उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव का सामना पूर्व नपं अध्यक्ष राजेश अग्रवाल से
पिछले तीन विधानसभा चुनाव में सिंहदेवों के बीच होती थी टक्कर

अंबिकापुर। विधानसभा चुनाव में सर्वाधिक हाईप्रोफाइल सीट अंबिकापुर से भाजपा प्रत्याशी को लेकर बनी उहापोह की स्थिति पर पार्टी की ओर से जारी अंतिम सूची के बाद विराम लग गया। भाजपा के द्वारा 86 सीटों से विधायक प्रत्याशी की घोषणा करने के बाद प्रदेश में चार विधानसभा सीटों के प्रत्याशियों की घोषणा शेष थी। बुधवार को भारतीय जनता पार्टी केंद्रीय कार्यालय के राष्ट्रीय महासचिव एवं मुख्यालय प्रभारी अरूण सिंह ने अंबिकापुर विधानसभा सीट क्रमांक 10 से राजेश अग्रवाल को मैदान में उतारा है। इनकी सीधी टक्कर छत्तीसगढ़ प्रदेश के उपमुख्यमंत्री व अंबिकापुर के सिटिंग एमएलए टीएस सिंहदेव से है। पिछले तीन विधानसभा चुनावों में इन्होंने भाजपा के प्रत्याशी अनुराग सिंहदेव को पटखनी दी है। राजेश अग्रवाल पूर्व में कांग्रेस के ही अंग रहे। वर्ष 2018 के पहले इन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कामकाज से प्रभावित होकर भाजपा का दामन थामा था।

कांग्रेस व भाजपा की ओर से सभी 90 सीटों में प्रत्याशियों की घोषणा करने के बाद तस्वीर साफ है। नामांकन फार्म भरने और जमा करने के बाद मतदाताओं कौन, कितना रिझा पाएगा कह पाना फिलहाल मुश्किल है। मतदान तिथि में महज 23 दिन शेष हैं। हालांकि इस बीच संभावित व चुनाव में खुद को प्रबल दावेदार मानने वाले चेहरे जनता के बीच खुद को प्रचारित करने में पीछे नहीं रहे। खासकर कांग्रेस की ओर से अंबिकापुर विधानसभा से चिर-परिचित चेहरे को सामने लाने के बाद भाजपा की ओर से कुछ संभावित नाम भी चर्चा में रहे। इधर भाजपा की ओर से प्रदेश की शेष चार सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा के बाद टकराहट किससे, यह स्पष्ट हो गया है। चुनाव परिणाम सामने आने के बाद ही पता चलेगा कि विगत 15 वर्षों से टीएस सिंहदेव के 39 हजार 624 मतों के अंतर को भाजपा की ओर से घोषित उम्मीदवार राजेश अग्रवाल पाटने में किस हद तक कामयाब होंगे। बता दें अंबिकापुर विधानसभा सीट से टीएस सिंहदेव के विरूद्ध विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा कांग्रेस के ही चिंतामणी महराज ने सामरी विधानसभा से चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर हाल में भाजपा के दिग्गज नेताओं के समक्ष जताई थी। इधर भाजपा नेे इन्हें लोकसभा चुनाव में मौका देने कहा है। अंबिकापुर विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी को लेकर स्थिति स्पष्ट होने के बाद चिंतामणी महराज किधर करवट लेंगे, इसे लेकर संशय बरकरार है।

2003 के बाद बदले हालात
छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद से चुनाव के हालात पर गौर करें तो तीन वर्षीय अजीत प्रमोद कुमार जोगी के शासनकाल के बाद वर्ष 2003 में हुए चुनाव में भाजपा प्रत्याशी ने अंबिकापुर विधानसभा सीट से जीत का झंडा गाड़ा था। इसके बाद वर्ष 2008, 2013 व 2018 में भाजपा को लगातार हार का सामना करना पड़ा। तीनों चुनाव में अंबिकापुर सामान्य विधानसभा सीट से कांग्रेस से टीएस सिंहदेव व भाजपा से अनुराग सिंहदेव आमने-सामने थे। हालांकि वर्ष 2008 के चुनाव में अनुराग सिंहदेव भी प्रबल दावेदार रहे। इन्होंने टीएस सिंहदेव को कड़ी टक्कर दी थी और 948 वोट से ही जीत दर्ज कर पाए थे। इसके बाद मतों का अंतर काफी बढ़ा।

इनकी पकड़ इस क्षेत्र में मजबूत
जानकारों का कहना है कि भाजपा की ओर से घोषित किए गए प्रत्याशी राजेश अग्रवाल की पकड़ लखनपुर व उदयपुर क्षेत्र में कमजोर नहीं है। वे पूर्व में नगर पंचायत अध्यक्ष लखनपुर भी रह चुके हैं। वर्तमान में वे भाजपा जिला कार्यसमिति सरगुजा के सदस्य भी हैं। व्यवसायिक गतिविधि से जुड़े होने के कारण इन्हें किसी मायने में कम नहीं आंका जा सकता है।

2018 के चुनाव में रही यह स्थिति
वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में अंबिकापुर सीट से कांग्रेस व भाजपा सहित 23 प्रत्याशी मैदान में थे। इस सीट से टीएस सिंहदेव के निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा प्रत्याशी अनुराग सिंहदेव रहे। इनके बीच हुई सीधी टक्कर में अनुराग को 39,624 मतों से हार का सामना करना पड़ा था। टीएस सिंहदेव को एक लाख 434 मत और अनुराग सिंहदेव को 60,815 मत मिले थे। ऐसे में भाजपा के राजेश अग्रवाल के समक्ष बड़ी चुनौती बड़े मतांतर को पाटने व सिंहदेव के समक्ष इस अंतर को बरकरार रखने की है। मतदाताओं को भ्रमित करने एक टीएस बाबा जनता कांग्रेस से खड़ा किए गए थे, इनकी जमानत जब्त हो गई थी। भाजपा प्रत्याशी को छोड़ दें तो अन्य प्रत्याशियों की भी यही स्थिति रही। गोंगपा के गोपाल प्रसाद गुप्ता 4459 मत प्राप्त कर तीसरे स्थान पर रहे। निर्दलीय तरुण भगत ने 2173 मत व निर्दलीय क्रांति कुमार रावत को 2103 मत मिले थे। इसके बाद चुनाव की होड़ में शामिल सभी प्रत्याशियों की अपेक्षा नोटा को 609 मतदाताओं ने अंगीकार किया।
भाजपा की अंतिम सूची में घोषित प्रत्याशी
अंबिकापुर राजेश अग्रवाल
बेलतरा सुशांत शुक्ला
कसडोल धनीराम धीवर
बेमेतरा दीपेश साहू

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