अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के चक्कर लगाकर दत्तक पुत्रों में मायूसी
बिश्रामपुर। राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों को वर्षों बाद भी प्रथम राष्ट्रपति द्वारा बसाए जाने उपरांत आज तक उनकी भूमि का मालिकाना हक नहीं मिल सका है। यूं तो शासन द्वारा पंडो विकास प्राधिकरण की स्थापना करके दत्तक पुत्रों के उत्थान की बात की जाती है लेकिन वह भी केवल कागजों में ही पूर्ण रूप से सफल होती नजर आ रही है। प्रथम राष्ट्रपति के गोद पुत्र आज भी अपनी मूलभूत सुविधाओं के पूर्ति हेतु केवल अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के चक्कर काटने विवश हैं। गौरतलब है कि जनपद पंचायत सूरजपुर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत पंडोनगर में 22 नवंबर 1952 को देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद दिल्ली से आए थे। यहां पर उनके रुकने हेतु देश के दूसरे नंबर के राष्ट्रपति भवन का निर्माण तत्कालीन प्रशासन द्वारा कराया गया था। प्रथम राष्ट्रपति ने यहां पर पंडो विशेष जनजाति समुदाय के लोगों को गोद लेकर उनको बसाए जाने हेतु भूमि का आबंटन किया गया था। बताया जा रहा है कि प्रथम राष्ट्रपति द्वारा पंडोनगर में सबसे पहले ग्राम पंचायत गोपालपुर, करतमा, परसापारा से करीब 35 पंडो परिवार को विस्थापित कराया गया था, जो वर्तमान स्थिति में बढ़कर करीब दो सौ परिवार हो गए हैं। सभी विस्थापित पंडो परिवार को 10-10 एकड़ भूमि का मालिकाना हक दिए जाने की बात कही गई थी, बावजूद इसके अब तक केवल 85 लोगों को ही वर्ष 1982 में काबिज काश्त भूमि का पट्टा जारी किया गया और शेष परिवार आज तक अपने काबिज काश्त भूमि के पट्टा हेतु शासन-प्रशासन के पास केवल चक्कर काटने मजबूर हैं। मजे की बात तो यह है कि शासन-प्रशासन द्वारा राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों जो पट्टा जारी किया भी गया है तो उसमें केवल 4-5 परिवार को ही 5-6 एकड़ भूमि का पट्टा दिया गया और शेष पट्टाधारक को महज 10-15 डिसमिल भूमि का ही मालिकाना हक दिया गया है। प्रशासनिक त्रुटि का खामियाजा आज तक दत्तक पुत्रों को भुगतना पड़ रहा है। राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों द्वारा लंबे अरसे से अपनी मांग को लेकर कार्यालयों व जनप्रतिनिधियों के चक्कर काटे जा रहे हैं लेकिन अब तक किसी ने भी उक्त विशेष पिछड़ी जनजाति के लोगों की समस्याओं की ओर ध्यान देना उचित नहीं समझा है, जिससे राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों में मायूसी देखने को मिल रही है।
भारत सरकार द्वारा विशेष पिछड़ी जनजाति के लोगों के लिए जारी गाइडलाइन के तहत सतत कार्रवाई हो रही है। गाइड लाइन के पात्रतानुसार शासकीय भूमि का पट्टा जारी किया जा सकता है। वर्ष 2005 से भारत सरकार द्वारा शासकीय भूमि का पट्टा दिए जाने की कार्रवाई चल रही है, उसमें आवश्यकतानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया पूर्ण कर पट्टा जारी किया जा रहा है। वैसे विस्थापित पंडो परिवार को 10-10 एकड़ भूमि के पट्टा दिए जाने के संबंध में कोई आदेश नहीं हैं लेकिन बावजूद इसके भारत सरकार के 2005 में जारी गाइड लाइन के अनुसार शासकीय भूमि का पट्टा दत्तक पुत्रों को जारी किया जा रहा है।
     संजय अग्रवाल
       कलेक्टर, सूरजपुर

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