शहर के घड़ी चौक में पेड़ गिरने से एक दर्जन से अधिक लोग बाल-बाल बचे

उदयपुर में घर में पेड़ गिरने छह बच्चे समेत आठ घायल, एसडीएम पहुंचे सीएचसी

रामनगर की महिला सरपंच ने घायलों को स्वयं के साधन से पहुंचवाया अस्पताल

अंबिकापुर/उदयपुर। मानसून का इंतजार कर रहे लोगों ने 14 जून को तेज आंधी-तूफान के साथ हुई बारिश के बीच प्राकृतिक कहर का भी सामना किया। अंबिकापुर के हृदयस्थल घड़ी चौक में गिरे विशाल पेड़ की चपेट में आने सेे एक दर्जन से अधिक लोग बाल-बाल बच गए। तत्समय मौके पर कई जामुन, आम, सब्जी विक्रेता व क्रेता मौजूद थे। अचानक पेड़ के धराशाई होने से इन्हें अपना सामान हटाने का भी मौका नहीं मिल पाया। वहीं प्रतापपुर रोड में वन विभाग के कार्यालय के सामने बिजली के तार पर पेड़ का विशाल हिस्सा गिर गया। इसके बाद शहर में घंटों बिजली बाधा की स्थिति समाचार लिखने तक बनी हुई है। उदयपुर क्षेत्र में आंधी-तूफान, बारिश के बीच कई पेड़ धराशायी हो गए। स्कूलों के शेड उड़ गए। घर पर पेड़ गिरने छह बच्चे समेत आठ घायल हो गए। एसडीएम की पहल पर घायलों का सीएचसी उदयपुर में उपचार चल रहा है।

शुक्रवार को देर शाम बादलों की गड़गड़ाहट के बाद चली तेज हवा व बारिश से भीषण गर्मी के बीच दिन गुजार रहे लोग जहां एक ओर राहत महसूस कर रहे थे, वहीं अंबिकापुर सहित सरगुजा के उदयपुर में पेड़ों के गिरने से कईयों की जान आफत में आ गई। कहीं साइन बोर्ड धराशाई हो गए तो कहीं पेड़ उखड़ कर बिजली के खंभों और घरों में गिर गए। बिजली के तार कई जगह टूटकर गिरने से खतरे की स्थिति बनी हुई थी। ग्राम मोहनपुर में मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के तहत नवनिर्मित शेड आंधी में प्लास्टिक की पन्नी की तरह उड़ते नजर आया। ग्राम रामनगर में घर के ऊपर पेड़ गिरने से एक ही परिवार के छह बच्चे सहित आठ लोग दब गए। इन्हें महिला सरपंच ललिता रोहित सिंह टेकाम की पहल पर बाहर निकाल कर स्वयं के साधन से उदयपुर अस्पताल पहुंचाया गया। इसकी सूचना उदयपुर एसडीएम बीआर खांडे को मिली और वे तत्काल उदयपुर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। उन्होंने घायलों के बारे में स्वास्थ्य विभाग के अमले से जानकारी ली। घायलों के पहुंचने के पहले से ही स्वास्थ्य महकमा अलर्ट मोड में था। घायलों के पहुंचते ही सभी बच्चों का तत्परता पूर्वक महिला चिकित्सक एवं नर्सों द्वारा उपचार किया गया। बच्चों की स्थिति अभी खतरे से बाहर बताई जा रही है।

करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद ऐसे हालात
शुक्रवार को तेज आंधी-तूफान के बीच जिस तरह का बवंडर देखने को मिला, आने वाले दिनों में इसके और भी गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं। मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के तहत करोड़ों रुपये की लागत से सैकड़ों स्कूलों में निर्माण कराए गए शेेड का उड़ना गंभीर लापरवाही को प्रदर्शित कर रहा है। अब तक लगभग एक दर्जन स्कूलों के शेड मामूली हवा के झोंकों से लेकर तेज तूफान में उड़ते नजर आए हैं। शासन-प्रशासन को इसे गंभीरता से लेने और की जरूरत है, अन्यथा 18 तारीख से विद्यालय आरंभ होने के पश्चात किसी प्रकार के घटना की पुनरावृत्ति हो सकती है।

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