मामला राजमोहिनी देवी भवन के पास स्थित जमीन का, इधर कलेक्टर ने नौ लोगों को किया है तलब
छ.ग.फ्रंटलाइन
अंबिकापुर। भू माफियाओं के द्वारा कौड़ी की जमीन को बेशकीमती बनाने का जहां एक ओर खेल चल रहा है, वहीं शहर के राजमोहिनी देवी भवन के करीब स्थित 4.22 एकड़ जमीन का फर्जी दस्तावेजों के सहारे नामांतरण कराने और करोड़ों में बिक्री के मामले में पुलिस ने तत्कालीन नजूल अधिकारी, रीडर, आरआई सहित चार लोगों के विरूद्ध केस दर्ज कर लिया है। इस मामले में सरगुजा कलेक्टर ने नौ लोगों से जवाब तलब किया है।
बता दें कि राजमोहिनी देवी भवन अंबिकापुर के पास खसरा नंबर 243/1, संशोधित खसरा नंबर 243/41 रकबा 4.22 एकड़ बेशकीमती शासकीय जमीन स्थित है। जमीन की खरीद-बिक्री करने वाले लोगों ने हल्का पटवारी गणेश दत्त मिश्रा, आरआई नारायण सिंह, नजूल अधिकारी नीलम टोप्पो व नजूल कार्यालय में पदस्थ रीडर अजय तिवारी की मिलीभगत से उक्त जमीन का फर्जी दस्तावेज तैयार करवाया। इसके लिए इन्होंने ग्राम परसा महादेवपारा के बंसु राम पिता भुटकुल राम का नया आधार कार्ड बनवाकर उसे तत्कालीन नजूल अधिकारी नीलम टोप्पो के समक्ष सात अक्टूबर 2022 को खड़ा कर नजूल अभिलेखों में उसका नाम दर्ज करा रिकार्ड दुरुस्त कराया। नमनाकला के बंसु पिता भुटकुल की मृत्यु 15 वर्ष पूर्व हो चुकी है। उसे सिंहदेव योजना के तहत वर्ष 1967-68 में खसरा नंबर 154, 243/10, रकबा 0.934 एवं 1.710 हेक्टेयर भूमि का पट्टा जारी किया गया था। वर्ष 1971-72 में नमनाकला के समस्त शासकीय जमीन को नजूल घोषित कर अभिलेखों में दर्ज किया गया। ऐसे में किसी को भी पट्टे का लाभ नहीं मिल पाया था। मामले में जमीन खरीद-बिक्री करने वालों द्वारा नमनाकला के बंसु पिता भुटकुल लोहार की जगह फर्जी व्यक्ति ग्राम परसा के महादेवापारा निवासी बंसु पिता भुटकुल लोहार को फुंदुरडिहारी का निवासी बताकर उसका आधार कार्ड बनवाया और उक्त जमीन के नामांतरण के लिए आवेदन प्रस्तुत कराया गया। इसके बाद सात अक्टूबर 2022 को ही नजूल अभिलेख में खसरा नंबर 243/1 को संशोधित कर खसरा नंबर 243/41 रकबा 4.22 एकड़ दर्ज कर बंसु के नाम दर्ज कर दिया गया। मामला सुर्खियों में आने के बाद कलेक्टर सरगुजा ने इसे गंभीरता से लिया और 50 करोड़ से अधिक में बेची गई उक्त भूमि के मामले में फर्जी मालिक बंसु पिता भुटकुल समेत 9 लोगों से 14 मार्च को कार्यालय में उपस्थित होकर जवाब तलब करने कहा है।
इनके विरूद्ध केस दर्ज की पुलिस
पुलिस ने तत्कालीन नजूल अधिकारी नीलम टोप्पो, नजूल कार्यालय के रीडर अजय तिवारी, आरआई नारायण सिंह व राहुल सिंह के खिलाफ धारा 120बी, 420, 467, 468 व 471 के तहत अपराध दर्ज किया है। उपरोक्त जिम्मेदारों की मिलीभगत से ही उक्त जमीन का नामांतरण फर्जी दस्तावेजों के सहारे किया गया था। नामांतरण होने के बाद जमीन बिक्री का कारोबार करने वाले समूह प्लॉटिंग करके 50 करोड़ रुपये से अधिक में उक्त जमीन को बिक्री कर दिए। कलेक्टर विलास भोस्कर ने 11 मार्च को ही फर्जी जमीन मालिक सहित सतीश शर्मा, सन्मोगर वारियर, अभिषेक नागदेव, शेखर अग्रवाल, सुरेन्द्र कुमार अग्रवाल, अनुषा नागदेव, महेश कुमार केडिया और दिनेश कुमार से 14 मार्च को जवाब तलब किया है।
परसापाली में जमीन का स्वरूप बदलने की कवायद पर जिम्मेदारों की नजर नहीं
फोटो-प्रकाशित समाचार
संत गहिला गुरू वार्ड के परसापाली में सीजीएमएससी के दवा गोदाम के पीछे गांव की जमीन को शहर की सीमा से मिलाने के लिए शासकीय भूमि का कटाव कर चौड़ी सड़क और पक्के पुलिया निर्माण की कूटरचना कर दी गई है। यह मामला प्रशासनिक अधिकारियों के संज्ञान में है, लेकिन कार्रवाई की मंथर गति मौकापरस्तों के लिए लाभार्जन का माध्यम बन सकता है। आरआई मौका निरीक्षण किए, उन्होंने गलत तरीके से शासकीय भूमि को स्वलाभ के लिए उपयोग में लाना पाया है, लेकिन अवैध तरीके से शासकीय जमीन का स्वरूप बदलने की किसने कोशिश की, उसके विरूद्ध किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हो पाई है और न ही अवैध पुल निर्माण को हटाया गया है। नाला, नहर के ऊपर से पुलिया निर्माण की जो तस्वीर सामने आई है, इसे संज्ञान में समय रहते नहीं लिया गया तो यहां का भी बड़ा क्षेत्र जमीन के कारोबारियों के कब्जे में होगा। शासकीय जमीन में निजी पुल निर्माण किस उद्देश्य से किया गया, यह मौके पर जाकर देखा जा सकता है। अवैध तरीके से निर्मित किए गए इस पुल के आगे कोई घर, मकान नहीं है। पुल के आगे जाने पर एक बड़ा कई एकड़ का प्लाट मिलेगा, इसका समतलीकरण करके पोल गाड़कर चिन्हांकन किया गया है, जबकि उक्त जमीन ग्राम कंठी की सीमा में है। प्रशासन इसे त्वरित संज्ञान में ले तो अवैध पुल निर्माण करने वालों की मंशा सामने आ सकती है।

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