कलेक्टर सूरजपुर के निरीक्षण में मिल चुका है निम्न स्तर का चावल
बिहार से आ रहा 15 सौ रुपये क्विंटल चावल, अफसर खामोश  
राज्य की सीमा पर भी जांच नहीं  


मो.जिसान खान
प्रतापपुर। सरगुजा, बलरामपुर सहित सूरजपुर जिले के कई राइस मिलों में झारखंड और बिहार से चावल पहुंच रहा है, जिसे मिलर कस्टम मिलिंग का चावल बताकर एफसीआई के गोदाम में जमा कर रहे हैं। इसकी जानकारी अफसरों को है, लेकिन कस्टम मिलिंग में तेजी दिखाने के कारण वे भी इसे नजरअंदाज कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ फ्रंटलाइन के पड़ताल में खुलासा हुआ है कि झारखंड बिहार के राइस मिलर 15 रुपये किलो में यहां के राइस मिलरों को चावल दे रहे हैं। मिलर समितियों से उठाए गए चावल की कस्टम मिलिंग दिखावे के लिए कर रहे हैं। बलरामपुर में तत्कालीन कलेक्टर एलेक्स पाल मेनन ने इस गड़बड़ी को रोकने के लिए मिलरों के यहां लगे बिजली मीटर की जांच तक शुरू कराई थी, ताकि बिजली की खपत से पता चल सके कि 24 घंटे में कितने देर मिल चला। अफसरों ने लापरवाही बरती और फिर से वही गड़बड़ी कुछ मिलों में शुरू हो गई है। इसके बाद समितियों से उठाए गए धान को बेच दे रहे हैं। सूत्रों का कहना है कुछ मिल वालों ने बिचौलियों को मिल से सीधे धान बेच दिया, उस धान को बिचौलिए फिर से समिति में लाकर किसानों के नाम पर बेच दिए।
पीडीएस में ऐसे चल रहा चावल का खेल
अंबिकापुर, बलरामपुर व सूरजपुर जिले में जिन लोगों को 10 रुपये किलो में पीडीएस दुकान से चावल मिलता है, वे उसे बाजार में 15 रुपये में बेच रहे हैं। अनाज व्यापारी इसे मिल वालों को बेच रहे हैं। जानकारों का कहना है कि अंबिकापुर में तो एपीएल कार्ड वाले पीडीएस दुकान से कागज में चावल खरीदते हैं और चावल को दुकानदार के पास ही छोड़कर पैसे ले लेते हैं। इसके बाद इस चावल को दुकानदार मिलर को व्यापारियों के माध्यम से बेच रहे हैं ।
स्टॉक पंजी व बिजली खपत की जांच में खुलेगा राज  
सरगुजा संभाग के तीनों जिले के सभी राइस मिलरों के स्टॉक पंजी व बिजली के खपत की सूक्ष्मता से जांच हो तो ऐसे कई मामले सामने आ जाएंगे, लेकिन किसी अधिकारी का इस ओर ध्यान नहीं है। सूत्रों का कहना है राइस मिलरों के साथ जिले के अधिकारी व नेता तक इसमें लिप्त हैं। पूर्ववर्ती सरकार में नान घोटाला इसका बड़ा उदाहरण है।  

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