अंबिकापुर – : जिला मुख्यालय अंबिकापुर में नि :शक्त असहाय व गरीब लोगों के उपयोग को लेकर नेकी की दीवार की स्थापना शासन प्रशासन ने इस मंशा व उद्देश्य से किया था कि ऐसे जरूरतमंद लोगों को आसानी से पहनने के लिए कपड़ा मिल जाए तथा शहर के लोग भी अपने पुराने तथा कुछ दान की नेक सोच को लेकर के पटनावा कपड़ा इस दीवार पर छोड़ जाते हैं यह सोचकर कि इन कपड़ों का उपयोग जरूरतमंद असहाय व गरीब लोगों को मिल पाएगा किंतु शहर के गाड़ी गैरेज वाले दुकानदारों द्वारा लोगों के मसां के ठीक विपरीत अपने दुकानों में गाड़ी पोछने के लिए रद्दी कार्य हेतु बे रोक-टोक इन कपड़ो को झोले भर भर कर ले जाते हैं और अपने दुकानों में गैराज में गाड़ीयों को रद्दी कार्य करने के लिये अपने निजि मतलब के लिये उपयोग करते हैं  ।

सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इस नेकी की दीवार का संचालन भगवान भरोसे चल रहा है इसकी देखरेख व संचालन करने वाला संचालक समिति की ना तो कोई जिम्मेदारी तय हो पा रही है और ना ही शासन प्रशासन की ही इसके प्रति कोई जिम्मेदारीपुर्ण रवैया है जिसके कारण इसका लाभ जरूरतमंदों को उसके अनुरूप में नहीं मिल पा रहा है जिस उद्देश्य को लोग लेकर इसकी स्थापना की गई थी बता दें की नेकी की दीवार का संचालन की जिम्मेदारी पहले एक दिव्यांग समिति को मिली थी तब कुछ हद तक इसकी स्थिति ठीक-ठाक थी किंतु अब एक कथित समिति द्वारा केवल कागजों में संचालन करने से इस दीवार की उपयोगिता पर प्रश्न चिन्ह लग गया है गरीब तथाअसहाय जरूरतमंद लोगों को मिलने वाले पहनावे के कपड़े शहर के मोटर गाड़ी गैरेज वालों को रद्दी कार्य करने के काम आ रहा है संचालन कर्ता समिति के ऊपर शासन प्रशासन का कोई अंकुश नहीं होने से कपड़ों को गाडी गैराज दुकान वाले मनमानी रूप से अपने निजी कार्य के लिए ले जा रहे हैं जिससे जरूरतमंद इससे वंचित रह जा रहे हैं तथा वे इन कपड़ो को गाडी व हाथ पोछने के कार्य कर कुडे में फेक दे रहे हैं गाड़ी गैरेज वालों की इस गैर जिम्मेदाराना पूर्ण कार्य से नेकी की दीवार के उद्देश्य व उपयोगिता पर सवालिया निशान लग रहा है ।

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