बलरामपुर जिले के जामवंतपुर और कर्री चलगली में विश्व आदिवासी दिवस हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए। इस दौरान नन्हे-मुन्ने बच्चों ने आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम में समां बांध दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष बसंत कुजूर ने समाज के लोगों को बधाई दिया वहीं उन्होंने अपने संबोधन में सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि मानसून सत्र में कई मुद्दे सामने आए हैं और सरकार द्वारा प्रचार-प्रसार पर अरबों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी समाज के हितों की लगातार अनदेखी की जा रही है।
बसंत कुजूर ने कहा कि आदिवासी समाज को अपने महान वीरों और पुरखों के बताए रास्ते पर चलना होगा। उन्होंने लागुड़ बिगुड़, थीथीर उरांव, नीलांबर-पीतांबर जैसे महान व्यक्तित्वों के संघर्षों को याद करते हुए समाज के लोगों से अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही समाज के भविष्य को मजबूत बनाने का सबसे बड़ा माध्यम है, इसलिए प्रत्येक परिवार को शिक्षा को जीवन का प्रमुख मंत्र बनाना चाहिए।
उन्होंने क्षेत्र में बाहरी लोगों द्वारा किए जा रहे कथित अवैध कब्जों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि समाज की जमीन, अधिकार और अस्तित्व की रक्षा के लिए सभी को एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठानी होगी। उन्होंने छत्तीसगढ़ में आदिवासी समाज के साथ हो रहे कथित अत्याचार और शोषण के खिलाफ भी एकजुटता की आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी का मन मोह लिया। आयोजन में हजारों की संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे और आदिवासी संस्कृति, परंपरा एवं अधिकारों की रक्षा का संकल्प लिया।

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