख्या में कोयला चोर दिन में बाइक से खदान पहुंच कर अधिकारियों के सामने ही बोरियों में कोयला भर आराम से ले जा रहे हैं, जिन्हें कोई रोकने वाला नहीं है। अनुमान के मुताबिक रोजाना यहां चालीस से पैंतालीस टन कोयला चोर अपने साथ ले जा रहे हैं। बुधवार को खदान के एक कर्मचारी ने संवाददाता को खदान से बल पूर्वक हो रही कोयला चोरी की भेजी तस्वीर में इस बात की पुष्टि हो रही है। 
 
कर्मचारी ने बताया कि समूह में आए कोयला चोर खदान के बैंकर के नीचे से कोयला भरकर कंधों में लादकर खदान की चार दिवारी तक पहुंचाते हैं, जिससे हर वक्त खतरा बना रहता है। यह सब गतिविधियां प्रातः दस बजे से शाम पांच बजे तक चलती है। इन्हीं कोयला चोरों द्वारा खदान के बाहर बाइक में कोयला लादकर सूरजपुर, बिश्रामपुर के होटलों व छोटे उद्योगों, हॉस्टल तक पहुंचाते हैं। बड़ी बोरी में कोयला पांच से छह सौ रुपए तक नगद बिक जाता है। खबर तो यह भी है कि दशहरा के बाद मौसम साफ होते ही ईंट भट्ठा का सीजन शुरू हो जाएगा, ऐसे में चोरों द्वारा ईंट भट्ठा संचालकों के लिए उनके बताए गए ठिकानों में कोयला संग्रहण किए जाने की सूचना है। खदान से रोजाना लाख रुपए से अधिक की कोयला चोरी हो रही है। यहां प्रबंधन आखिर किस तरह स्टॉक मेंटेन कर रही है जो जांच का विषय है। कोयला चोरी पर कर्मचारी ने बताया कि प्रबंधन के अधिकारी यहां रोड शेल की वसूली में व्यस्त हैं।
 
 प्रबंधन यहां जनरल मजदूर को बूम बेरियर का नियम विरुद्ध इंचार्ज बनाकर उससे रोड शेल की वसूली कराती है। वर्तमान में यहां से रोजाना सौ ट्रक कोयला रोड शेल के माध्यम से बाहर भेजा जा रहा है। खदान प्रबंधन ने बताया कि कोयला चोरी हो रही है, इससे नुकसान हो रहा है लेकिन हम कर क्या सकते हैं। दिन में कंपनी के सुरक्षा कर्मी ड्यूटी देते हैं और रात में त्रिपुरा बटालियन के दो जवान ड्यूटी करते हैं। बावजूद इसके कोयला चोरी हो रही है। प्रबंधन का कहना है कि पुलिस को समय समय पर कोयला चोरी की सूचना लिखित में देते हैं लेकिन जैसा सहयोग मिलना चाहिए वैसा नहीं मिल पाता है। अब क्या किया जा सकता है। रोड शेल में बूम बेरियर आपरेटर से अवैध वसूली की बात से खदान के मैनेजर जेडी सिंह ने इंकार करते हुए कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है।
बैंकर के नीचे से चोरी के कारण हादसे का भय
बताया जा रहा है कि कोयला चोर खदान के बैंकर के नीचे स्टॉक से कोयला बोरियों में भरते हैं, ऐसे में बैंकर से कोयला गिरते समय हादसा हुआ तो इसकी जवाबदारी कौन लेगा। कोयला चोर जब समूह में खदान पहुंचते हैं, तो रोड शेल का काम प्रबंधन को रोकना पड़ता है ताकि कोई टैरेक्स के नीचे न आ जाए। प्रबंधन के कोयला चोरी रोकने में दिलचस्पी नहीं लेना और गंभीर प्रयास नहीं करना जांच का विषय है।

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