अंबिकापुर. प्रतापपुर वन परिक्षेत्र के गणेशपुर स्थित बांध के पास मंगलवार की सुबह हथिनी का शव मिला। इसकी सूचना ग्रामीणों ने वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही वन अधिकारी मौके पर पहुंचे। परिस्थिति देखकर उन्होंने बताया कि हाथियों के आपसी संघर्ष में हथिनी की मौत हो गई है। इधर जब डॉक्टरों की टीम ने शव का पीएम किया तो कुछ और ही मामला निकला। हथिनी गर्भवती थी, सप्ताहभर के भीतर ही उसका प्रसव होने वाला था। डॉक्टरों ने बताया हथिनी की मौत प्रसव पीड़ा से तड़प-तड़पकर हुई है। उसके शरीर पर हाथियों से संघर्ष के बाद होने वाले चोट के निशान नहीं मिले हैं। उसके लिवर में 100 से 150 की सं या में सिस्ट देखकर वे भी हैरान रह गए। हथिनी को लिवर की गंभीर बीमारी थी, ऐसे में काफी तड़पने के बाद भी उसका प्रसव नहीं हो पाया।
सूरजपुर जिले के प्रतापपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत गणेशपुर बांध में कुछ ग्रामीण मंगलवार की सुबह मछली देखने गए थे। इसी बीच उनकी नजर वहां हथिनी के शव पर पड़ी। इसकी सूचना उन्होंने तत्काल प्रतापपुर वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही एसडीओ मनोज विश्वकर्मा, रेंजर पीसी मिश्रा अन्य वनकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने पेड़ों की टहनियां टूटी देख व जमीन पर कई गड्ढे देख बताया कि रात में हाथियों के बीच आपसी संघर्ष में उसकी मौत हुई होगी। उन्होंने इसकी सूचना डॉक्टर को दी, डॉक्टरों की टीम ने दोपहर में हथिनी के शव का पीएम किया। पीएम के दौरान पता चला कि हथिनी गर्भवती थी, उसके गर्भ में पूर्ण विकसित बच्चा था। सप्ताहभर के भीतर ही प्रसव होने वाला था। पीएम पश्चात वन विभाग द्वारा जंगल में ही उसके शव को दफन कर दिया गया।
लिवर में पाए गए 150 सिस्ट
शव का पीएम करने वाले डॉ. विजय शरण सिंह ने बताया कि हथिनी को लीवर की गंभीर बीमारी थी, उसके लिवर से करीब 150 सिस्ट निकले हैं। उन्होंने अपनी जिंदगी में इतने सिस्ट किसी भी जानवर में नहीं देखे थे। उसके गर्भ में पूर्ण विकसित भू्रण था। तबियत खराब होने की दशा में प्रसव पीड़ा से तड़पकर ही हथिनी की मौत हुई है।
गर्भवती हथिनी का साथी हाथी रखते हैं विशेष ध्यान
डॉ. विजय शरण सिंह ने बताया कि हाथी अपने दल की गर्भवती हथिनी का विशेष ध्यान रखते हैं। ऐसे में संघर्ष की बात नहीं हो सकती है। ये संभव हो सकता है कि प्रसव पीड़ा से तड़पने के दौरान उसे हाथियों ने कई बार उठाने का प्रयास किया होगा। इस दौरान शरीर पर कुछ चोट लगी होगी। वहीं प्रसव वेदना के बाद भी प्रसव नहीं हो पाने के कारण हथिनी की मौत हो गई।
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