शंकरघाट-बांसबाड़ी इलाके में वन भूमि को कब्जामुक्त कराया, वन भूमि के बड़े हिस्से को घेरने में लगे थे लोग

अंबिकापुर। वन अधिकार पत्र पाने की होड़ में कई एकड़ वन भूमि अगिनत लोगों के कब्जे में आ गई। मूल वनवासियों की जगह कई ऐसे लोगों ने वन भूमि का अधिकार पत्र प्राप्त कर लिया, जो शायद ही कभी वन भूमि की बसाहट पर काबिज रहे हों। अब तो शहर सीमा पर स्थित वन भूमि पर भी ऐसे लोगों की नजर है। सुविधा संपन्न लोग भी इस होड़ में शामिल होने में पीछे नहीं हैं। एक कब्जा किया नहीं कि दूसरा भी खूंटा, फेंसिंग तार लिए वन भूमि में कब्जा करने टकटकी लगाए नजर आ रहा है। ऐसा ही मामला सोमवार को शहर से लगे शंकरघाट व बांसबाड़ी के बीच देखने को मिला। यहां वन भूमि के बड़े हिस्से को तार से घेराव करके कब्जा किया जा रहा था। एक के बाद एक बढ़ते कब्जाधारकों को देखकर वन सुरक्षा समिति शंकरघाट के सदस्य ही नहीं आसपास के ग्रामीण चौंक गए और इसकी सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दी। वन विभाग की टीम जब समिति के कर्ताधर्ता के साथ अतिक्रमण हटाने लगी तो तीखी नोकझोंक करते कुछ लोग सामने आ गए।

 
बता दें कि शंकरघाट वन सुरक्षा समिति की निगरानी में सुरक्षित वन क्षेत्र के कंपार्टमेंट नंबर 2580 में बड़े हिस्से को घेरकर कब्जा किया जा रहा था। वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच कर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की तो विवाद की स्थिति निर्मित हो गई। विपक्ष की पार्टी से नाता रखे एक नेता ने वन अमले की ओर से पहुंचे लोगों की खिंचाई करनी शुरू कर दी। इनका आरोप था कि पक्षपातपूर्ण कार्रवाई की जा रही है। पहले वन अमला अन्य लोगों के अतिक्रमण को हटाए, जहां निर्माण कार्य कर लिए गए हैं। इन झंझावातों के बीच वन अमले ने खुली भूमि से तार के फेंसिंग, खूंटा, बांस को उखाड़ कर हटाया। पुन: कब्जा करने की कोशिश करने पर कड़ी कार्रवाई की हिदायत दी और मौका पंचनामा तैयार किया गया। वन अमले का कहना था कि अतिक्रमण करने वालों के द्वारा जिन लोगों पर कब्जा करने का आरोप लगाया जा रहा है, उन्हें वन भूमि का पट्टा मिल चुका है। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान काफी देर तक जद्दोजहद की स्थिति बनी रही। सवाल यह भी उठ रहा था कि वन भूमि में अवैध कब्जा के शुरू होते समय विभाग के अधिकारी हरकत में क्यों नहीं आए। बता दें इसके पहले भी शंकरघाट के आसपास वन भूमि पर अवैध कब्जा का मामला सामने आ चुका है। इनमें से कई लोगों ने वन भूमि का पट्टा भी प्राप्त कर लिया। ऐसे भी लोग हैं जो वन भूमि का पट्टा प्राप्त करने के बाद उक्त भूमि को दूसरे को बेच चुके हैं। वनभूमि में कब्जे की शुरूआत के समय ही इस ओर ध्यानाकर्षण कराने के बाद भी कब्जा हटाने के प्रति रूचि नहीं लेने के कारण वन भूमि में कब्जे का दायरा इतना अधिक बढ़ गया है कि वन्य प्राणियों का मांद गायब हो चुका है और वे शहरों की अनजाने में रूख करते पहुंचने लगे हैं।

 
किस शख्स से बात कराना चाहती थी महिला
वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए पहुंचे अमले में शामिल एक व्यक्ति पर महिला ने विपक्षी पार्टी के वरिष्ठ नेता का नाम लेकर पिछले कुछ दिनों से तंज कसने का आरोप लगाया। महिला का कहना था कि संबंधित व्यक्ति उन्हें व परिवार के सदस्यों को मानसिक रूप से परेशा कर रहा है। महिला अपने मोबाइल से किसी को फोन लगाई थी और बार-बार मौके पर मौजूद उक्त व्यक्ति और वन अधिकारियों से बात करने के लिए कह रही थी, लेकिन उसकी बातों को तवज्जो नहीं मिल पाया और न ही मोबाइल में बात करने के मौजूद शख्स से किसी ने बात किया। वन अमले का कहना था कि वन परिक्षेत्र की भूमि पर अतिक्रमण की सूचना पर वे कार्रवाई करने पहुंचे हैं, उनका राजनीति से कोई वास्ता नहीं है।

 
शंकरघाट के वन भूमि कंपार्टमेंट 2580 में तीन व्यक्तियों के द्वारा अतिक्रमण करने की सूचना मिली थी। इनके द्वारा लगभग 25 डिसमिल पर कब्जा किया जा रहा था। सूचना पर वन विभाग की टीम व वन सुरक्षा समिति के सदस्य मौके पर पहुंचे और वनभूमि को कब्जे से मुक्त कराया है। अतिक्रमण करने वाले लोगों के द्वारा जिन लोगों पर कब्जा करने का आरोप लगाया जा रहा था, वे वनाधिकार पत्र प्राप्त कर चुके हैं। कब्जास्थल में अगर किसी ने अवैध मकान का निर्माण कराया है, तो उसे भी हटाया जाएगा।
निखिल पैकरा, वन परिक्षेत्राधिकारी अंबिकापुर

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