बलरामपुर। छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के जिलाध्यक्ष बसंत कुजूर ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान कहा कि राज्य में अनुसूचित जनजातियों का आरक्षण हटाने के लिए पूर्ववर्ती एवं वर्तमान राज्य सरकार जिम्मेदार हैं। पूर्ववर्ती सरकार की कमजोरी को वर्तमान राज्य सरकार भी दूर करने में नाकाम रही, जिसका नतीजा उच्च न्यायालय का फैसला सामने है। दोनों ही सरकारें आदिवासियों के आरक्षण मुद्दे को लेकर लापरवाह रहीं। उन्होंने दो जनप्रतिनिधियों व एक अधिकारी को हटाने की मांग की है।
बसंत कुजूर ने कहा कि राज्य सरकार आदिवासी समाज का हितैषी बनने का ढोंग करती आ रही है, दूसरी ओर इस फैसले के पश्चात सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव कमलप्रीत सिंह द्वारा तुरंत ही सभी विभागों को आदेश को अमल में लाने का निर्देश जारी किया गया है। एक तरफ प्रदेश के मुख्यमंत्री इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बड़े-बड़े वकीलों को लगाने की बात कर रहे हैं, यही सरकार हाईकोर्ट में अनुसूचित जनजाति समुदाय की क्वांटिफिएबल डाटा पेस करने में नाकाम रही। है। ऐसे में राज्य सरकार की नीयत में छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के प्रति खोट सामने आ रहा है। उन्होंने कहा राज्य सरकार की ओर से जो वकील पैरवी कर रहे थे उनके द्वारा इस मामले को गंभीरता पूर्वक एवं विधिवत हाईकोर्ट की बेंच के सामने पेश नहीं किया गया। बसंत कुजूर ने कहा कि आदिम जाति कल्याण विभाग के मंत्री डॉ.प्रेमसाय सिंह टेकाम द्वारा क्वांटिफिएबल डाटा पूरे राज्य से एकत्रित कर हाईकोर्ट में जिरह के दौरान ईमानदारी पूर्वक पेश नहीं किया गया, इसका खामियाजा प्रदेश के आदिवासी समाज के युवाओं को भुगतना पड़ेगा। कांकेर विधायक शिशुपाल को निशाने में लेते हुए उन्होंने कहा एक तरफ वे छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के लोगों को मुख्यमंत्री निवास, कार्यालय में साथ ले जाकर सामाजिक मुद्दों को वास्तविकता से हटकर बताते हैं, पूरे प्रदेश के आदिवासी समाज के मुद्दों पर उनकी राय अलग होती है। उन्होंने समाज की तरफ से मुख्यमंत्री से सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव कमलप्रीत सिंह को तत्काल प्रभाव से हटाने तथा सरकार के आदिम जनजाति कल्याण मंत्री डॉ.प्रेमसाय सिंह टेकाम तथा कांकेर विधायक एवं संसदीय सचिव शिशुपाल सोरी को पद से विमुक्त, शिथिल करने की मांग की है।
प्रमुख सचिव पर लगाए ये आरोप
बसंत कुजूर ने बताया कि राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव कमलप्रीत सिंह की भूमिका जनजाति समुदाय के लिए हमेशा ही नकारात्मक रही है। इस अधिकारी ने पहले भी क्वांटिफिएबल डाटा एकत्रित करने के दौरान जिम्मेदारी पूर्वक कर्तव्य का निर्वहन नहीं किया। वे वर्तमान में सामान्य प्रशासन विभाग में पदस्थ हैं। उनके द्वारा जनजाति समुदाय के हितों के विरुद्ध हाईकोर्ट के फैसले को तुरंत अमल में लाने के लिए सभी विभागों को निर्देश जारी किया गया है। छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज जिला बलरामपुर की ओर से उन्होंने सवाल किया है कि हाईकोर्ट के निर्णय को अमल में लाने के लिए क्या राज्य सरकार ने सामान्य प्रशासन विभाग को निर्देश दिया है। यदि ऐसा नहीं है तो क्या कमलप्रीत सिंह सरकार चला रहे हैं या मुख्यमंत्री झूठ बोल रहे हैं।

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