उमेश पाल हत्याकांड में आरोपी और अतीक का खास…बमबाज गुड्डू मुस्लिम अभी भी पुलिस गिरफ्त से फरार है। 64 दिन से यूपी पुलिस और STF की टीम उसको नागपुर से लेकर छत्तीसगढ़ तक ढूंढ चुकी हैं, लेकिन हाथ खाली हैं। अतीक गैंग का वह ऐसा गुर्गा है, जो पुलिस के लिए चुनौती बना है।

अशरफ ने भी हत्या से पहले अपने मुंह से गुड्डू मुस्लिम का नाम लिया था। अशरफ गुड्डू को लेकर क्या बोलने वाला था? ये सवाल भी लोगों की जुबान पर है। गुड्डू को लेकर एक बात और कही जाती है कि वो धोखा देने में माहिर है।

ये गुड्डू मुस्लिम का 24 फरवरी का फोटो है। जिसमें वो उमेश पाल और उसकी सुरक्षा में लगे सिपाही पर बम फेंकता दिख रहा है।

इसकी जांच पड़ताल के बीच अचानक सुलतानपुर जिले में पड़ने वाला गुड्‌डू मुस्लिम का गांव इटकौली भी सुर्खियों में आ गया। बताया जा रहा है कि 40 साल पहले गुड्डू मुस्लिम के पिता को कुष्ठ रोग हो गया था। इस वजह से परिवार का सामाजिक बहिष्कार हो गया। परिवार का हुक्का-पानी बंद हो गया। इसके बाद परिवार प्रयागराज शिफ्ट हो गया।

गुड्डू का इटकौली गांव सुलतानपुर शहर से 8 किलोमीटर दूर है। गांव के पीछे गोमती नदी है। गांव में सड़कें कच्ची हैं। 

ये रास्ता गुड्डू मुस्लिम के गांव जाता है। शहर मुख्यालय से गांव की दूरी 8 किमी. है। बड़ी संख्या में गांव के युवा खाड़ी देशों में काम कर रहे हैं।

गांव के लोग गुड्डू मुस्लिम को जानते हैं
करीब ढाई हजार की आबादी वाले गांव में मुस्लिम आबादी ज्यादा है। गांव के लोग गुड्डू मुस्लिम को जानते तो हैं, लेकिन उसके बारे में कोई ज्यादा बात करने के लिए तैयार नहीं होता है। हमें कुछ उसके करीबी मिले जिन लोगों ने हमें गुड्डू के बारे में बताया।

हालांकि, ग्रामीणों ने कैमरे के सामने बात नहीं की। कहने लगे, ”कैमरे के सामने बोलेंगे तो पुलिस पकड़ लेगी”। ज्यादातर ग्रामीण गुड्डू मुस्लिम को माफिया के तौर पर जानते हैं। कहते हैं, “गांव के बच्चे बहुत अच्छी-अच्छी जगह नौकरी कर रहे हैं। लेकिन, इसी गांव में पैदा होने वाला गुड्डू मुस्लिम माफिया बन गया। ये हमारे लिए शर्म की बात है।”

4 भाइयों में सबसे बड़ा था गुड्डू मुस्लिम
गुड्डू 4 भाइयों में सबसे बड़ा था। उसके एक भाई की मौत प्रयागराज में हुई है। वहीं एक भाई की मौत सऊदी अरब में हो गई। दोनों भाइयों की मौत बीमारी के कारण ही हुई थी। वहीं उसका एक भाई कहां है? इसकी किसी को जानकारी नहीं है।

  • अब पढ़िए उन करीबियों की बात जिन्होंने हमें गुड्डू के कारनामों के बारे में बताया-

गुड्डू का गांव 40 साल पहले इस गांव से जा चुके हैं। गांव में गुड्डू के बारे में ऑन कैमरा बात करने को कोई तैयार नहीं हुआ।

ग्रामीणों ने बताया कि गुड्डू के पिता शफीक करीब 40 साल पहले इस गांव से जा चुके हैं। उस समय गुड्डू 11 साल का रहा होगा। गुड्डू के पिता को कुष्ठ रोग था। शुरू में तो शरीर के कुछ ही हिस्सों में वो रोग फैला हुआ था, लेकिन धीरे-धीरे वो पूरे शरीर में फैलता चला गया था।

“गुड्डू के घर का छुआ कोई नहीं खाता”
गुड्डू के पिता का एक तरह से सामाजिक बहिष्कार सा हो गया था। घर या गांव में कोई भी फंक्शन हो कोई भी उसको बुलाता नहीं था। यहां तक की परिवार के लोगों को भी कोई नहीं बुलाता था। पंचायती लिहाज से उसका हुक्का पानी बंद कर दिया गया। उनके यहां का छुआ कोई नहीं खाता था। कुष्ठ रोग के कारण एक तरह से गुड्‌डू का परिवार अलग-थलग पड़ गया था। उस दौर में कुष्ठ रोग को छुआछूत की बीमारी माना जाता था।​​​​​​​

“गुड्डू ने उस दुकान वाले को खूब पीटा था”
उस समय गुड्डू कुछ 11 साल का रहा होगा। ये सब देखकर उसको बहुत गुस्सा आता था। कई बार वो गांव के लोगों से इस बात को लेकर अकेले भिड़ जाता था। एक बार वो अपनी अम्मी के साथ बाजार कुछ सामान लेने गया था।

बाजार में दुकानदार ने उसकी अम्मी से बदतमीजी की और दोनों को दुकान से भगा दिया। इस पर काफी मारपीट भी हुई थी। इसी घटना के बाद पूरा गांव उन लोगों के विरोध में आ गया था। इसके बाद ही गुड्डू का पूरा परिवार गांव छोड़कर इलाहाबाद यानी प्रयागराज चला गया था।

इसी गली में जाकर गुड्डू का पैतृक घर पड़ता है। जो लगभग खंडहर हो चुका है।

इसी गली में जाकर गुड्डू का पैतृक घर पड़ता है। जो लगभग खंडहर हो चुका है।

“गुड्डू ने अपने परिवार से नाता तोड़ लिया था”
करीबी बताते हैं कि पैतृक गांव में गुड्डू के चाचा भी रहते हैं। लेकिन उसके परिवार ने सबसे नाता तोड़ लिया था। कुछ लोग ऐसे थे जो गुड्डू के परिवार के करीबी थे। वो लोग अक्सर उन लोगों से मिलने प्रयागराज (तब इलाहाबाद) जाया करते थे। लेकिन गुड्डू अपने गांव में किसी को पसंद नहीं करता था। वो हमेशा अपने परिवार के लोगों से बोलता था, जब गांव वाले हम लोगों का बहिष्कार कर रहे थे। तब नहीं आए तो फिर अभी क्यों आ रहे हैं।

“गांव में कोई मुझसे ऊंची आवाज में बात न करे”
गुड्डू के करीबियों ने बताया, “वह कहता था कि अब जब भी गांव आऊंगा तो ऐसे आऊंगा कि सब सम्मान करें। कोई ऊंची आवाज में बात न कर पाए।” ग्रामीण बताते हैं कि गुड्डू कई बार गांव आया था और रुका भी। उमेश की हत्या के बाद यूपी पुलिस और एसटीएफ भी गांव आई थी। कुछ पूछताछ के बाद वो लौट गई थी। इसी चीज से हमें लगा था कि गुड्डू के कुछ तार अभी भी इस गांव से जुड़े हुए हैं।”

  • अब पढ़िए कैसे हुआ था गुड्डू और माफिया अतीक अहमद का कनेक्शन-

यह 24 फरवरी की फोटो है, जब उमेश पाल की हत्या हुई थी। गुड्डू मुस्लिम बाइक पर बैठा हुआ नजर आया था।

बताया जाता है कि माफिया अतीक की नजर काफी समय से गुड्डू मुस्लिम पर थी। अतीक गैंग में आने से पहले भी वो कई बड़े बाहुबलियों से जुड़ा रहा है। इसमें श्री प्रकाश शुक्ल और धनंजय सिंह जैसे नाम शामिल हैं। एक बार किसी केस को लेकर गुड्डू गोरखपुर जेल में बंद था। तब उसको अतीक ने जेल से बाहर निकलवाया था। इसके बाद से गुड्डू अतीक गैंग से जुड़ा और आज तक जुड़ा रहा।

अब्दुल और गुड्डू में लगी थी अतीक का खास बनने की होड़
2005 में राजू पाल की हत्या में अब्दुल कवि के साथ-साथ गुड्डू मुस्लिम का नाम भी टॉप में था। दोनों ही इस हत्याकांड को लीड कर रहे थे। ऐसा कहा जाता है कि राजू पाल की हत्या ने अब्दुल और गुड्डू को माफिया अतीक का खास बनाया।

हालांकि, इन दोनों में खुद को अतीक का करीबी दिखाने की होड़ हमेशा लगी रहती थी। इन दोनों ने कई सारे अपराध साथ में किए। लेकिन गुड्डू अतीक का ज्यादा करीबी बना। अतीक की पत्नी शाइस्ता भी गुड्डू पर विश्वास करती थी।

ऐसा कहा जाता है कि उमेश की हत्या करने में गुड्डू का नाम भी शाइस्ता ने ही फाइनल किया था। जिस तरह से राजू के ऊपर गुड्डू ने बम बरसाए थे, वैसे ही उमेश पर भी गुड्डू ने बम बरसाए थे। अब्दुल कवि भी इस हत्याकांड में शामिल था।

काफी समय से परिवार गांव नहीं आया है: प्रधान प्रतिनिधि
इस मामले में SO राघवेंद्र रावत ने बताया कि लगभग 40 साल पहले गुड्डू का परिवार यहां से पलायन कर चुका है। वहीं गांव के प्रधान प्रतिनिधि इरशाद हुसैन ने बताया कि काफी समय हो गया है लेकिन उसका परिवार कभी यहां नहीं आया। यहां गांव में उसके चाचा का परिवार रहता है लेकिन उन लोगों ने भी उससे कोई रिश्ता नहीं रखा है। हम लोगों ने तो काफी समय से उन लोगों को नहीं देखा है।

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