गिरिजा ठाकुर

अंबिकापुर। कोतवाली थाना सहित अन्य थानों में लंबे समय से खड़ी वाहनों के नीलामी की तैयारी सरगुजा पुलिस कर रही है। जिले के सभी पुलिस थाना और चौकी में ऐसी वाहनें खड़ी मिल जाएंगी, जिसकी पूछ-परख के लिए लंबे समय से कोई नहीं पहुंचा है। खुले आसमान के नीचे रखी गई अधिकांश वाहन कबाड़ में तब्दील हो चुकी हैं। अगर समय रहते इन वाहनों की नीलामी होती तो विभाग को अच्छा राजस्व मिल सकता था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। ऐसी वाहनों में दोपहिया के साथ चारपहिया वाहन व सैकड़ों की संख्या में साइकिल भी शामिल हैं, जिन्हें विभिन्न मामलों और धारा 102 की कार्रवाई में जप्त किया गया है। पुलिस इनकी नंबरिंग करके रिकार्ड संधारण में लगी है।
शहर के कोतवाली थाना, गांधीनगर थाना व मणिपुर थाना में जप्त की गई लगभग एक हजार दोपहिया और चारपहिया वाहनें खड़ी हैं। इनमें से कई वाहनों की स्थिति तो ऐसी है कि उसका उपयोग नामुमकिन है। धारा 102 के तहत जप्त की गई वाहनों को प्रक्रिया अनुसार लंबे समय से कोई लेने नहीं पहुंचा है। कई वाहनों के मालिकों का अता-पता नहीं है। कबाड़ की मानिंद पड़ी ऐसी वाहनों के कारण पुलिस थाना परिसरों का बड़ा हिस्सा भर गया है। थाना परिसर की सफाई में भी ये वाहन रोड़ा बने हुए हैं। कई वाहनें एनडीपीएस, ठगी, सड़क दुर्घटना या अन्य अपराधिक मामलों में जप्त की गई हैं। ऐसी वाहनों को न्यायालयीन मामले का निराकरण नहीं होने तक या वाहन मालिक द्वारा न्यायालय से प्राप्त नहीं करने की स्थिति में थाने में जप्त रखा जाएगा। उन वाहनों की नीलामी कराई जाएगी, जिसके मालिक का पता नहीं है या फिर सूचना देने के बाद भी वाहन स्वयं की सुपुर्दगी में लेने के लिए वाहन के वैध दस्तावेजों के साथ थाना नहीं पहुंचा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नीलामी प्रक्रियाधीन है। इसमें अभी भी लंबा समय लग सकता है। इसके पीछे कारण वाहन स्वामियों को नोटिस देना और उनके नीयत समय तक आने का इंतजार करना है। शहर के तीनों थाना सहित जिले भर के थाना व चौकियों में जप्त की गई वाहनों के खड़ी रहने से थाना परिसर का बड़ा हिस्सा बेकाम का है। जप्त की गई वाहनों का थाना के रिकार्ड के अनुसार मिलान करके पहले तो इनके स्वामियों से संपर्क करके उन्हें वाहन के कागजात सहित उपस्थित होने कहा जा रहा है, अगर वे वाहन अपनी सुपुर्दगी में लेने के लिए रूचि नहीं दिखाते हैं, तो ऐसी वाहनों को नीलामी प्रक्रिया में शामिल कर लिया जाएगा। प्रक्रिया पर नजर डालें तो छह माह तक वाहन नहीं छूटने पर नीलामी की कार्रवाई शुरू की जाती है। इसके बाद वाहन मालिक को नोटिस भेजा जाता है। इस प्रक्रिया में भी लगभग छह माह बीत जाते हैं। लगभग एक साल बाद इसकी रिपोर्ट बनाकर जिला प्रशासन को भेजी जाती है। इसके बाद नीलामी की पहल होती है।
बयान
शहर कोतवाली सहित अन्य थानों में खड़ी वाहनों के नीलामी की प्रक्रिया चल रही है। प्रक्रिया पूरा होने के बाद ही इन वाहनों की नीलाम किया जाएगा। नीलामी से मिली राशि शासन के खाते में जमा की जाएगी। अदालत में विचाराधीन मामलों में शामिल वाहनों की नीलामी नहीं की जाएगी।
अमोलक सिंह ढिल्लो, एएसपी सरगुजा

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