अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का स्वाद चखने के लिए पूर्ववर्ती सरकार ने गढ़कलेवा खोलने में रूचि दिखाई थी। आज की स्थिति में कुछ गढ़कलेवा नाम मात्र के लिए संचालित हो रहे हैं। यहां पहुंचने वाले लोगों को छत्तीसगढ़ी व्यंजन की जगह आम होटलों में मिलने वाली सामग्री परोसी जा रही है। ऐसा ही कुछ नजारा कलेक्टोरेट परिसर के अंदर संचालित गढ़कलेवा में देखने को मिल जाएगा, जहां छत्तीसगढ़ी व्यंजन की जगह समोसा, प्याजी, भजिया और दुकानों में बिकने वाले पाउच पैक मिक्चर व थाली में सामान्य खाना परोसा जा रहा है। कुल मिलाकर गढ़कलेवा का रूप एक सामान्य होटल ले लिया है, इसका संचालन समूह की महिलाएं कर रही हैं। हालांकि अंबिकापुर में ऐसे भी गढ़कलेवा संचालित हो रहे हैं, जहां छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का स्वाद मिल जाएगा। हाल में नवगठित भाजपा सरकार के आदिम जाति कल्याण मंत्री रामविचार नेताम ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में गढ़कलेवा पहुंचकर जायजा लिया था और इसे अधिक आकर्षक, सुविधायुक्त बनाने की जरूरत महसूस की थी, ताकि छत्तीसगढ़ी खान-पान से लोग परिचित हों। गढ़कलेवा परिसर में साफ-सफाई के साथ आकर्षक कलाकृतियों से सजावट के निर्देश भी दिए थे।
बता दें कि मध्य भारत में बसे धान का कटोरा छत्तीसगढ़ में अधिकांश लोग चावल, धान की खेती करते हैं। राज्य की प्रमुख फसल से खाने की लाजवाब चीजें मिलें, इसके लिए पूर्ववर्ती छत्तीगसढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों में गढ़कलेवा खोला था, यहां छत्तीसगढ़ के पारंपरिक व्यंजन परोसा जा रहा था। स्व-सहायता समूहों की महिलाओं के अलावा युवाओं को इस काम से जोड़ा गया, जिससे उन्हें रोजगार का अवसर मिला। राज्य के बाहर से आने वाले लोग भी पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का स्वाद लेने यहां पहुंच रहे थे। यहां नाश्ता के साथ ही शुद्ध छत्तीसगढ़ी भोजन, पत्तल, दोना में परोसे जाने वाले छत्तीसगढ़ के बने कुछ खास पकवानों का लुफ्त उठाने लोगों की भीड़ लगने लगी थी। शहर के प्रतापपुर रोड में स्थित गढ़कलेवा आज भी छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के लिए प्रसिद्ध है। कलेक्टोरेट में गढ़कलेवा के संचालन के लिए बकायदा भवन सोमू स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को दिया गया है। यहां छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की सौगात, गढ़कलेवा की सूची लगी है, जिसमें होटलों में मिलने वाले खाद्य पदार्थों के अलावा फर्रा, लसोरा, गुलगुला, अनरसा, पुआ, खुर्मी, चीला, तुलसी वाली चाय, काफी जैसी 23 सामग्रियों का उल्लेख मिल जाएगा, लेकिन वास्तविक छत्तीसगढ़ी व्यंजन खाने को नहीं मिलता है। तुलसी वाली चाय के शौकीन सामान्य चाय पी रहे हैं। यहां सामान्य लंच पैकेट और व्हीआईपी लंच पैकेट की भी सुविधा है, लेकिन इसमें भी छत्तीसगढ़ी स्वाद की कमी खलती है। ठेठरी, खुर्मी, अरसा, लाई बरी, बिजोरी, फर्रा, लसोरा, गुलगुला, अनरसा, पुआ जैसे व्यंजनों का अभाव मिलता है।

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