कांग्रेस पार्टी की महासचिव और नेता प्रियंका गांधी की सियासी पारी राज्यसभा के रास्ते जल्द ही शुरू हो सकती है. खबर है कि सोनिया गांधी की मौजूदगी में हुए फैसले में उनको राज्यसभा भेजे जाने की तैयारी पूरी हो चुकी है. वहीं सोनिया गांधी 2024 में गांधी परिवार की पारंपरिक रायबरेली की लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेगी या नहीं इस पर अभी फैसला नहीं हो पाया है.

सूत्रों के मुताबिक सोनिया गांधी के साथ हुई पार्टी के बड़े नेताओं की बैठक में यह फैसला लिया गया है कि प्रियंका गांधी 2024 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी बल्कि उनको हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा भेजा जाएगा. पार्टी नेताओं ने कहा कि प्रियंका गांधी किसी एक सीट पर चुनाव लड़ने की बजाए पूरे देश में पार्टी और यूपीए गठबंधन के लिए प्रचार करें. पार्टी नेताओं ने कहा कि प्रियंका को प्रचार के लिए सिर्फ यूपी तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि देश के अन्य भागों में भी जाना चाहिए.

लोकसभा चुनाव में स्टार प्रचारक होंगी प्रियंका गांधी?
वहीं अलग-अलग राज्यों के कई राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफा देकर अन्य राज्यों से ताल्लुक रखने वाले नेताओं को भी इसी तरह की पेश-कश की है. इनमें से एक राज्यसभा सांसद ने नाम न छापने की शर्त पर इस बात की पुष्टी की है. पार्टी के ज्यादातर नेताओं का मानना है कि प्रियंका गांधी बड़ी स्टार प्रचारक हो सकती हैं ऐसे में उनको लोकसभा चुनाव नहीं लड़ना चाहिए.

हालांकि कुछ नेताओं की राय थी कि प्रियंका के लोकसभा चुनाव लड़ने से वह एक बड़े चेहरे के तौर पर उभर कर सामने आएंगी. ज्यादातर नेताओं का यह भी मानना है कि कांग्रेस पार्टी को लोकसभा चुनाव में किसी को भी पीएम फेस के तौर पर नहीं पेश करना चाहिए इससे सहयोगी दल ज्यादा भरोसे के साथ यूपीए गठबंधन में शामिल हो सकते हैं.

अमेठी से गांधी परिवार का कौन सदस्य लड़ेगा चुनाव?
कांग्रेस के विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक यह तय किया गया है कि नेहरू गांधी परिवार का कोई भी सदस्य इस बार अमेठी सीट से लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ेगा. अमेठी सीट को लेकर परिवार और कांग्रेस पार्टी कि अब कोई खास दिलचस्पी भी नहीं रह गई है. महागठबंधन होने पर कांग्रेस अमेठी की सीट को लेकर प्रभावशाली तरीके से दावेदारी भी नहीं करेगी.

ज्यादा संभावना इसी बात की है कि महागठबंधन होने पर कांग्रेस यह सीट सहयोगी दलों के लिए छोड़ सकती है. वहीं सोनिया गांधी के चुनाव लड़ने पर भी अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है, अगर सोनिया इस बार चुनाव नहीं लड़ती हैं तो भी कांग्रेस का ही कोई उम्मीदवार रायबरेली से चुनाव लड़ेगा

राजस्थान में भी बड़े बदलाव की तैयारी

सबसे दिलचस्प बात ये है कि राजस्थान में भी जल्द नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर मुहर लग सकती है. क्योंकि राज्य में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच मनमुटाव खुलकर सामने आ गया है. इसके अलावा युवा चेहरों को मौका देने के उद्देश्य से जल्द ही एक नई कांग्रेस वर्किंग कमेटी चुनी जाएगी. रायपुर के अधिवेशन में इसे लेकर प्रस्ताव भी पारित हुआ था.

सूत्रों के मुताबिक, पूरे सांगठनिक फेरबदल की प्रक्रिया अगले एक से तीन सप्ताह में पूरी कर ली जाएगी. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पास इन पदों के लिए उम्मीदवारों के नाम पहुंच चुके हैं.

क्या राजस्थान में जारी घमासान पर लगेगा विराम?
राजस्थान में लंबे वक्त से गहलोत और पायलट के बीच विवाद चल रहा है. पिछले कुछ दिनों से दोनों नेताओं ने खुले तौर पर एक दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. वहीं, कांग्रेस कई महीनों से राजस्थान का संकट टाल रही है.

राहुल ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान दोनों नेताओं को साथ लाने की कोशिश की थी. कर्नाटक चुनाव के बाद दोनों नेताओं से बातचीत भी की गई. अमेरिका दौरे पर जाने से ठीक पहले राहुल गांधी ने दोनों से मुलाकात की थी. इस दौरान पायलट और गहलोत को समझाने की कोशिश भी की गई. ताकि राजस्थान चुनाव से पहले एकजुटता का संदेश दिया जा सके. हालांकि अभी तक कोई फॉर्मूला नहीं निकल सका है, क्योंकि दोनों नेता अपने-अपने स्टैंड पर अड़े हैं.

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