सरकार ने कागजी आंकड़ों की बाजीगरी करके आधा बिजली दर का ढोल पीटा, किया तीन माह में 15.25 प्रतिशत की वृद्धि

अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार ने पांच वर्ष में अपनी छवि आम जनता के बीच ठगेश सरकार के रूप में स्थापित की है। इसका ज्वलंत उदाहरण अप्रैल 2023 से बिजली दर में कोई वृद्धि नहीं और पिछले दरवाजे से अप्रैल में हुई बिजली खपत का मई महीने में 5.33 प्रतिशत, मई की बिजली का जून में 10.88 प्रतिशत और जून की बिजली का जुलाई माह में 15.25 प्रतिशत महंगा होना है। उक्त बातें शहर के संकल्प भवन, भाजपा कार्यालय में पत्रकारों से चर्चा करते हुए पूर्व केबिनेट मंत्री प्रेम प्रकाश पांडेय ने कही। उन्होंने कहा कि घरेलू, गैर घरेलू किसान व उद्योग सभी वर्गों के उपभोक्ता असहाय हैं। बिजली बिल का आधा भुगतान के नाम पर थोपे जा रहे बिल का कारण जानने की कोशिश में कागजी आकड़ों की बाजीगरी का खेल सामने आया है। कागजी आंकड़ों के खेल की पोल केवल तीन महीने में ही खुल गई। वहीं छतीसगढ़ में चुनावी वर्ष होने के कारण सीएसपीडीसीएल की वर्ष 2023-24 के लिए घोषित बिजली दरों में घाटा होने के बाद भी कोई बढ़ोतरी नहीं की गई। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री द्वारा बिजली दर नहीं बढ़ाने का बढ़-चढ़कर श्रेय लिया, जबकि अप्रैल, मई और जून के बिजली दर को पुराने डेट से ही बढ़ा दिया गया और अंतर की राशि जून, जुलाई, अगस्त माह में समायोजन प्रभार (एफपीपीएएस) के रूप में वसूला जा चुका है। ऐसे में उपभोक्ता को समझ में नहीं आ रहा है किबिजली दर बढ़ी नहीं तो बिजली बिल कैसे बढ़ गया। इसके कारण के तह में जाने पर सामने आया कि बिजली दर नहीं बढ़ाने के कागजी आकड़ों के खेल में तीन बाजीगरियां की गई। बिजली बिल में लिखे कैरी फारवर्ड की ओर जनता का ध्यान नहीं गया है। छूट के नाम पर लूट जनता के सामने आ गया है। उन्होंने चुटकी लेते हुए मदारी गेड़ी, गिल्ली डंडा का खेल दिखा रहा है, पाकिटमार चारों ओर घूम रहे हैं। पत्रकारों से चर्चा के दौरान भाजपा जिला अध्यक्ष ललन प्रताप सिंह, रजनी रविशंकर त्रिपाठी, त्रिलोक कपूर कुशवाहा, प्रशांत शंकर त्रिपाठी, मधुसुदन शुक्ला, विश्वविजय सिंह तोमर सहित अन्य उपस्थित थे।

सरकार ने ऐसे की बाजीगरी
पूर्व केबिनेट मंत्री प्रेम प्रकाश पांडेय ने कहा बिजली खरीदी का रेट कागजों में कम दिखाकर बाद में समायोजन प्रभार (एफपीपीएएस) के नाम पर अगले महीने ही वास्तविक राशि वसूल ली गई। यही नहीं प्राप्त होने वाले रेवेन्यु को ज्यादा दिखाकर कागजों में फायदा दिखाया, ताकि पोल खुले तो अगले साल घाटा नजर आए। पिछले साल के घाटे को बिना भरपाई किए जस का तस छोड़ दिया गया। चुनावी साल होने के कारण बिजली दर वृद्धि को टालने हेतु उक्त तीन बाजीगरी की गई। उन्होंने कहा बड़े-बूढ़े कह गए कि झूठ ढाई घंटे या ढाई दिन, ज्यादा से ज्यादा ढाई महीने ही टिकता है, परिणाम सामने है। अप्रैल का झूठ जून, मई का झूठ जुलाई और जून का झूठ अगस्त में बाहर आ ही गया। उन्होंने कहा सीएसपीडीसीएल द्वारा 31.07.2023 को जारी अधिसूचना के अनुसार जून में प्रदाय की गई बिजली 15.25 प्रतिशत महंगी हुई, जिसकी वसूली अगस्त में की गई। ऐसे में मुख्यमंत्रीजी द्वारा दिया गया बिजली दर नहीं बढ़ाने का बयान खोखला निकला। इस 15.25 प्रतिशत वृद्धि में से 14.23 प्रतिशत वृद्धि की उगाही अगस्त माह से तथा बचे हुए 1.02 प्रतिशत की उगाही आने वाले वर्ष में होगी। यह समायोजन प्रभार (एफपीपीएएस) 15.25 प्रतिशत आना विद्युत खरीदी की दर को वास्तविकता से कम आंकने के कारण हुआ।

सरकार घाव को बना रही नासूर
प्रेम प्रकाश पांडेय ने कहा बिजली दर किस वर्ष कितनी बढ़ेगी यह इस बात पर निर्भर करता है कि सीएसपीडीसीएल को उस वर्ष कितना प्रतिशत घाटा हुआ है। जिस वर्ष जितने प्रतिशत का घाटा, उस वर्ष उतने ही प्रतिशत बिजली दर में बढ़ोतरी। वर्तमान वर्ष 2023-24 में भी सीएसपीडीसीएल का 2528 करोड़ रुपये के घाटे का अनुमान लगाया गया है, जोकि लगभग 13 प्रतिशत प्रतिशत के टैरिफ की वृद्धि बराबर है। यदि सरकार चाहती है बिजली दरों में बढ़ोतरी न की जाए तो सरकार को घाटे की भरपाई कर देना था, किंतु ऐसा न करते हुए घाटा को जस का तस छोड़ दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब टैरिफ नहीं बढ़ा और घाटे की भरपाई सरकार द्वारा नहीं की गई तो बिजली वितरण कंपनी की माली हालत का क्या होगा। सरकार सीएसपीडीसीएल को बीमारू बनाकर आज के घाव को जनता के लिए ब्याज लगाकर कल नासूर बनाना चाहती है।

भाजपा सरकार करती रही भरपाई
पूर्व केबिनेट मंत्री ने कहा भाजपा सरकार द्वारा टैरिफ नहीं बढ़ाने की स्थिति में समय-समय पर घाटे की भरपाई की जाती रही है तथा सीएसपीडीसीएल के घाटे की भरपाई हेतु वर्ष 2014-15, वर्ष 2015-16 एवं वर्ष 2016-17 में क्रमश: 465 करोड़, 450 करोड़ एवं 350 करोड़ रुपये जारी किए गए। चूंकि वर्तमान घाटे की भरपाई कांग्रेस सरकार द्वारा नहीं की गई, ऐसे में वर्तमान 15.25 प्रतिशत की वृद्धि के अलावा अगले साल भी टैरिफ लगभग 20 प्रतिशत बढ़ना तय है। इतनी तेजी से बढ़ रहे टैरिफ से उद्योगों के बीच अभी से खलबली मची हुई है और बाजार की प्रतिस्पर्धा से बाहर होने का डर सताने लगा है। उन्होंने कहा सरकार द्वारा 2528 करोड़ रुपये घाटे की भरपाई नहीं किया जाना लगभग तय है कारण यह कि सरकार द्वारा पहले ही स्टील प्लाटों को दी जा रही सब्सिडी को 31.07.2021 से बंद करते हुए 25 प्रतिशत की टैरिफ के रूप में अपने सर का बोझ एक अगस्त 2021 से जनता के सिर पर लगभग टैरिफ वृद्धि के रूप में डाल दिया, अर्थात स्टील प्लांट के अलावा अन्य उपभोक्ता अपनी बिजली बिल से लगभग 4 प्रतिशत राशि स्टील प्लाटों के 25 प्रतिशत छूट का पटा रहे है। छूट के बोझ की वसूली वर्ष 2021-22, 2022-23 एवं 2023-24 में हुई है। यह वसूली प्रतिवर्ष लगभग 700 से 750 करोड रुपये के आसपास है। इस वसूली का टोटल करें तो आधा बिजली बिल योजना हेतु दी गई सब्सिडी के आस-पास पहुंच जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया हाफ बिजली बिल योजना का पैसा जनता से ही बिजली बिल के मार्फत वसूला जा रहा है, तो इस सरकार ने जनता को दिया क्या? सरकार ने दिया है कागजी आंकड़ों की बाजीगरी में टैरिफ वृद्धि एवं अगले साल के लिए लगभग 20 प्रतिशत वृद्धि की चिंता।

जनता का 80 करोड़ लूट ली सरकार
प्रेम प्रकाश पांडेय ने कहा भाजपा सरकार द्वारा 2018 में छोड़े गए बिजली के बैलेंस शीट की तुलना करने से स्पष्ट हो जाएगा कि भाजपा सरकार की दूरदर्शी नीतियों के कारण वर्ष 2019-20 में कोई घाटा नहीं छोड़ना पड़ा। घरेलू, गैर घरेलू, कृषि एवं उद्योग सभी वर्गों की टैरिफ लगभग 5-10 प्रतिशत कम हुई। हालमें इसी प्रकार सरकार का एक और झूठ बेनकाब हुआ है वह बीएसपी टाउनशिप में बिजली बिल हाफ योजना, जिसे लेकर सरकार पिछले 5 साल से सीएसपीडीसीएल की सप्लाई न होने का झूठ परोस रही थी, अब यही सरकार टाउनशिप में सीएसपीडीसीएल की सप्लाई न होने पर भी बिजली बिल हाफ योजना लागू करते हुए टाउनशिप की जनता का पिछले सालों का 80 करोड़ रुपये लूट ली। यही बात इस सरकार को झूठ और लूट की सरकार कहने पर विवश करता है।

ठगेश ने पहले तो टीएस बाबा को ठगा
पूर्व केबिनेट मंत्री प्रेम प्रकाश पांडेय ने पत्रकारों के सवाल पर कहा कांग्रेस का युवाओं से भेंट-मुलाकात प्रायोजित है। ऐसा कोई सगा नहीं, कका ने जिसे ठगा नहीं। उन्होंने कहा ठगेश सरकार ने पहले तो टीएस बाबा को ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री का ख्वाब दिखाकर ठगा। तलवार लेकर घूमते रह गए महराज, भूपेश ने कटार से ही निपटा दिया। अब उप मुख्यमंत्री बनाकर जिस ऊर्जा से ऊर्जा गई, उसी विभाग का मंत्री बना दिया। बेरोजगार युवाओं के लिए भूपेश सरकार को 15 हजार करोड़ देना था लेकिन बजट में 300 करोड़ का प्रावधान बनाया। 15 हजार 700 करोड़ रुपये से बेरोजगार वंचित हैं। पांच वर्ष हो गए छात्रसंघ का चुनाव नहीं हुआ है। सरगुजा में साठ हजार पंजीकृत बेरोजगार युवा है, लाभ लगभग 3000 युवाओं को मिल रहा है।

करप्शन की जांच के लिए नहीं दी अनुमति
प्रेम प्रकाश पांडेय ने कहा किसी भी बात पर सीबीआई, ईडी से जांच की मांग करने वाली कांग्रेस, सीबीआई के द्वारा सरकार मुख्य सचिव को जनवरी 2019 से अप्रैल 2023 के बीच 28 बार पत्र लिखने के बाद भी भ्रष्टाचार के केस की जांच के लिए अनुमति नहीं दी। ईडी की धमक प्रदेश में होने के बाद चिल्ला रहे हैं। राहुल गांधी को कोर्ट से राहत मिली, इसलिए न्यायालय पर आरोप नहीं लगा रहे हैं। चुनाव जीत गए तो ईवीएम ठीक, नहीं तो मशीन खराब का आरोप लगता है।    

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