0 संक्रमितों की संख्या में हो रहा इजाफा

सूरजपुर। कोरोना संक्रमण की जिले में बढ़ती बेतहाशा रफ्तार रोज सामने आ रहे मौत के डरा देने वाले आंकड़े अब बेहद चिंताजनक हो गए है और दिन व दिन बेकाबू होते जा रहे है। परंतु अपनी कारगुजारियों से सुर्खियों में रहने वाले यहां के कोविड अस्पताल की व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है। इन सब के बीच कोविड अस्पताल में उपचार के नाम पर लापरवाही की शिकायते भी अब खुलकर सामने आने लगी है। कोविड अस्पताल में दाखिल मरीज और उनके परिजन अस्पताल की अव्यवस्था एवं उपचार के नाम पर संक्रमितों की जान से किये जा रहे खिलवाड़ के खिलाफ खुलकर बोलने लगे है। इन सब के बीच आंखों में पट्टी बांधे धृतराष्ट्र की भूमिका अदा कर रहे अस्पताल प्रबंधन के सेहद पर कोई असर नहीं पड़ रहा है और न ही व्यवस्था के नाम पर अपने मुंह मिया मिट्ठू बनने वाले जिला प्रशासन पर कोई प्रभाव दिखता नजर आ रहा है। आलम यह है कि यहां समुचित उपचार व स्वस्थ होने की उम्मीद लिए आने वाले संक्रमित जान गंवा कर जा रहे है और मौत का सिलसिला कम होने का नाम नहीं ले रहा है। जवाबदार अपनी जिम्मेदारी से भागते नजर आ रहे है। लोगो को अच्छी स्वास्थ्य सुविधा मिले इस उद्देश्य से की गई स्थानीय चिकित्सको की नियुक्तियां अस्पताल प्रबंधन के गले की फांस बन गई है। गुरुवार को यहां अब तक के सबसे ज्यादा 10 लोगो की मौत हुई है। कोरोना की दूसरी लहर के असर से जिले में 5376 लोग संक्रमित है तो लाक डाउन के 30 दिनों में मौत के जो सरकारी आंकड़े है। उसके मुताबिक 113 लोगों ने अपनी जान गंवाई है। जबकि अधिकांशतः लोग स्वयं के उपचार से घर पर ही स्वस्थ हुए है। किन्तु बेवश व लाचार गरीब लोग के लिए जिनके पास उपचार के लिए पैसे नहीं है, उन्हें सरकारी व्यवस्थाओं का मुंह देखना पड़ रहा है। ऐसे लोग सिर्फ और सिर्फ शासन द्वारा दी जानी वाली व्यवस्थाओं के ही भरोसे हैं।
12 मई को 5 बजे ग्राम करौटी के 70 वर्षीय कोरोना संक्रमित होने पर उसे भैयाथान से जबरदस्ती कोविड अस्पताल भेजा गया। जबकि परिजन इसके लिये विरोध भी किये। यहां उपचार के दौरान मात्र इंजेक्शन लगाया गया और रात में स्थिति गंभीर होने पर उनके साथ मे रही उनकी बहु ने डाक्टरों से मदद करने करने के लिये दौड लगाई। लेकिन धरती के भगवान कहे जाने वाले चिकित्सक कोविड अस्पताल में उपलब्ध नही थे जिसके कारण समुचित उपचार नहीं मिल सका और इलाज के अभाव में आखिरकार उनकी मौत हो गई।परिजनों ने बताया कि उनका बीपी लो था, उनका मानना था कि अगर अस्पताल नही लाये रहते तो आज वे जीवित रहते। इसी तरह मानपुर निवासी फिरोज ने बताया वे चार मई को अपने पिता को भर्ती किये थे डाक्टर तो जाते नही थे ठीक तो अपने से हो गये। कल रात को वे गंभीर हो गये और चक्कर आने लगा था।वह घर से अस्पताल जाकर डाक्टर आवास पर गये तो वहा मैडम ने डायजिंन का सिरप बस दे दिया, जबकि उसने मरीज की पूरे हालात उनको बता दिया था. डाक्टर तक देखने नही गये जिससे उनके पिता की मौत हो गई। एक एक दिन में हो रही कि मौतों से शव वाहन भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। लगातार हो रही मौत से आक्रोशित परिजन खुलकर सामने आकर अस्पताल की अवस्थाओ की पोल खोल रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर जिले के लोग अपनो को खोते हुए जिले के मंत्रियो, नेताओ, प्रशासन को जमकर कोस रहे है। कई युवा और बुजुर्ग संक्रमित होकर मौत के गाल में समा चुके है। कोरोना संक्रमितो की बढते रफ्तार से जिले की स्वास्थ व्यवस्थाएं भी ध्वस्त होती दिखाई पड़ रही है. तो वही स्वास्थ विभाग में चल रहे गुटबाजी का असर स्वास्थ सेवाओ के साथ व्यव्स्थाओ पर भारी पड रहा है। जिससे स्वास्थ व्यव्स्था बेलगाम हो गई है। कोविडि अस्पताल में उपचार करा रहे मरीजो अनुसार यहा का यह हाल है कि डाक्टर तक अस्पताल मे नही आते है नर्से जरुर आती है। बहरहाल कोरोना सक्रमित मरीज भगवान भरोसे अपनी सांसों की डोर थामे हुए है।

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