बिजली तारों से सट रही पेड़ की डंगालें, पास ही स्कूली, राहगीरों-स्कूली बच्चों का होता है आवागमन

अंबिकापुर। नगर के कलेक्टर बंगला के पीछे प्रतापपुर रोड, कनकरानी दत्ता मार्ग पर शासकीय आवास परिसर में लगा बांस का पेड़ पिछले 12 वर्षों से किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहा है। बांस की मोटी-मोटी डंगालें सीधे सड़क की ओर झुकी हुई हैं और ऊपर से गुजरे हाईटेंशन बिजली के तारों से महज कुछ फासले पर हैं, जिससे बरसात और तेज हवा के समय खतरे की संभावना बढ़ जाती है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर साल मानसून में इस मार्ग से गुजरना दहशत भरा हो जाता है। थोड़ी सी हवा चलने पर बांस की डंगालें बिजली के तारों से टकराती हैं और चिंगारियां निकलती हैं।

पिछले साल टला था बड़ा हादसा

सामाजिक कार्यकर्ता वंदना दत्ता सहित अन्य ने बताया कि पिछले वर्ष मानसून के दौरान बांस की एक भारी डंगाल बिजली के तार से टकरा गई थी। टकराव इतना तेज था कि बिजली का तार टूटकर सीधे सड़क पर गिर गया। गनीमत रही कि, उस समय कोई राहगीर उसकी चपेट में नहीं आया। घटना के बाद उन्होंने तत्कालीन जिलाध्यक्ष से मुलाकात करके पूरी समस्या बताई थी। इसके बाद आनन-फानन में विद्युत विभाग की टीम पहुंची, लेकिन सिर्फ विद्युत व्यवस्था को दुरूस्त करने का काम हुआ। बांस के पेड़ को हटाने या उसकी छंटाई की स्थायी व्यवस्था नहीं की गई।

शिकायतों के बावजूद नहीं हुई छंटाई

वंदना दत्ता ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने विद्युत विभाग और नगर निगम को कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें दी हैं। हर साल बरसात से पहले विद्युत विभाग शहर भर में पेड़ों की छंटाई का अभियान चलाता है, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से इस बांस के पेड़ को हर बार छोड़ दिया जाता है। नगर निगम कार्यालय में भी इसकी सूचना दी जा चुकी है, लेकिन फाइलें आगे नहीं बढ़ीं। इस मार्ग से दिनभर दुपहिया, चारपहिया और स्कूली वाहनों का आवागमन बना रहता है। इसके अलावा मार्ग में जरूरतमंद बच्चों के लिए स्कूल भी संचालित होता है। सुबह और छुट्टी के समय सैकड़ों बच्चे इसी रास्ते से गुजरते हैं।

हादसे का इंतजार किए बिना निकालें समाधान  

वंदना दत्ता ने कहा कि, बड़ी दुर्घटना होने के बाद की जाने वाली कार्रवाई का कोई अर्थ नहीं रह जाता है। जनसुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन को समय रहते इस समस्या का समाधान करना चाहिए। उन्होंने मांग की कि बांस की खतरनाक डंगालों की तत्काल छंटाई करवाई जाए या फिर पूरे पेड़ को सुरक्षित तरीके से हटाने की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।

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