एसडीएम को विस्तृत मजिस्ट्रियल जांच के आदेश, तीन दिन के अंदर देंगे रिपोर्ट
विभाग द्वारा भी जांच समिति गठित, तीन सदस्यीय डॉक्टरों की टीम ने किया पोस्टमार्टम

अंबिकापुर। प्रीमैट्रिक अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास दरिमा में कक्षा आठवीं में अध्ययन करने वाले छात्र ने बुधवार को खुदकुशी कर ली। बताया जा रहा है कि छात्र पथरी की बीमारी से पीड़ित था। वह छात्रावास में रहने के बाद भी पिछले तीन दिनों से स्कूल नहीं जा रहा था। बीमार छात्र की मौत के बाद परिवार के कुछ सदस्य आक्रोशित नजर आए, जिस कारण दोपहर डेढ़ बजे के बाद मृतक का पोस्टमार्टम जिला प्रशासन की संवेदनशीलता के कारण हो पाया था। मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वयं कलेक्टर विलास भोस्कर व पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल अस्पताल पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने मृतक के परिवार के सदस्यों के अलावा चिकित्सकों, पुलिस अधिकारियों से चर्चा की और एसडीएम की उपस्थिति में मजिस्ट्रियल जांच व हॉस्टल अधीक्षक को प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए।

जानकारी के अनुसार सीतापुर थाना क्षेत्र के ग्राम बिशुनपुर का मुकेश तिर्की पिता रामजी तिर्की 1& वर्ष, प्री मैट्रिक अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास दरिमा में बीते वर्ष दाखिला लिया था। चालू शिक्षा सत्र में वह कक्षा आठवीं में अध्ययनरत था। मुकेश छात्रावास के जिस कमरे में रहता था, उसमें अन्य सहपाठी भी रहते थे। पुलिस और स्वजनों के मुताबिक छात्र पिछले दो वर्षों से पथरी की बीमारी से पीड़ित था और तीन दिनों से स्कूल नहीं जा रहा था। बुधवार को सुबह नौ बजे वह खाना लेने के लिए रसोई में नहीं गया, तो सहपाठी उसका खाना लाकर छात्रावास के कमरे में रख दिए थे। इसके बाद सभी नियत समय में स्कूल चले गए लेकिन मुकेश तबियत ठीक नहीं लगने की बात कहते हुए कमरे में ही आराम कर रहा था। वह सहपाठी के द्वारा लाकर दिए गए खाना को भी नहीं खाया। शाम को लगभग चार बजे स्कूल की छुट्टी होने पर अन्य ब’चे छात्रावास पहुंचे, तो जिस कमरे में मुकेश था वह अंदर से बंद था। छात्रों ने दरवाजा खटखटाया और आवाज लगाकर दरवाजे खुलवाने की कोशिश की लेकिन किसी ने दरवाजा नहीं खोला। वेंटीलेटर से झांकने पर मुकेश के फांसी लगा लेने का पता चला। इसकी जानकारी मिलने पर चौकीदार चैन दास ने ब’चों के सहयोग से छात्रावास के कक्ष का दरवाजा खुलवाया और शव को फांसी से उतारा गया। इसकी जानकारी मिलने पर छात्रावास अधीक्षक भूपेश सिंह कश्यप भी पहुंचे और सूचना दरिमा थाना में दी। मामला स्कूली छात्र के मौत से जुड़ा था, इसे देखते हुए तहसीलदार और थाना प्रभारी आशीष सिंह छात्रावास पहुंचे। मौका पंचनामा की कार्रवाई करने के बाद शव को मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर लाया गया था। मृत छात्र के दादा सीताराम सहित अन्य का कहना है कि मुकेश तिर्की बीते 20 फरवरी को इलाज के बाद ठीक लगने पर छात्रावास आ गया था। अगर उसकी तबियत बिगड़ रही थी तो कम से कम परिवार के सदस्यों को इसकी जानकारी देनी थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। पुलिस को सूचना देने से पहले शव को फांसी से उतारना बताया जा रहा है। छात्र के पिता के साथ आए कुछ स्वजन संदेह जताते हुए पहले प्राथमिकी दर्ज कराने की बात कह रहे थे, जिस कारण दोपहर डेढ़ बजे तक शव के पोस्टमार्टम में बाधा की स्थिति बनती रही। पोस्टर्माटम करने के लिए पहुंचे चिकित्सक भी निर्णायक स्थिति नहीं बनने के कारण चले गए। पुलिस घंटों उहापोह की स्थिति में रही। बाद में तीन चिकित्सकों की टीम ने छात्र के शव का पोस्टमार्टम किया।  

मां से मोबाइल फोन पर किया था बात
मुकेश तिर्की का स्वास्थ्य पिछले दो वर्षों से खराब था। स्वजन 15 दिन पहले उसका जांच कराए थे। किडनी डायग्नोस में पथरी होना सामने आया था, जिस कारण उसे तकलीफ रहती थी। कई बार दर्द उभरने पर छात्रावास में रोने लगता था। स्वजन चिकित्सक द्वारा लिखी गई दवा का सेवन कराने के साथ ही जड़ी-बूटी भी ब’चे को दे रहे थे, इसके बाद वह स्वस्थ्य महसूस कर रहा था। घटना दिवस बुधवार को खुदकुशी के पूर्व छात्र किसी के मोबाइल से फोन लगाकर अपनी मां ममता को तबियत ठीक नहीं लगने की जानकारी देते हुए छात्रावास बुलाया था। मां ने आश्वस्त किया कि अगले दिन वे आएंगे। मां ने यह भी कहा संभव हो तो छुट्टी लेकर घर आ जाओ, लेकिन वह परीक्षा नजदीक है, नहीं आ पाऊंगा कहते हुए बात को टाल दिया। शाम को स्वजन को ब’चे के द्वारा खुदकुशी करने की जानकारी मिली, जिससे वे सदमे में आ गए।

ब’चों की मन:स्थिति को समझें अभिभावक-कलेक्टर  
कलेक्टर विलास भोस्कर ने कहा यह बेहद दुखद घटना है। प्रशासन द्वारा संवेदनशीलता बरतते हुए त्वरित कार्रवाई हेतु तीन डॉक्टरों की टीम के द्वारा पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। टीम को सभी पॉइंट की विस्तृत जांच करा पोस्टमार्टम रिपोर्ट शीघ्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। छात्रावास अधीक्षक की घोर लापरवाही सामने आने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही मामले की जांच में कोई बिंदु ना छूटे, इसके लिए एसडीएम अंबिकापुर को मजिस्ट्रियल जांच हेतु अधिकृत किया गया है। एसडीएम अंबिकापुर को तीन दिन में विधिवत जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करना होगा। कलेक्टर ने कहा कि ब’चे बेहद संवेदनशील होते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए पालकों से अपील है कि ब’चों की मन:स्थिति को समझें। साथ ही स्कूल, छात्रावास प्रबंधन को भी सख्त निर्देश दिए गए हैं कि ब’चों को किसी भी तरह की समस्या होने पर तत्काल उ’च अधिकारियों को इसकी सूचना दें।

मेंटल हेल्थ केयर स्पेशलिस्ट की लेंगे मदद-एसपी
एसपी विजय अग्रवाल ने कहा कि इस तरह के मामलों पर रोक लगाने के लिए प्रशासन द्वारा शिक्षक एवं स्कूल, छात्रावास प्रबंधन से बात की जाएगी। ब’चों के मानसिक तनाव को कम करने का प्रयास किया जाएगा। ब’चों के साथ संवेदशीलता के साथ व्यवहार करना चाहिए। ब’चों की मनोस्थिति को समझने स्कूलों में मेंटल हेल्थ केयर के स्पेशलिस्ट की मदद ली जाएगी।

हॉस्टल अधीक्षक तत्काल निलंबित
कलेक्टर सरगुजा द्वारा प्री मैट्रिक अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास दरिमा के छात्रावास अधीक्षक भूपेश सिंह कश्यप, छात्रावास अधीक्षक श्रेणी-स को अपने कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही बरते जाने स्वरूप तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। उक्त अधीक्षक का कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम एक एवं दो के विपरीत होने के कारण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील नियम 1966 के नियम 9 (एक)(क) के तहत निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में इनका मुख्यालय कार्यालय सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग अंबिकापुर निर्धारित किया गया है।

एसडीएम को मजिस्ट्रियल जांच के निर्देश
कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी सरगुजा द्वारा घटना की मजिस्ट्रियल जांच हेतु एसडीएम अंबिकापुर फागेश सिन्हा को विस्तृत जांच करने अधिकृत किया गया है। एसडीएम अंबिकापुर मृत्यु के दृश्यमान कारणों की विधिवत जांचकर तीन दिनों के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करना सुनिश्चित करेंगे।

विभागीय जांच हेतु टीम गठित
सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग ने बताया कि उक्त घटना की जांच हेतु दो सदस्यीय समिति गठित की गई है, जिसमें सहायक संचालक अंकिता मरकाम और सहायक संचालक महेंद्र पाल खांडेकर शामिल हैं। वे घटना की सूक्ष्म जांचकर जांच प्रतिवेदन तीन दिवस के भीतर उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेंगे।

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