अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में हाल में ही कथित रूप से जहरीली शराब का सेवन करने से मौत का मामला सामने आया था, इसके बाद भी शासन द्वारा संचालित शासकीय अंग्रेजी शराब दुकान में परोसी जा रही शराब की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसके पहले अंग्रेजी शराब दुकानों में सेल्समैन के द्वारा मिलावटखोरी का मामला सुर्खियों में ही नहीं रहा, बल्कि छापामार कार्रवाई के बाद इस मामले में जेल तक दोषियों को जाना पड़ा था। इसके बाद भी कभी यहां बिकने वाली शराब अंकित नए सत्र की निर्माण तिथि को लेकर सुर्खियां बनी, तो कभी ग्राहक के द्वारा खरीदी गई सील बंद शराब की शीशी के अंदर फंगस का नजारा देखने को मिल रहा है। ऐसे में उपभोक्ता दंगल के  गाने को याद करते मिमिक्री कर रहे हैं…सरकार-सेहत के लिए तू तो हानिकारक है। हालांकि यह गाना एक पिता की बच्चियों को सेहतमन्द बनाने की ख़्वाहिश से जुड़ा है। शराब के शौकीन व कभी-कभार ब्रांडेड शराब तलाशते शराब दुकानों में कदम रखने वाले ऐसे हालात सामने आने के बाद सवाल उठा रहे हैं कि अन्य राज्यों की तुलना में छत्तीसगढ़ में महंगी शराब बेचने के बाद भी सरकारी तंत्र को लोगों के जान की परवाह नहीं है। यह सवाल उठना इसलिए भी लाजिमी है क्योंकि शराब की बोतल या अद्धी, पउवा की शीशी लेने के बाद ग्राहक निकल लेते हैं। इसके बाद शराब दुकानों के सेल्समैन मानने को तैयार नहीं होते कि उक्त शराब उनके यहां से खरीदी गई है। शराब दुकानों से ऐसी कोई पर्ची यस बिल नहीं दी जाती है, जिससे किस दुकान से शराब खरीदी गई, इसकी पुष्टि हो सके। ऐसे में शराब के शौकीन दुविधाजनक स्थिति से गुजरते हैं।
गुरुवार की दोपहर ऐसा ही एक मामला सामने आया। प्रिंस नामक एक युवक ने गाड़ाघाट स्थित शासकीय अंग्रेजी शराब दुकान से ब्लू रसियन ऑरेंज कपल फ्लेवर्ड वोदका शराब की 180 एमएल की सील बंद शीशी खरीदी। शराब की शीशी लेकर वह अपने साथी के साथ अंग्रेजी शराब दुकान की सीढ़ियां उतरा था, तभी नजर शीशी के अंदर शराब में तैरते कीड़ानुमा फंगस पर पड़ी। शीशी सीलबंद होने के बाद भी जन स्वास्थ्य से चल रहे खिलवाड़ की ओर उन्होंने शराब दुकान के सेल्समैन का ध्यान दिलाया, तो वह शीशी वापस करने कहा, ताकि इस बात का वहीं पटाक्षेप हो जाए और उन पर भी उंगली ना उठे। इधर क्रेता ने शासकीय दुकानों में मिलने वाली अंग्रेजी शराब में मिलावट की भर्राशाही के बीच कीड़े, फंगस जैसे हालात को देख एक पल के लिए शराब पीने की इच्छा का त्याग कर दिया और मीडिया कर्मियों तक इसकी जानकारी पहुंचाई, ताकि सरकार की डिस्टीलरी कम्पनी द्वारा पैक की जा रही शराब की सील बंद शीशी कितनी भरोसेमंद है, इससे अन्य मदिरा के शौकीन परिचित हो सके और शराब खरीदने के बाद शीशी में फंगस या कीड़ा तो नहीं, इसकी पुष्टि वे शराब दुकान की दहलीज पर खड़े रहते कर लें, इसके बाद ही जाम से जाम टकराएं।

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