रामानुजगंज(विकाश कुमार केशरी)- सूर्योपासना का महापर्व छठ में भीख मांग कर के व्रत करने का विशेष महत्व रहता है जिस कारण हजारों लोगों के द्वारा भिक्षा मांग कर छठ व्रत किया गया व्रतियों के मदद के लिए भी हर एक छोटे बड़े दुकानदार सहित पूरे नगर वासियों के हाथ उठे। नगरवासियों के द्वारा भिक्षा मांगकर छठ करने वालों की अपने सामर्थ्य के अनुसार भरपूर मदद की गई।

                         आस्था व सूर्योपासना का महापर्व छठ की अपनी महिमा है कहा जाता है कि छठी माई की कृपा से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। असाध्य रोगों का नाश होता है परिवार में सुख शांति समृद्धि आती है महिमा जितनी महान व्रत उतना ही कठिन। पवित्रता त्याग व हठयोग की भांति तपस्या लेकिन मनोवांछित फल देने में भगवान दीनानाथ भी निराश नहीं करते हैं छठ मैया से मन्नत मांगी जाती है तथा मन्नत पूर्ण होने पर मैया की मन्नत मांगने के वक्त दिए गए वादे के अनुरूप छठ पूजा की जाती है। जिस कारण भगवान भास्कर  इस महापर्व में आस्था के कई रूप देखने को मिलते हैं इसी में भीख मांगकर भी छठ पूजा की परंपरा है।

भीख मांगने का अध्यात्मिक व मनोवैज्ञानिक है आधार……… भीख मांग कर छठ करने की परंपरा का आध्यात्मिक व मनोवैज्ञानिक आधार है ऐसी परंपरा से व्यक्ति का अहम दूर हो जाता है मन निर्मल निश्चल हो जाता है वह समरस समाज का निर्माण होता है। भगवान से मांगने से पहले लोग भीख मांग कर मन को उस अनुरूप ढालते हैं लेकिन यह दिखावे के तौर पर नहीं बल्कि मन से हो तो इंसान मन से दिन हो जाता है और लगता है कि कोई उसका सहारा नहीं है तो भगवान स्वयं उस का सहारा बन जाते हैं।

महिलाएं खुद भीख मांगते हैं अपनी संतान से भीख मंगवाती है…….. छठ मैया की कृपा से परिवार की सलामती के लिए महिलाएं खुद या फिर अपने संतान से भीख मंगवाती हैं तथा भीख में मिले अन्न पैसे को छठी मैया की श्रद्धा भाव से आराधना करती हैं। यही वजह है कि नहाय खाए के दिन से बड़ी संख्या में लोग अपने गांव पड़ोस में भीख मांगने निकलते हैं कि अमीर क्या गरीब सब मिलकर फिर उपासना की इस महापर्व में हाथ बटाते है।

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