0बाल बाल बचे शिक्षक व बच्चे

00 बेफिक्र अधिकारियों की कार्यप्रणाली से अविभावकों में रोष

सूरजपुर। शिक्षा मंत्री जी थोड़ा इधर भी नजर फ़रमाइये….! यह आपके जिले के उच्चतर स्कूल का हाल है। जहाँ बच्चे खतरों के बीच अपना भविष्य गढ़ने को विवश है। सरकारी स्कूल का यह हाल उस गांव का है जो कभी मध्यप्रदेश के जमाने मे सरगुजा का ही नही बल्कि मध्यप्रदेश का शान हुआ करता था। जी, बसदेई वह गांव है जो आदर्श गांव था, और यहां के मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू करने की बात थी।जिसे अपनी तमाम उपलब्धि के लिए कई बार सम्मान मिल चुका है।लेकिन आज यहां का सरकारी स्कूल इस कदर बदहाल स्थिति में है जिसकी कल्पना नही की जा सकती।शिक्षा मंत्री का यह जिला है पर दुर्भाग्य है कि उन्ही के जिले का सरकारी स्कूल इस बदहाल स्थिति में वह भी उस गांव का है जहाँ की सियासत के वे अनुयायी है। बहरहाल,बसदेई का उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जहां करीब 700 विद्यार्थी पढ़ते है। यह भवन अत्यंत जर्जर हालत में है कई कमरों के पलास्टर उखड़ कर नीचे गिर गए है और लगातार गिर भी रहे है। हालत ऐसी है कि कभी भी गम्भीर हादसा हो सकता है। वह तो कोरोनाकाल रहा कि लंबे समय तक स्कूल बंद था,जिससे लोग चिंतित नही थे पर अब जैसे ही स्कूल खुला है लोगो को चिंता होने लगी है। कई बार अधिकारियों का ध्यानाकर्षित किया जा चुका है पर अधिकारियों को तो जैसे किसी बड़े हादसे का इंतजार है..? कांग्रेस के जिला सयुंक्त मंत्री बिजेंद्र गोयल बताते है कि कई बार वे खुद जिले अफसरानो का ध्यानाकर्षित करा चुके है पर सुनता कोई नही है। श्री गोयल कहते है कि इस बिल्डिंग को लेकर लोग काफी नाराज है ,नाराजगी इस बात को लेकर है कि कही कोई हादसा हो गया तो किसी के घर का भविष्य उजड़ जाएगा तब अधिकारी सांप निकलने के बाद लकीर पीटने के अंदाज में सक्रिय होंगे। परन्तु इस पर पहले ध्यान दिया जाना चाहिये ताकि कोई अनहोनी न हो। उन्होंने बताया कि हाल फिलहाल में भी उपरोक्त फ़ोटो भेज कर जिले के तमाम अफसरान का ध्यानाकर्षित करा चुके है शायद कोई सुन ले..?

भर भरा कर गिरा छत

शहर से लगे 8 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत बसदेई शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में शनिवार को दो कमरों में छत का प्लास्टर भरभरा कर नीचे गिर गया। राहत की बात यह रही कि कुछ देर पहले बच्चे कमरों से बाहर निकले थे। इस घटना से बाद से बच्चे दहशत में हैं तो वहीं शिक्षकों में रोष है।शनिवार को स्कूल में कक्षा चल रही थी और बच्चे खाना खाने कक्षा से बाहर निकल कर खेलने लगे थे। इसी दौरान कमरे का पूरा प्लास्टर भरभरा कर नीचे आ गिरा। प्लास्टर गिरने से एक जोरदार आवाज हुई। शिक्षक आवाज सुनकर कमरे की ओर दौड़े। वहां का नजारा देख कर शिक्षकों के होश उड़ गए। प्लास्टर गिरने की खबर अभिभावकों को हुई, तो सभी ने स्कूल की ओर दौड़ लगा दी। वहीं इसकी जानकारी आला अधिकारियों को दी गई, लेकिन शिक्षा विभाग से जुड़ा कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। इससे शिक्षकों के साथ-साथ अभिभावकों में आक्रोश व्याप्त है।

1992 में बना था भवन

स्कूल की इमारत 1992 में बनी हुई बताई जाती है।जब से यह बिल्डिंग बनीं हैं, तब से इसमें मरम्मत का कोई मरम्मत नहीं किया गया है। बताते हैं कि स्कूल स्टॉफ द्वारा भी कई बार आला अधिकारियों को जर्जर बिल्डिंग से हादसा होने की संभावना व्यक्त कर इसकी मरम्मत कराने की मांग की गयी लेकिन उस पर गौर नहीं किया गया।

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