मनीष पाठक बलंगी। सइयां भए कोतवाल तो डर काहे का…..? इस कहावत को बलंगी में चरितार्थ होते ऐसे देखा जाता है जहाँ के थानेदार की शह पर वह तमाम अवैध कारोबार संरक्षण में बेख़ौफ़ अवैध कारोबार फल फूल रहा है। हम है यहां के सरकार ऐसा यहां के थानेदार कहते सुने ओर देखे जाते है तो फिर फरियाद कहा और किससे लोग करे और सुने कौंन…?जिले के बलंगी पुलिस चौकी की जहां के थानेदार की कृपा दृष्टि अवैध कारोबारियों के सिर चढ़ कर बोल रहीं है। समूचा चौकी क्षेत्र अवैध कारोबार व अपराधियो का गढ़ बन कर रह गया है। बलंगी चौकी प्रभारी की क्षेत्र के अवैध कारोबारियों से इतनी करीबी है कि देखकदर लगता ही नहीं कि आरोपी कौन है और पुलिस वाला कौन,,,! स्थानीय अवैध कारोबारियों की तो छोड़िए जनाब इनका प्रेम देखकर अब तो अन्य प्रदेशों के अवैध कारोबारी भी बलंगी क्षेत्र को अपना सुरक्षित ठिकाना बनाकर अवैध कारोबारों को बेख़ौफ़ अंजाम दे रहे है। अगर किसी ने इस चौकी प्रभारी की शिकायत करने की जुर्रत की तो प्रभारी महोदय की खुली धमकी से उन्हें दो चार होना पड़ता है और धमकी भी ऐसी की लोग खामौशी का रुख अख्तियार करने में ही भलाई समझते है। लोगो के अनुसार चौकी प्रभारी खुले आम लोगो को कहते फिरते है कि मेरी सरकार है मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ लेगा अगर मेरे खिलाफ शिकायत करने की जुर्रत की तो ऐसे केश में फसाउंगा की जमानत के लाले पड़ जाएंगे। अब भला इतनी दमदार धमकी के आगे किसकी शामत आई है कि वो राजनीति संरक्षण प्राप्त इन प्रभारी महोदय के खिलाफ बोलने की जुर्रत रख सकें। इसके बाद भी क्षेत्र के करीब दर्जन भर सरपंच व उपसरपंच ने इनके खिलाफ स्कूल शिक्षा मंत्री सहित पुलिस विभाग के आला अफसरों से सबूत के तौर पर वीडियो व आडियो उपलब्ध करा शिकायत की मगर अपने आप को सरकार का खास बताने वाले बलंगी चौकी प्रभारी की सेहद पर कोई असर पड़ा हो ऐसा नहीं लगा। इससे तो यह प्रतीत होता है कि नेता मंत्री की तो छोड़िए पुलिस के आला अधिकारियो की भी हैसियत इन पर कार्रवाई करने की नहीं है।

0 चरम पर अवैध कारोबार

सूत्रों के मुताबिक बलंगी चौकी क्षेत्र में चौकी प्रभारी के खुले संरक्षण में मुहमांगी सुविधा शुल्क के साथ अवैध कबाड़, जुआं, यूपी की अंग्रेजी शराब, चोरी का माल खपाने एवं चोरी के आरोपियों को संरक्षण देने, ग्रामीणों के साथ हुई घटनाओं की रिपोर्ट दर्ज नहीं करने, क्षेत्र के लोगो से अवैध उगाही करने सहित अन्य राज्यो से आने वाले अवैध धान की वाहनों से सुविधा शुल्क लेकर छोड़ने आदि के आरोप है यहीं नहीं अगर कोई चौकी में रिपॉर्ट दर्ज कराने पहुंच जाए तो फिर मानो उसकी शामत ही आ गई फरियादी को ही ये साहब चोर साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ते। इस तरह की कारगुजारियों से परेशान क्षेत्र के लोग अब तो पुलिस के नाम से ही डरने लगे है। ऐसा नहीं है कि इतने बड़े पैमाने पर क्षेत्र अवैध कारोबार का गढ़ बन गया और इसकी जानकारी पुलिस विभाग के आला अफसरों को न हो फिर भी इस चौकी प्रभारी पर अफसरों का मौन समझ से परे है?

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