रामानुजगंज(विकाश कुमार केशरी)- एक ओर जहां शासन के द्वारा कोरेना संक्रमण काल में भी मजदूरों को मजदूरी मिलते रहे एवं उनके सामने आजीविका की समस्या खड़ी न हो इसके लिए मनरेगा का कार्य सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान में रखकर किए जाने के लिए निर्देशित किया था परंतु इसकी आड़ में रामचंद्रपुर विकासखंड के ग्राम रेवतीपुर में मनरेगा के अधिकारी कर्मचारी एवं पंचायत कर्मी की मिलीभगत से ₹128304 फर्जी मस्टररोल भर कर निकाल लिया गया। मामले का खुलासा होने के बाद जनपद सीईओ के द्वारा राशि रिकवरी करने की बात कही जा रही है।

                     प्राप्त जानकारी के अनुसार महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना अंतर्गत जनपद पंचायत रामचंद्रपुर के ग्राम पंचायत रेवतीपुर में डबरी निर्माण हितग्राही नानू पिता सोनसाय, रंगलाल पिता जगदीश जहीर पिता गुलाम के नाम वर्ष 2019-20 में डबरी स्वीकृत किया गया था। जिसमें प्रत्येक डबरी की स्वीकृति राशि ₹298000 है। तीनों हितग्राहियों के डबरी निर्माण में बिना एक कुदाल चलाएं फर्जी मस्टर रोल बनाकर ₹128304 भुगतान कर दिया गया जब इसकी जानकारी ग्रामीणों को मिली तो इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों से की गई जिसके बाद जांच कराया गया जिसमें ग्रामीणों की शिकायत सही पाई गई।

मनरेगा कर्मियों के मिलीभगत से दिया गया फर्जीवाड़ा को अंजाम- रोजगार सहायक एवं मनरेगा कर्मियों के मिलीभगत से पूरे फर्जीवाड़ा को अंजाम दिया गया। सवाल उठता है कि शाखा प्रभारी के द्वारा बिना फाइलें कंप्लीट हुए कार्यक्रम अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया गया एवं कार्यक्रम अधिकारी के द्वारा बिना नस्ती एवं माप पुस्तिका देखें कैसे भुगतान कर दिया गया।

कार्यवाही के नाम पर होती है कागजी खानापूर्ति- जनपद पंचायत रामचंद्रपुर के अंतर्गत कई ग्राम पंचायतों में मनरेगा की कई शिकायतें हैं शिकायतों की जांच भी होती है परंतु जब कार्यवाही की बारी आती है तो कार्यवाही के नाम पर कागजी खानापूर्ति होती है जिस कारण मनरेगा में भ्रष्टाचार को लगाम नहीं लग पा रहा है।

शौचालय घोटाला की जांच ठंडे बस्ते में-  रामचंद्रपुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाले 22 ग्राम पंचायतों में स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत बने शौचालय निर्माण में बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है जिसके लिए जांच कमेटी भी बनाई गई थी परंतु जांच कमेटी आज तक जांच पूरी नहीं कर सकी एवं शौचालय घोटाला भी ठंडे बस्ते में चला गया। ग्राम पंचायतों में शौचालय की स्थिति ऐसी है कि कई स्थानों पर तो शौचालय का अस्तित्व ही खत्म हो गया और कई जगह पर बिना बने शौचालयों के नाम पैसे निकल गए परंतु न इसकी जांच हुई न कोई कार्यवाही।

पौधारोपण घोटाला का भी नहीं हुआ जांच पूर्ण- मनरेगा के अंतर्गत विभिन्न ग्राम पंचायतों में पौधारोपण किया गया था परंतु पौधारोपण के नाम बड़े फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया स्थिति ऐसी है कि कई गांव में तो एक भी पौधे का अस्तित्व ही नहीं बचा वहीं इसके लिए जांच कमेटी भी बनी परंतु जांच कमेटी आज तक जांच पूरी नहीं कर सकी।

इस संबंध में जनपद सीईओ समुद्र साय ने कहा कि जिला पंचायत के निर्देश पर जांच हुआ था जिसमें फर्जी रूप से भुगतान होना पाया गया जिस पर जिला पंचायत के द्वारा राशि वसूली के लिए आदेशित किया गया है।

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