खड़ा होने के लिए लगाए जा रहे पटरा, प्लाई के गिरने से बन सकती है खतरे की स्थिति

girija thakur 

अंबिकापुर। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में अनावश्यक कार्य के नाम पर फिजूलखर्ची जमकर की जा रही है, अस्पताल परिसर व ओपीडी में आने वाले मरीजों पर मंडरा रहे खतरे को नजरअंदाज करके मरीजों की भीड़ के बीच मजदूरों के द्वारा बांस-बल्ली पर पटरा, प्लाई लगाकर कई दिनों से काम किया जा रहा है। इसमें खड़े रहने वाले मजदूर अगर नियंत्रण खोए तो प्लाई, पटरा नीचे गिरने से कोई नहीं रोक सकता है और खतरे की स्थिति बन सकती है।

बता दें कि ओपीडी के हाल में पर्ची सहित अन्य जरूरी काउंटर हैं, जहां मरीजों का आना-जाना लगे रहता है। ओपीडी, आईपीडी पर्ची कटवाने के साथ ही विभिन्न जांच की पर्ची बनवाने के लिए ओपीडी के निर्धारित समय दो बजे तक यहां कतार लगी रहती है, जो कम होने का नाम नहीं लेती है। ओपीडी का समय समाप्त होने और चिकित्सकों के जाने के बाद भीड़ छंट जाती है। इसके बाद आपातकालीन चिकित्सा परिसर में मरीज पहुंचते हैं। दो बजे तक लगने वाली मरीजों की भीड़ के बीच ओपीडी में सैकड़ों बांस-बल्ली को बांधकर मजदूरों के द्वारा 35 फिट से अधिक ऊंचाई में रंगाई-पोताई जैसा काम किया जा रहा है। इनके द्वारा खड़ा होने के लिए बांस पर रखे जाने वाले पटरा, प्लाई को खिसकाते समय अगर चूक हुई तो हादसे की स्थिति बन सकती है। राउंड में निकलने वाले अधिकारियों ने इसे अभी तक गंभीरता से नहीं लिया है, जबकि रोजाना बांस-बल्ली के बीच से गुजरते मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार मरीजों के ऊपर रंग-पेंट के छींटे भी पड़ते हैं, लेकिन इलाज कराने के लिए वे यह सब झेलने विवश हैं।

डिस्मेंटल योग्य भवन का बनाया हमर लैब
मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डिस्मेंटल योग्य भवन को हमर लैब का रूप दिया गया है। भवन को मरम्मत और रंग-रोगन करके चकाचक किया गया है। पूर्व में इस स्थल पर पैथोलैब सहित कुछ अन्य कार्यालय संचालित होते थे, लेकिन छत से गिरने वाले मलबा के कारण हमेशा खतरे की स्थिति बनी रहती थी। बाद में इस एरिया के सभी कक्षों को खाली करवाया गया था। अस्पताल के इस हिस्से को डिस्मेंटल करके नया निर्माण किया जाना था लेकिन पैबंद लगाने की महीनों चली कोशिश के बाद पुराने भवन को ही नया रूप दे दिया गया। इसके बाद पुन: बारिश में सीपेज की समस्या आड़े आने लगी। सीपेज न हो, इसके लिए ऊपर से टीन का शेड डाल दिया गया। डिस्मेंटल के बजाए पुराने भवन को नया रूप देने की कोशिश एमसीएच परिसर में भी चल रही थी, जिसके छत धसकने की घटना किसी से छिपी नहीं है।

अस्पताल में चल रहा यह निर्माण सुर्खियों में
अस्पताल परिसर में ही ऐसा ही एक निर्माण कछुए की गति से चल रहा है। यह निर्माण कार्य इन दिनों सुर्खियों में है। हर किसी की नजर एक बार अस्पताल के पुराने मुख्य प्रवेश द्वार के पास चल रहे निर्माण कार्य पर टिक जाती है। धरा की खोदाई कर बनाए गए बेस और आढ़ा-तिरछा ढलाई देखकर लोग गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। कोई इसे रेलवे स्टेशन की तर्ज पर अस्पताल की खूबसूरती को बढ़ाने के लिए किए जा रहे काम की संज्ञा देता है, तो कोई चुप्पी साध लेता है। लंबे समय से चल रहे इस निर्माण की उपयोगिता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं, प्रबंधन को इससे कोई लेना-देना नहीं है। निर्माण सामग्री और मलबा के कारण लोगों को दिक्कतों का अलग सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल आने वाले मरीजों के लिए यहां लगाया गया वॉटर कूलर भी निर्माण के लिए खोदी गई खाई के बाद से अनुपयोगी हो गया है।

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