दो साल से बारहवीं की अंकसूची ना मिलने से छात्रा आगे की पढ़ाई से वंचित…

बैकुंठपुर-भरतपुर/

शिक्षा के मंदिर में ज्ञानार्जन के लिए गए स्कूली बच्चे अवैध वसूली का शिकार हो रहे हैं। टीसी और अंकसूची ना मिलने से उनकी आगे की पढ़ाई पर प्रश्नचिन्ह लग रहा है। एमसीबी जिले के भरतपुर विकासखण्ड में छात्र छात्राओं के पास 200 रुपये नही होने से छात्र को शिक्षक ने नही दे रहे है। अंकसूची को लेकर कई बार छात्र छात्राएं विद्यालय का चक्कर काटने को मजबूर है । वही एक छात्रा के पास अंक सूची नही होने से वह आगे की पढ़ाई नही कर पा रही है।

उल्लेखनीय है कि भरतपुर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक  विद्यालय माड़ीसरई में अंक सूची व शाला त्याग प्रमाण पत्र लेने वाली प्रति छात्राओं से  200 रुपये से लेकर 300 रुपये शुल्क के रूप में वसूल किया जा रहा है। इसको लेकर अभिभावकों में आक्रोश व्याप्त है। वही नव प्रवेश शुल्क भी अन्य स्कूल में जहां दसवीं कक्षा में 410 रुपये 12वीं कक्षा में 445 रुपये हैं, लेकिन माड़ीसरई स्कूल में दसवीं कक्षा में 590 रुपये 12वीं कक्षा में 590 रुपये खुलेआम लिया जा रहा है। अभिभावकों का कहना कि ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण वे इतना ज्यादा पैसा कहां से लाएंगे?  जिससे उनके बच्चे स्कूल में पढ़ाई कर सके वही अभिभावकों ने कहा कि सारे स्कूलों की अपेक्षा माड़ीसरई सरकारी स्कूल में इतना ज्यादा पैसा कहां से जमा करे । वही विद्यालय की एक छात्रा प्रियंका केवट के पास पैसा ना होने के कारण आज तक अंकसूची नहीं दी गई जिसके चलते आज उसकी पढ़ाई रुक गई है। माड़ीसरई में रहने वाले ग्रामीणों का यह कहना कि जब से यहां पर नए प्राचार्य आए हैं तब से बिना दक्षिणा लिए कोई काम नहीं किया जाता। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के गरीब तबके के बच्चें यहां पढ़ते हैं लेकिन अवैध वसूली के कारण अभिभावक परेशान है। वही छात्रा के द्वारा बताया गया कि मैं अपना रिजल्ट लेने गई थी। जहा शिक्षक के द्वारा 200 रुपये मांगे गये मेरे पास नही था। मैं दो बार गई लेकिन बिना पैसे के रिजल्ट नही मिला। वही परिजनों के द्वारा बताया गया कि 200 रुपये ले रहे है अंकसूची का मेरे द्वारा 100 रुपये दिया गया है अभी 100 रुपये और देना बाकी है। दो साल से मेरी लड़की का अंकसूची पड़ा है मेरी लड़की 12 वी पास कर ली है।

वही जब स्कूल के प्राचार्य से पूछा गया तो उनके द्वारा अपना पल्ला झाड़ते हुये गोल मटोल जवाब दिया गया । वही अब देखना होगा कि प्रशासन दो साल से 200 रुपये के लिए एक छात्रा को कब तक उसकी अंकसूची दिला पाता है।

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