सीईओ की पदस्थापना के बाद जनपद पंचायत की व्यवस्था चरमराई
प्रतापपुर। शासन ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए पंचायती राज व्यवस्था को सुदृढ़ रखने प्रति वर्ष करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर अधिकारी पंचायती राज व्यवस्था को ध्वस्त करने में लगे हैं। जनपद पंचायत प्रतापपुर का कुछ ऐसा ही हाल है। नए सीईओ पारस राम पैकरा की पदस्थापना के बाद से ही पंचायतों में अव्यवस्थाओं का दौर शुरू हो गया है। लगभग तीन माह से जनपद पंचायत प्रतापपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत डांड़करवां, गोरगी, धूमाडांड़ पंचायतों की जिम्मेदारी अकेले संभाल रहे सचिव अनिल गुप्ता को जिला पंचायत कार्यालय में संलग्न कर दिया गया पर अभी तक इन तीनों पंचायतों में जनपद सीईओ द्वारा नए सचिव की पदस्थापना नहीं करने से तीनों पंचायतें सचिव रहित हैं। वहीं जिला पंचायत में संलग्न सचिव इन पंचायतों का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन आहरण, वितरण से संबंधित कार्य नहीं कर पा रहे हैं। पंचायत सचिव की पदस्थापना के अभाव में विकास कार्यों के लिए शासन की ओर से पंचायतों के खातों में भेजी गई राशि अटकी पड़ी है। तीनों पंचायतों के सरपंचों का कहना है कि सचिव के हस्ताक्षर बगैर वे पंचायतों के खातों से राशि आहरण नहीं कर पा रहे हैं, जिससे विकास कार्य अवरुद्ध हो गए हैं। सचिव के नहीं रहने से ग्रामीणों को छोटे-छोटे कामों के लिए भटकना पड़ रहा है। जनपद पंचायत के अध्यक्ष जगत लाल आयम द्वारा इसकी जानकारी जनपद सीईओ पारस राम पैकरा को दी गई है, इसके बाद भी उनकी चुप्पी समझ से परे है।
एक अन्य पंचायत में भी यही स्थिति
जनपद पंचायत प्रतापपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत चाचीडांड़ भी सचिव रहित है। यहां के सचिव के पर ग्रामीणों द्वारा लगाए गए अनियमितताओं के आरोप के बाद तत्कालीन सीईओ मो. निजामुद्दीन ने उसे हटाकर नए सचिव को पदस्थ किया था, पर उक्त सचिव को प्रभार पूर्व सचिव नहीं दे रहा है, जिसके कारण इस पंचायत के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों को मिल रही पेंशन में बाधा की स्थिति बन रही है।
सचिवों की पदस्थापना के संबंध में जनपद पंचायत सीईओ से प्रस्ताव मांगा गया है। प्रस्ताव मिलने पश्चात इनकी पदस्थापना कर दी जाएगी।
नीलम कोशाम
जिला पंचायत सीईओ
