स्कूली बच्चों को वाहन नहीं देने की बेअसर समझाइश के बाद पुलिस हुई सख्त

अंबिकापुर। नाबालिग बच्चों को वाहन चालन के लिए नहीं देने की बेअसर समझाइशों को देखते हुए पुलिस व जिला प्रशासन सख्त है। पुलिस ने इस बार कार्रवाई का ढर्रा बदल दिया। स्कूल की छुट्टी होने के पहले से ही इनकी नजर नाबालिग वाहन चालकों पर रही। इसके पहले पुलिस वाहन पार्किंग के संभावित ठिकानों तक पहुंच चुकी थी। स्कूल की छुट्टी के बाद बच्चे जब अपनी दोपहिया रखे ठिकानों में पहुंचे, तो वे कुछ समझ नहीं पाए। यहां मौजूद यातायात थाना व पुलिस के जवानों ने इनकी वाहनों की चाबी अपने कब्जे में ले ली। पुलिस का रूख देखकर कुछ बच्चे इनके जाने का इंतजार करने में लगे थे। पुलिस ने भी यहां चालबाजी दिखाई और इनके वाहनों को ढोकर यातायात थाना ले आई। बच्चों को अपने अभिभावकों को बुलाने कहा गया। जिन बच्चों के पास मोबाइल फोन नहीं था, उनके अभिभावकों का नंबर डॉयल करके पुलिस इन्हें यातायात थाना पहुंचने आमंत्रित की। मौके पर पहुंचे अभिभावकों को इसके बाद नाबालिगों के हाथों में दोपहिया वाहन सौंपने की गलती समझ में आई। पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में समझाइश और चालानी कार्रवाई करते हुए दोपहिया वाहनों को स्वजनों के सुपुर्द किया गया। बता दें कि पूर्व में भी पुलिस प्रशासन नेे स्कूली बच्चों के द्वारा दोपहिया वाहनों को बेतरतीब तरीके से सड़क के किनारे खड़ा करने से होने वाली परेशानी को देखते हुए वाहन जब्त करने की कार्रवाई की थी। इस दौरान कुछ नामचीन निजी स्कूलों के आसपास से पुलिस वाहनों को उठाकर थाना ले आई थी। अभिभावकों को समझाइश व चालानी कार्रवाई करने के बाद पुलिस ने वाहन अभिभावकों के सुपुर्द किया था। पुलिस की नजर में हुड़दंगी भी हैं, जो फर्राटा भरते दूसरों की जान को जोखिम में डालते हैं।
बच्चों की चालबाजी नहीं आई काम
शहर के कलेक्टोरेट परिसर के पास दो निजी स्कूलों का संचालन होता है। बच्चों को स्कूल में दोपहिया वाहन लेकर आने की मनाही है, लेकिन कई बच्चे अपने निजी वाहनों से स्कूल आते हैं। स्कूल में प्रवेश के पहले ये बच्चे अपनी वाहनों को कलेक्टोरेट परिसर के अंदर खुले मैदान में या कोई सुरक्षित जगह देखकर खड़ा कर देते हैं। पुलिस स्कूली बच्चों की इस हरकत से वाकिफ थी और उन्होंने कलेक्टोरेट परिसर में खड़ी ऐसी दोपहिया वाहनों को अपने कब्जे में ले लिया। बच्चे जब अपनी वाहन लेने यहां पहुंचे तो अधिकांश स्कूटी, मोटरसाइकिल को पुलिस ढोकर यातायात थाना के सामने लेकर खड़ा कर चुकी थी। कुछ बच्चे पुलिस की कार्रवाई से अनजान अपनी वाहन को लेने पहुंचे तो पुलिस ने सम्मान पूर्वक इनसे चाबी ले लिया और साथ में बैठाकर यातायात थाना ले गई।
गाड़ी गायब होने की करने लगे शिकायत
बच्चों ने वाहन पुलिस के कब्जे में देख अपने परिचितों का सहारा लेना शुरू किया, लेकिन पुलिस अधीक्षक व जिला कलेक्टर के निर्देशन में चल रही कार्रवाई के आगे इनकी चालबाजी नहीं चल पाई। कलेक्टोरेट परिसर में पुलिस की चल रही वाहन जब्ती की कार्रवाई के बीच कुछ लोग जब्त की जा रही वाहनों को अपना बताते हुए लेने पहुंच गए। पुलिस इन्हें समझाइश दी अगर वे बच्चों के द्वारा लाई गई वाहनों को लेने के लिए आए हैं, तो ऐसा करके वे स्वयं बच्चों को जोखिम में डालने का काम कर रहे हैं। इससे बच्चों का नहीं उनका नुकसान हो सकता है। असुरक्षित तरीके से खड़ी गाड़ियां गायब हो सकती हैं। बच्चों की रफ्तार के आगे दुर्घटना की स्थिति बन सकती है। उन्होंने ऐसे तथाकथित वाहन चालकों की नहीं सुनी और पूरी तरह से संतुष्ट होने के बाद ही वाहन सुपुर्दगी में दिया।
बयान
पुलिस अधीक्षक सुनील शर्मा के द्वारा बैठक में दिए गए निर्णय के अनुरूप दोपहिया वाहनों के विरूद्ध कार्रवाई की जा रही है। यातायात व्यवस्था दुरूस्त रहे, इसे देखते हुए बिना लाइसेंस के वाहन चलाने वाले बच्चों व नाबालिगों के वाहन को जब्त करने की कार्रवाई की गई है। पुलिस की नजर हुड़दंगियों, अवैध नशे के कारोबारियों पर भी है। पुलिस अभियान के तहत कार्रवाई कर रही है।
स्मृतिक राजनाला, नगर पुलिस अधीक्षक

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