जिले में बेकाबू हुआ कोरोना संक्रमण, अप्रेल में अब तक गई 31 जाने


चंचलेश श्रीवास्तव – सूरजपुर। प्रशासन के लाख दावों के बावजूद जिले के कोविड अस्पताल का हाल बेहाल है। यहां अव्यवस्थाएं इस कदर हावी है कि सुधरने का नाम नहीं ले रही है। जिस कोविड अस्पताल में कोरोना संक्रमित अपनी जिंदगी की जंग लड़ते हुए स्वस्थ होने की उम्मीद के साथ दाखिल हुए है वह अस्पताल खुद बीमार दिखाई दे रहा है। अव्यवस्था का आलम यह है कि समुचित उपचार के आभाव में मरीज भगवान भरोसे अपनी जीवन के सांसों की डोर थामे हुए है। जिम्मेदार जिला प्रशासन जहां इन अव्यवस्थाओं को लेकर धृतराष्ट्र की मुद्रा में है। वहीं अस्पताल प्रबंधन है कि सुधरने का नाम नहीं ले रहा है। इन सब के बीच अपने आप को जनता का मसीहा कहने वाले राजनैतिक दल भी अव्यवस्थाओं के खिलाफ आवाज उठाने की बजाय कुम्हकर्णीय नींद में सोए हुए है। जिले में कोरोना की दूसरी लहर इस कदर बेकाबू है कि प्रतिदिन न केवल संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है बल्कि मौत के आंकड़े भी लोगो को डरा रहे है। 13 अप्रैल को लगाये गये लाक डाउन मे ही अब तक 25 लोगो की मौते हो चुकी है तो वही 2759 कोरोना संक्रमित मरीज पाये गये है। अप्रैल माह मे अब तक 4360 कोरोना संक्रमित पाये जाने के साथ 31 मौत हो चुकी है। जिले की स्वास्थ व्यवस्थाएं भी लगभग ध्वस्त होती दिखाई पड़ रही है। हाल फिलहाल में यहां अस्पताल में आक्सीजन प्लांट के पाईप फटने से करीब 7 घंटो तक प्लांट से कोविड अस्पताल तक आक्सीजन का सप्लाई बंद रहा। हालाकि तत्काल जिला अस्पताल में उपलब्ध आक्सीजन से बैकप दिया गया जिससे किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति नही बनी।  स्वास्थ विभाग की लचर व्यव्स्थाओ से तंग आकर जिला प्रशासन ने प्रतिदिन प्लांट की निगरानी के लिये अनुविभागिय अधिकारी की नियुक्ति किया है। बहरहाल स्वास्थ विभाग में चल रहे गुटबाजी का असर स्वास्थ सेवाओ के साथ व्यव्स्थाओ पर भारी पड़ रहा है। जिससे यहां की  स्वास्थ व्यवस्था न केवल  बेलगाम हो गई है बल्कि यहां आने वाले मरीज भगवान भरोसे है।
 0स्वास्थ सेवाओ पर गुटबाजी भारी
यहां जिला अस्पताल के साथ कोविड अस्पताल में इंमरजेसी संसाधन की उपलब्धता  के बावजुद संचालित नही होना ऐसी कई बाते सामने आती जाती रहती है जो अस्पताल में चल रही गुटबाजी की ऒर संकेत देती है। पूर्व कलेक्टर दीपक सोनी ने कोविड अस्पताल की आवश्यक व्यवस्थाओं को संचालित करने के लिये सीनियर  डाक्टर को जिम्मेदारी दिया था। मगर उनके बाद जिले की कमान संभाले कलेक्टर ने कभी जिले की स्वास्थ्य सुविधाओं को गंभीरता से लिया ही नहीं। जिससे स्वास्थ सुविधाएं बगैर कट्रोल के लडखडाती नजर आ  रही है। आलम यह है कि कोविड टेस्टिंग वाली जगह पर टेस्ट कराने आने वाले लोगो को धुप से बचाने के लिये छांव तक कि व्ययवस्था विभाग के द्वारा अभी हाल फिलहाल में कराया जा सका है।
0 यह है अव्यव्स्थाओ का आलम
कोरोना संक्रमित मरीजो उपचार में किस कदर लापरवाही बरती जा रही है। यह कोरोना के मरीज खुद सामने आकर बता रहे है। एक बेड पर दो मरीज है तो वही कई मरीज चटाई में लेट कर उपचार कराने को विवश है। मरीजो की माने तो गभीर स्थिति  होने पर डाक्टर फोन तक नही उठाते। एक मरीज की हालत यह है कि दो दो टेस्ट होने के बाद भी उसमें कोरोना संक्रमण  नही पाया गया फिर भी उसे कोविड में भर्ती कर उपचार किया गया। जिससे मरीज की हालत गंभीर होने पर परिजनो द्वारा अंबिकापुर मिशन अस्पताल दाखिल कराया गया. तो वही महिला बाल विकास से फिड बैकअप जानने के लिये फोन किये जाने पर परिजन कोविड अस्पताल की उपचार पर सवाल खडे करते हुये जमकर लताड लगा रहे है।
0  कंट्रोल से बाहर कोविड अस्पताल
कोविड 19 महामारी को देखते हुए तत्कालीन  कलेक्टर द्वारा तीन मंजिला शिशु महिला स्वास्थ अस्पताल के नव निर्मित भवन को कोविड ट्रीटमेंट सेंटर बनाया गया। इस अस्पताल में सुविधाओ की बात करे तो 10 आईसीयू, 15 एचडीयू, 100 बेड है। इसके अतिरिक्त सेट्रल आक्सीजन, जनरल बेड, इंटरनेट, सीसीटिवी सहित अन्य सुविधाये उपलब्ध है। वहीं अस्पताल की गतिविधियो पर नजर बनाने के लिये कंट्रोल रुम बनाये गये थे बहरहाल अस्पताल का कंट्रोल ही गायब है।
0 पेयजल के लिए हलकान मरीज
कोविड अस्पताल में दाखिल मरीजो को पेयजल तक सही तरीके से उपलब्ध नही मिल पा रहा है। पेयजल के लिये ग्रांउड फ्लोर मे लगाये गये वाटर मशीन से पानी नही निकलता है। जिससे मरीजो के परिजन बाहर से पेयजल भेजते है।अव्यव्स्था का आलम यह है कि ना तो बेड सीट बदला जाता है ना ही सेनेटाईज किये जाते है यहां तक की हाथ धोने के लिये भी साबुन तक उपलब्ध नही है।
0 अदृष्य हुये विधायक
कोरोना काल में लोग तरह तरह के समस्याओ जुझ रहे है तो आये दिन बेहतर स्वास्थ व्यव्स्था नही मिलने से लोग काल के गाल में समा रहे है ऐसे में मतदाता अपने विधायक को खोज रहे है जो एक अरसे से अदृष्य है। हालाकि कुछ दिनो पूर्व प्रेमनगर विधायक खेलसाय सिह ने कलेक्टर को पत्र लिखकर 20 लाख रुपये की राशि कोरोना महामारी के लिये अस्पताल को आवश्यक संसाधन के लिये स्वीकृती देकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली है। वही व्यवस्थाओं को लेकर जिम्मेदार कुछ बोलने की स्थिति में नहीं है। फिलहाल इस संकट की घड़ी में भी जिले की  स्वास्थ्य सुविधाओ का भगवान ही मालिक है।

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