अंबिकापुर। स्थानीय पुलिस ने तीन अलग-अलग मामलों में अपरिचित व्यक्ति द्वारा बच्चों को अन्यत्र ले जाने की कोशिश संबंधी स्वजनों और बच्चों की जुबानी सुनकर शिकायत की जांच की। जांच में ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया, जिससे इन्हें किसी के द्वारा ले जाने की पुष्टि हो सके। शिकायत पर पुलिस ने घटनास्थल का अवलोकन करने के साथ ही बताई गई घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज का परिजनों की उपस्थिति में सूक्ष्म अवलोकन किया, इस दौरान उक्त शिकायतें निराधार साबित हुई। पुलिस अधीक्षक भावना गुप्ता के निर्देशन में इस मामले को संवेदनशील मान पुलिस सूक्ष्मता से जांच में लगी थी। सच्चाई सामने आने के बाद पुलिस ने शनिवार को कोतवाली में सभी शैक्षणिक संस्थाओं के प्रमुखों की बैठक लेकर उन्हें आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। नगर पुलिस अधीक्षक अखिलेश कौशिक ने बैठक में सभी शिक्षण संस्था प्रमुखों को स्कूल परिसर के अंदर एवं बाहर सीसीटीवी लगवाने एवं सीसीटीवी के निर्बाध संचालन के दिशा-निर्देश दिए।
जानकारी के मुताबिक पुलिस को स्वजनों एवं बच्चों के माध्यम से किसी अपरिचित व्यक्ति के द्वारा उन्हें अन्यत्र ले जाने की कोशिश संबंधी शिकायतें मिल रही थी। एक के बाद एक तीन मामले सामने आने पर पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज अजय यादव ने पुलिस अधीक्षक भावना गुप्ता को संवेदनशीलता के साथ वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में टीम गठित कर अपराध के तह तक पहुंचने निर्देशित किया था। पुलिस अधीक्षक ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विवेक शुक्ला, नगर पुलिस अधीक्षक अखिलेश कौशिक के नेतृत्व में विशेष टीम गठित कर तीनों मामलों को त्वरित संज्ञान में लेने और आवश्यक कार्रवाई करते हुए सभी पहलुओं की सूक्ष्मता से जांच करने कहा था। उनके निर्देशन में पुलिस टीम ने घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज का स्वजनों की उपस्थिति में बारीकी से अवलोकन किया। इस दौरान सामने आई वास्तविकता के आगे बच्चों के द्वारा बताई गई पूर्णत: निराधार साबित हुई। सरगुजा पुलिस ने आम नागरिकों से आग्रह किया है कि ऐसे संवेदनशील मामले में किसी पर संदेह होने की स्थिति में तत्काल सरगुजा पुलिस से संपर्क कर बातों को साझा करें।
शिक्षण संस्थाओं के प्रमुखों की पुलिस ली बैठक
सरगुजा पुलिस ने कोतवाली थाने में जिले के सभी स्कूली शिक्षण संस्थाओं के प्रमुखों की बैठक आहूत की। बच्चों के मामले में विशेष सतर्कता बरतने के उद्देश्य से इस बैठक का आयोजन किया गया था। संस्था प्रमुखों के लिए सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश भी जारी किए गए। बैठक में नगर पुलिस अधीक्षक अखिलेश कौशिक के नेतृत्व में कोतवाली के एसएचओ रुपेश नारंग ने बच्चों के मामले में विशेष सतर्कता बरतने कहा। सभी शिक्षण संस्था प्रमुखों को बच्चों के संबंध में किसी संवेदनशील मामले की जानकारी मिलने पर बिना तथ्यों की पुष्टि हुए किसी भी अफवाह को फैलने से रोकने का प्रयास करने के दिशा-निर्देश दिए गए। बताया गया किसी भी संवेदनशील मुद्दे को लेकर अफवाह फैलाना भारतीय दंड विधान के अनुसार दंडनीय अपराध है।
छह से 14 वर्ष के हैं स्कूली बच्चे
सोचनीय पहलू यह है कि बच्चों में ऐसा कौन सा भय है, जो उन्होंने अपरिचित द्वारा ले जाने की कोशिश की सटीक कहानी रच डाली। बस इस ओर ध्यान नहीं गया कि शहर में जगह-जगह लगे सीसीटीवी से सच्चाई सामने आ सकती है। हुआ भी कुछ ऐसा ही, एक के बाद एक तीन ऐसे मामले ने पुलिस के कान खड़े किए और बड़ी घटना हो, इसके पहले तफ्तीश में जुटी तो इनके द्वारा बताए गए घटनास्थल और वहां की परिस्थिति सीसीटीवी कैमरे में भिन्नता लिए नजर आई। ऐसे में इसे मोबाइल की लत और इंटरनेट मीडिया का प्रभाव माना जाए तो गलत नहीं होगा। पुलिस भी कुछ ऐसा ही मानकर चल रही है।
दोपहिया लेकर स्कूल न आएं बच्चे
नाबालिगों द्वारा स्कूल में दो पहिया वाहन लेकर आने की शिकायतों पर सभी शिक्षण संस्था प्रमुखों को स्कूली छात्र-छात्राओं को स्कूल बस या स्वजनों के द्वारा स्कूल छोडऩे की व्यवस्था करने संस्था प्रमुखों से चर्चा की गई। बच्चों के संवेदनशील मामलों में संस्था प्रमुखों को स्कूल परिसर के अंदर या बाहर किसी अपरिचित पर संदेह होता है तो तत्काल सरगुजा पुलिस की अपात्कालीन सुविधा डॉयल 112 या कंट्रोल रूम से संपर्क कर मामले को साझा करने कहा गया।

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