सूरजपुर।1967 में आस्तित्व में आई प्रेमनगर विधानसभा क्षेत्र का रिकॉर्ड रहा है कि यहां कभी किसी भी उम्मीदवार को लगातार तीसरी बार जीत का अवसर नही दिया है। दिलचस्प यह भी है कि प्रेमनगर विधानसभा में कांग्रेस के कद्दावर नेता सांसद से लेकर विधायक तक का कई बार सफर कर चुके अनुभवी खेलसाय सिंह को भाजपा के नए नवेले प्रत्याशी के हाथों बड़े अंतर से करारी शिकस्त मिली है जो एक रिकार्ड बन गया है।क्योंकि इतनी बड़ी जीत आज तक इस विधानसभा क्षेत्र से किसी को मिली नही।लिहाजा, प्रेमनगर विधानसभा क्षेत्र की जो तासीर है वह  हर बार की तरह इस बार भी बरकरार रही है। यहां से लगातार तीसरी बार किसी भी प्रत्याशी के सिर पर जीत का सेहरा नहीं सज सका है। अपनी इस परंपरा का निर्वहन इस बार भी क्षेत्र की जनता ने करते हुए कांग्रेस के कद्दावर नेता को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया है। कांग्रेस प्रत्याशी खेलसाय सिंह के राजनीतिक कैरियर से अगर जीत का ताज हासिल करने वाले भाजपा प्रत्याशी भूलन सिंह का मुकाबला किया जाए तो भूलन ने ग्राम पंचायत की राजनीति से धीरे धीरे ऊपर उठते हुए जिला पंचायत, भाजपा के ग्रामीण कार्यकर्ता से जिला उपाध्यक्ष तक का सफर तय कर चुके है। मगर जहां तक राजनीति में अनुभव की बात है तो खेलसाय सिंह के राजनीतिक अनुभव व सफर के सामने भूलन अंकुरित जैसे है। संघ की विचारधारा से जुड़े भूलन सिंह को भाजपा ने दो माह पहले टिकिट देकर एक सधी रणनीति चली और उन्हें पर्याप्त मौका मिला कि वे न केवल आम जनता से मिले बल्कि टिकिट के दावेदार भाजपा के अन्य नेताओं को मना ले।जिसके परिणामस्वरूप वे विजेता साबित हुए।इधर, कांग्रेस को गुटबाज़ी के साथ सत्ता विरोधी लहर ले डूबी।बीते दस वर्ष से विधायक रहे खेलसाय सिंह बेहद सरल व सज्जन की छवि के है पर यह उन्हें यह उम्मीद कतई नही थी उनको लेकर क्षेत्र में इतनी नाराजगी भी है।गुटबाज़ी की हालात यह भी रही कि शहर तक मे कांग्रेस की चुनाव के दौरान न तो ढंग से कोई रैली कर सके और न ही प्रत्याशी तो छोड़िए कांग्रेस का कोई बन्दा किसी भी वार्ड में वोट मांगने तक नही गया।जबकि नगर के नपा में कांग्रेस की सरकार के साथ एल्डरमेन,पार्षद,विधायक प्रतिनिधियो की बड़ी फ़ौज थी।पांच वर्ष बाद एक बार मौका रहता है जब जनता अपने उम्मीदवार या उसके प्रतिनिधि से रूबरू हो पर किसी ने शहर के मतदाताओं से सम्पर्क करने की कोशिश नही की।जिससे शहर के मतदाता काफी नाराज रहे।जिसका खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ा है।
0 *नही चला यह दांव…..!*
चुनाव के पहले कांग्रेस ने एक बड़ा दांव चला था,जिसमे जिले के रजवार समाज की एक बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया था कि रजवार समाज को आदिवासी वर्ग में शामिल करने की पहल भाजपा करती है तो ठीक वरना पूरा समाज कांग्रेस को वोट ही नही करेगा बल्कि पैसा व संसाधन देकर कांग्रेस को जिताने में मदद करेंगे।परिणाम से तो यह साबित हो रहा कि कांग्रेस का यह दांव काम नही आया लेकिन समाज की ओर से इस पर कोई खंडन भी नही आया था,तब भी जब कई चेहरे भाजपा से भी जुड़े हुए थे और तब भी जब भाजपा ने सम्भाग में इस समाज के दो लोगो को अपना उम्मीदवार बनाया।बावजूद इसके भाजपा से जुड़े चेहरे पार्टी में संदिग्ध बने रहे।हालत यह रही मतदान के बाद पार्टी की समीक्षा में ऐसे चेहरो को पार्टी के कथित आला नेताओ की खरीखोटी भी सुननी पड़ी।पर परिणाम ने यह जता दिया कि समाज के लोग अपने इरादे भले सार्वजनिक न किया हो पर भाजपा के प्रति उनकी आस्था कम नही हुई।

Categorized in: