मनेन्द्रगढ । पिछले दो दशकों से लगभग 10हजार से भी अधिक लोगों को पेड़ पौधों की सुरक्षा एवं पर्यावरण संचेतना से स्कूल छात्रों को जोड़ने वाले वरिष्ठ पर्यावरणविद एवं नेशनल ग्रीन कोर के जिला समन्वयक सतीश उपाध्याय ने-” विश्व पृथ्वी दिवस “-पर वैश्विक स्तर पर पृथ्वी के बढ़ते तापमान एवं जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर विचार व्यक्त किया है ।विश्व पृथ्वी दिवस पर पर्यावरण संरक्षण मंडल छत्तीसगढ़, के वर्चुअल कार्यक्रम मे श्री उपाध्याय ने क्लाइमेट चेंज से होने वाले खतरों को आगाह किया एवं यह बताया कि जलवायु परिवर्तन के चलते भूकंप भूस्खलन, बाढ , प्राकृतिक आपदा अतिवृष्टि और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी जैसी जानलेवा आपदाओं से पूरी दुनिया जूझ रही है। इसका एकमात्र उपाय है कि हम पृथ्वी को शीतल रखें और यह शीतलता हमारे पेड़ पौधे से ही आ सकती है पर्यावरण एवं पुरातत्व मैं रुचि रहने वाले पर्यावरणविद् श्री उपाध्याय ने इस मौके पर केंद्र शासन की राष्ट्रीय नदी विकास योजना पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि- ग्रीष्म ऋतु में जो नदियां गर्मी के कारण सूख जाती हैं उनमें राष्ट्रीय नदी विकास में प्रस्तावित योजना के तहत पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सकता है। पर्यावरण संरक्षण एवं जल की एक एक बूंद की सुरक्षा पर श्री उपाध्याय ने कहा की जलवायु परिवर्तन समूचे मानव जाति के लिए एक वैश्विक चुनौती बन चुका है ।दुनिया के 40 देश अब पृथ्वी के बढ़ते तापमान पर चिंतित है एवं मानव सुरक्षा के लिए विशेष प्रयास कर रहे हैं ।
जलवायु परिवर्तन के प्रकोप से बचने के लिए पूरी दुनिया चिंतित है इसी के तहत पेरिस जलवायु समझौता की पेशकश की गई है। उन्होंने कहा कि जहां एक ओर तेजी से पेड़ पौधो के कटने से तापमान में वृद्धि हो रही है वही वायु प्रदूषण भी इसका एक बड़ा कारण है उन्होंने बताया कि सल्फर डाइऑक्साइड वायु प्रदूषक है जो अम्लीय वर्षा धुंध एवं स्वास्थ संबंधी कई समस्याओं के लिए जिम्मेदार है ।दिल्ली से लगे राज्यों हरियाणा पंजाब एवं उत्तर प्रदेश के कुल 11 बिजली घरों समेत देश भर के 450 से ज्यादा पावर प्लांट को 2015 में सरकार ने यह आदेश दिया था कि वह सल्फर डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को कम करने के लिए एमिशन कंट्रोल टेक्नोलॉजी लगाएं ।इससे वायु प्रदूषण में काफी हद तक कमी आ सकती है। पृथ्वी के तापमान को कम करने एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए वैश्विक स्तर पर आज विशेष प्रयास की आवश्यकता है। विश्व पृथ्वी दिवस पर वैश्विक स्तर पर किए जा रहे है जलवायु संबंधी मुद्दों पर श्री उपाध्याय ने कहा जलवायु परिवर्तन के मामले में वैश्विक मंच में भारत की भागीदारी निश्चित रूप से जलवायु परिवर्तन के संकट से निपटने के लिए आने वाले समय में अहम भूमिका निभा सकेगी। श्री उपाध्याय ने वन्य प्राणियों के संरक्षण, जंगलों के तेजी से होते कटाव एवं जैव विविधता के संरक्षण से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विचार व्यक्त करते हुए- आम जनमानस से यह अपील की है कि वे आने वाले समय पृथ्वी के तापमान को नियंत्रित करने के लिए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सभी पानी की एक-एक बूंद को बचाने एवं अधिक से अधिक वृक्षारोपण करे। तभी पृथ्वी का तापमान नियंत्रित हो सकेगा एवं हमारे आने वाली पीढ़ी को विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं से जूझना नहीं पड़ेगा। उन्होंने यह कहा कि यदि वैश्विक स्तर पर पृथ्वी के तापमान को नियंत्रित नहीं किया गया एवं जलवायु परिवर्तन के मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय समूचे मानव जाति के समक्ष बहुत बड़े संकट की घड़ी आ सकती है।

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