अंबिकापुर। भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा सरगुजा ने कलेक्टर के माध्यम से राज्यपाल छत्तीसगढ़ शासन को ज्ञापन सौंपकर जनजाति वर्ग को मिलने वाले आरक्षण से संबंधित संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए वर्तमान सरकार को निर्देशित करने का आग्रह किया गया है। भाजपा जिला अध्यक्ष ललन प्रताप सिंह, पूर्व सांसद कमलभान सिंह, नेता प्रतिपक्ष प्रबोध मिंज, जिला महामंत्री देव नाथ सिंह पैकरा, जनजाति मोर्चा जिला अध्यक्ष धनराम नागेश, अनुज एक्का, निशीकांत भगत, कमलेश्वर टोप्पो, प्रेमानंद तिग्गा, अरुणा सिंह, सुरेश पोर्ते, दिलेश्वर पैकरा, सर्वेश तिवारी, रामदयाल चौहान एवं नरेंद्र पैकरा की उपस्थिति में जनजाति मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष राम लखन सिंह पैकरा ने बताया कि छत्तीसगढ़ के कांग्रेस सरकार की लापरवाही से उच्च न्यायालय ने लोकसेवा आरक्षण संशोधन अधिनियम 2012 को अपास्त घोषित कर दिया है, जबकि रमन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार द्वारा जनजाति समाज को प्रदेश में उनकी जनसंख्या के अनुपात में 32 प्रतिशत आरक्षण देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था और वर्ष 2018 में सरकार रहते तक यह बरकरार रहा। उच्च न्यायालय में याचिका दायर होने के बाद भाजपा सरकार द्वारा जनजाति समाज के हित में मजबूती के साथ खड़े होकर उच्च न्यायालय में पक्ष रखा जाता रहा, जिसके कारण आरक्षण यथावत रहा, परंतु कांग्रेस की सरकार आने के बाद से जनजाति समाज के साथ षड्यंत्र होना शुरू हो गया। उच्च न्यायालय में जनजाति वर्ग का पक्ष ठीक से नहीं रखा गया, परिणाम स्वरूप हाईकोर्ट में जनजाति समाज के खिलाफ दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय सामने आया है। कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए आगे उन्होंने कहा कि इसके पूर्व भी कांग्रेस सरकार ने अनुसूचित जाति वर्ग को छलने का काम किया है। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद पदोन्नति में आरक्षण का नया नियम बनाने के लिए तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने तीन साल लगाए। उच्च न्यायालय में पदोन्नति नियम 2003 को भाजपा सरकार अपने पूरे 15 साल के कार्यकाल तक कानूनी चुनौती से बचा कर रखा, परंतु कांग्रेस की सरकार आते ही मूल कंडिका 5 फरवरी 2019 को पास हो गई, तब से लेकर अब तक पदोन्नति में आरक्षण का कोई रास्ता भूपेश बघेल की सरकार ने नहीं निकाला है, और वर्तमान में आरक्षण का लाभ भी जनजाति वर्ग को नहीं मिल रहा है। आगे उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार अनुसूचित जनजाति वर्ग के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने में नाकाम रही है। संवैधानिक अधिकारों के परिपालन में जब-जब मामला कानूनी हुआ तब-तब भूपेश बघेल की सरकार जनजाति वर्ग की उपेक्षा करते हुए उच्च न्यायालय में असफल साबित हुई है। उन्होंने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि जनजाति वर्ग के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करते हुए मिलने वाले आरक्षण पर विपरीत प्रभाव ना पड़े, इसे लेकर प्रदेश के आदिवासी विरोधी सरकार को निर्देशित करें।

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