राजेन्द्र ठाकुर( राजू )बलरामपुर –बलरामपुर जिले के सेमरसोत अभ्यारण क्षेत्र में दो-तीन दिनों से लगातार भीषण आग तेजी से फैल रही है और वही अभ्यारण क्षेत्र के जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी सुध लेने तक नहीं पहुंच रहे हैं और आग तेजी से फैल रही है वही बलरामपुर के स्थानीय लोग वन विभाग के अधिकारियों को लगातार अवगत कराते हैं लेकिन अधिकारी कर्मचारी सुध लेने तक नहीं पहुंचते स्थानीय निवासी लोग अब सेमरसोत अभ्यारण में लगे आग का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में जमकर वायरल भी कर रहे हैं और जिम्मेदार कौन है इसका भी जवाब मांग रहे हैं

अभ्यारण के भीतर के जीवो के ऊपर आ सकती है बड़ी संकट

सेमरसोत अभ्यारण के भीतर हिरण कोटरी भालू बारहसिंघा एवं अनेक प्रकार की कई जीव जंतु निवास करते हैं और जिस तरह से लगातार आग फैल रही है उसको देख अंदाजा लगाया जा सकता है कि जंगली जीवो के ऊपर भी बड़ा खतरा मंडरा रहा है अभ्यारण एक संरक्षित वन क्षेत्र होता है जिसे सुरक्षित रखने व उसे कोई भी नुकसान ना हो इसके लिए शासन के द्वारा अलग से व्यवस्था बनाई गई है लेकिन लगातार सेमरसोत अभ्यारण आग से धधकती नजर आ रही है

सोशल मीडिया में पूछ रहे हैं जवाब

बलरामपुर के स्थानीय निवासी लोग सोशल मीडिया के माध्यम से अभ्यारण क्षेत्र के अधिकारी कर्मचारी से जिम्मेदार कौन है इसका जवाब पूछ रहे हैं सोशल मीडिया पर जमकर वीडियो के साथ कई सवाल पूछे जा रहे हैं जैसे विभाग के जवान जिन्हें सिर्फ वह लोग ही आरोपी दिखते हैं जो सिलेंडर गैस से डरकर या फिर ज्यादा भुगतान होने के कारण लकड़ियों का गट्ठर चूल्हे पर खाना बनाने वास्ते लेकर जाते हैं और उन्हें पकड़ कर दंडित किया जाता है या फिर वह अधिकारी जिनके सुस्त और लचर रवैया के कारण आम जनता और जनप्रतिनिधियों को आक्रोश रैली निकालने की जरूरत पड़ती है
जैसे कटु शब्द लगातार सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो रही है

राज्यसभा सांसद प्रतिनिधि

राज्यसभा सांसद धीरज सिंह देव चारों ओर से वनों से घिरे बलरामपुर रामानुजगंज जिले के वनों में हो रही आगजनी की घटनाओं को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि वनों में आगजनी रोकने की जिम्मेदारियां वन कर्मियों की है तो कुछ जिम्मेदारियां आम नागरिकों की भी है लेकिन फिर भी आमजन वनों में तेजी से फैलते आग को नजर अंदाज कर जाते हैं तथा वन अमला भी फायर सीजन में ही अपनी मांगों को मनवाने अनिश्चितकालीन आंदोलन पर चले जाते हैं जिसका परिणाम यह होता है कि वन धीरे-धीरे धू धू कर
कर जलने लगते हैं जिससे वन प्राणियों के समक्ष संकट के काले बादल छा जाते हैं उन्होंने कहा कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब हमारी आने वाली पीढ़ी वन और वन्य प्राणियों के बारे में केवल कहानियों और किताबों में ही सिमट कर रह जाएंगे

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