शासन के आदेश व नियमों को ताक पर रखने का छग प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने लगाया आरोप


अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के संभागीय अध्यक्ष ने स्वास्थ्य विभाग में विभिन्न पदों पर सीधी भर्ती हेतु 20 जुलाई 2022 को जारी विज्ञापन निरस्त करने व शासनादेश का पालन करते हुए पुन: विज्ञापन जारी करने मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता के नाम पत्र सौंपा है। पत्र में विज्ञापित पदों को लेकर विसंगतियों की ओर ध्यानाकर्षण कराया गया है। कहा गया है कि राजमाता श्रीमती देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, अंबिकापुर में स्वीकृत तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर सीधी भर्ती हेतु विज्ञापन जारी कर आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इसमें शासन के नियम, आदेश को ताक में रखा गया है। बता दें कि तृतीय व चतुर्थ वर्ग के लिए कुल 422 पदों पर नियुक्ति की जानी है।
कर्मचारी संघ के संभागीय अध्यक्ष अनिल कुमार पांडेय ने मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता के नाम प्रेषित पत्र में कहा है कि तृतीय श्रेणी के पदों पर भर्ती हेतु विज्ञापन में निर्धारित नियम एवं शर्त के अनुसार चयन हेतु लिखित परीक्षा से 45 अंक एवं कौशल परीक्षा से 45 अंक लिए जाने का उल्लेख किया है जबकि निर्धारित शैक्षणिक अहर्ता से चयन हेतु किसी प्रकार का अंक निर्धारित नहीं किए जाने से चयन में अनियमितता की संभावना है। अत: शैक्षणिक अहतों का अंक सम्मिलित किए जाने का आग्रह किया गया है। इसी क्रम में चतुर्थ श्रेणी के पदों पर चयन हेतु विज्ञापित नियम एवं शर्तों में लिखित, प्रतियोगी, कौशल व दक्षता परीक्षा आयोजित किए जाने का उल्लेख किया गया है, जबकि चतुर्थ श्रेणी के पदों पर छत्तीसगढ़ राजपत्र 05 अक्टूबर 2019 सेवा भर्ती नियम में मेरिट के आधार पर चयन किए जाने का उल्लेख है, किसी प्रकार की प्रतियोगी या लिखित परीक्षा की नहीं। ऐसे में चतुर्थ वर्ग के पदों पर चयन हेतु सेवा भर्ती नियम 05 अक्टूबर 2019 को अनदेखा किया जाना समझ से परे है। इसमें संसोधन की ओर अधिष्ठाता का ध्यानाकर्षण कराया गया है। लैब अटेंडेंट के पद पर भर्ती हेतु जारी विज्ञापन में अनिवार्य शैक्षणिक अहर्ता किसी मान्यता प्राप्त मंडल से आठवीं उत्तीर्ण मांगा गया है, जबकि सेवा भर्ती नियम, राजपत्र 05 अक्टूबर 2019 के अनुसार अनिवार्य शैक्षणिक अहर्ता जीव विज्ञान, भौतिक शास्त्र एवं रसायन शास्त्र सहित 10+2 परीक्षा उत्तीर्ण होना निर्धारित है। लैब अटेंडेंट हेतु अनिवार्य शैक्षणिक अहर्ता बदलकर विज्ञापन जारी करना सेवा भर्ती नियम 2019 के विपरित है। तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती हेतु विभाग में कार्यरत संविदा, दैनिक वेतनभोगी, जीवनदीप समिति के कर्मचारियों को अनुभव का लाभ प्रदान किए जाने का उल्लेख नहीं किया गया है, जबकि छ.ग. शासन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के पत्र क्रमांक एफ 1-67/ 2021/सत्रह/ एक दिनांक 21 मार्च 2022 के अनुसार अनुभव हेतु अधिकतम 15 अंक निर्धारित किया गया है। बता दें कि बस्तर सहित अन्य जगह होने वाली भर्ती में अनुभव का लाभ अभ्यर्थियों को दिया जा रहा है। इसी प्रकार शासकीय सेवा में भूतपूर्व सैनिकों हेतु आरक्षण का निर्देश दिया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशानुसार तृतीय वर्ग में 10 प्रतिशत एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों में वर्गवार रिक्तियों का 20 प्रतिशत पद आरक्षण का प्रावधान है। यहां जारी विज्ञापन में चतुर्थ श्रेणी के पदों पर सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों का अवहेलना करते हुए भूतपूर्व सैनिकों हेतु मात्र 10 प्रतिशत पद आरक्षित किया गया है। अनुसूचित जनजातियों के लिये आरक्षित पदों में विशेष पिछड़ी अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार हेतु 20 प्रतिशत पद आरक्षित करने हेतु निर्देशित किया गया है, जबकि मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर के अधिष्ठाता कार्यालय द्वारा जारी विज्ञापन में विशेष पिछड़ी अनुसूचित जनजाति (पहाड़ी कोरवा, पण्डो, बैगा, कमार, बिरहोर, अबुझमाडिया, भुंजिया) को किसी भी प्रकार का आरक्षण नहीं दिया गया है।
छ.ग. शासन सामान्य प्रशासन विभाग के पत्र क्रमांक एफ 3-2 /2015/1-3, रायपुर दिनांक 30.01.2019 के द्वारा सीधी भर्ती के पदों में छत्तीसगढ़ के स्थानीय निवासियों को अधिकतम आयु सीमा 35 वर्ष में 05 वर्ष की छूट 31/12/2023 तक प्रदान की गई है, जिसका उल्लेख विज्ञापन में स्पष्ट नहीं होने कारण कई उम्मीदवार आवेदन करने से वंचित हो जाएंंगे। उल्लेखित त्रुटियों एवं शासन के आदेशों, निर्देशों का अव्हेलना करते हुए जारी विज्ञापन में सुधार करने की मांग की गई है, ताकि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी हो, बाद में किसी प्रकार के विवाद या आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति न बने।
प्रायोजित और व्यक्तिगत लाभ देने वाला विज्ञापन
संघ के संभागीय अध्यक्ष अनिल कुमार पांडेय ने कहा है कि उक्त विज्ञापन प्रायोजित एवं लोगों को व्यक्तिगत लाभ देने के उद्देश्य से जारी करना प्रतीत होता है। उन्होंने अधिष्ठाता कार्यालय द्वारा जारी त्रुटिपूर्ण विज्ञापन को लेकर आगाह कराया है कि अभ्यर्थी इसे लेकर न्यायालय की शरण में जा सकते हैं, जिससे भर्ती प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब की स्थिति बनेगी। ऐसे में अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज का कार्य प्रभावित होगा। इसे देखते हुए विज्ञापन को संसोधित/निरस्त करते हुए जारी करने का सुझाव दिया गया है। सात दिवस के अंदर विज्ञापन संशोधित/निरस्त कर जारी न होने एवं संविदा, दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को शासन के निर्देशानुसार अनुभव का लाभ प्रदान नहीं किए जाने की स्थिति में आंदोलन व न्यायालय के शरण में जाने की चेतावनी दी गई है।