एक पावरलेस मंत्री इंगित कर बड़बोले बोल बोलने में भी पीछे नहीं
अमरजीत ने कहा-पार्टी फोरम में रखनी चाहिए बात, संगठन को मजबूत करने की जरूरत
GIRIJAA THAKUR
अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद हार पर मंथन चल रहा है, निराश नहीं होने की बातें कही जा रही हैं। वहीं कांग्रेस के कुछ दिग्गज मंत्री व विधायक का बयान पार्टी के लोगों को हताशा से उबारने के बजाए आपसी टसक को सामने ला रहा है। पूर्व मंत्री अमरजीत भगत के बयान पर नजर डालें तो इनका कहना है कि राज्य में कांग्रेस की सरकार किसी भी सूरत में बननी थी, कई कारणों से चुनाव में हार हुई है। उनका यह भी कहना है कि नेताओं को अपनी बात पार्टी के फोरम में रखनी चाहिए। संगठन को पहले की तरह मजबूत करने की जरूरत है। इधर बृहस्पत सिंह भी अपनी टीस सामने लाने में पीछे नहीं हैं। इन्हें पीसीसी ने कारण बताओ नोटिस भी जारी कर दिया है।
बता दें कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को मिली करारी मात के बाद से कांग्रेस में अपने ही नेताओं के खिलाफ बयानबाजी का दौर चल रहा है। जिन सिटिंग विधायकों की टिकट कटी, इनमें से कई लोगों ने अपने शीर्ष के नेताओं पर आरोप लगाने शुरू कर दिए हैं। रामानुजगंज से विधायक रहे बृहस्पत सिंह ने टिकट कटने का गुस्सा प्रदेश प्रभारी शैलजा कुमारी और उप मुख्यमंत्री टीएस सिंह देव पर निकाला है। इन पर कई आरोप लगाए हैं। बृहस्पत सिंह की टिप्पणी तो कुछ ऐसी है, जो हाईकमान को भी चुभ गई। जयसिंह अग्रवाल ने तो पावरलेस मंत्री होने की बात कहने में गुरेज नहीं किया। मीडिया की सुर्खियों में इनके द्वारा सामने लाई गई बातों से ऐसा प्रतीत होता है कि पूरे पांच साल हर फैसला मुख्यमंत्री भूपेश बघेल लेते रहे। ऐसे हालातों के बीच कमोबेश अपनी ही पार्टी के नेताओं की कमियों को गिनाने व ठीकरा फोड़ने का क्रम चल रहा है। वहीं सरल, सहज स्वभाव के टीएस सिंह देव हार का ठीकरा किसी पर नहीं फोड़ते हुए इसकी जिम्मेदार स्वयं अपने ऊपर लेने में पीछे नहीं रहे और पांच वर्ष जनता के बीच रहकर काम करने की बात कही है। उन्होंने पूर्व में ही संकेत दे दिया है कि वे हारकर मैदान छोड़ने वाले नहीं हैं।
बृहस्पत पर पार्टी की छवि धूमिल करने का आरोप, शो कॉज नोटिस जारी
पीसीसी ने तीन दिनों में पूर्व विधायक से मांगा लिखित जवाबरामानुजगंज से कांग्रेस पार्टी के पूर्व विधायक बृहस्पत सिंह ने प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा और पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव को हटाने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने शैलजा कुमारी को हटाने की मांग की है। प्रदेश प्रभारी शैलजा पर बड़े नेताओं के हाथों बिकने का आरोप लगाते हुए उन्होंने राहुल गांधी से तत्काल हटाने की मांग की थी। वहीं उन्होंने कहा है कि बीजेपी को सत्ता में लाने का श्रेय टीएस सिंहदेव को जाता है, मेरी भाजपा से मांग है कि इसके एवज में उन्हें राज्यपाल बनाया जाए। बृहस्पत सिंह ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ के बड़े नेताओं पर घमंड सिर चढ़कर बोल रहा था। टीएस सिंहदेव को सवालों के घेरे में लेते हुए उन्होंने कहा था कि कांग्रेस जिस पीएम को घेर रही थी, डिप्टी सीएम मंच से उनके लिए कह रहे थे, मोदी अच्छा काम कर रहे हैं, ऐसे में जनता और कांग्रेस कार्यकर्ता कैसे समर्थन करते? पूरी पार्टी कहती रही कि हमने 36 वादे पूरे किए और टीएस सिंहदेव बार-बार दोहराते रहे कि 12 वादे पूरे किए गए हैं। उन्होंने यह भी कहने में कसर नहीं छोड़ी थी कि टीएस सिंहदेव सीएम बनते तो कांग्रेस की वही हालत होती, जो पांच वर्ष पहले रमन सरकार की हुई थी, हम 15 सीटों पर सिमट जाते।

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