छात्रों पर लाठीचार्ज को बताया तानाशाही, शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग

अंबिकापुर। छात्रों पर लाठीचार्ज और सांसद राहुल गांधी एवं प्रियंका गांधी की गिरफ्तारी के विरोध में बुधवार को जिला कांग्रेस कमेटी सरगुजा ने प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर प्रधानमंत्री का पुतला दहन किया। जिला कांग्रेस ने आरोप लगाया कि नीट पेपर लीक एवं शिक्षा नीति के विरोध में जंतर-मंतर जा रहे छात्रों पर दिल्ली पुलिस और उनके साथ शामिल संदिग्ध लोगों ने लाठियों और पत्थरों से हमला किया। इस घटना में 150 से अधिक छात्र घायल हुए। इन्होंने आरोप लगाया कि, दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन है और यह कार्रवाई केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर हुई है।

मंगलवार को कांग्रेस सांसदों ने संसद में स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से चर्चा की मांग की थी, लेकिन दोनों सदन स्थगित कर दिए गए। इसके बाद राहुल गांधी घायल छात्रों से अस्पताल में मिले और प्रधानमंत्री आवास के सामने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। वहां से पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी सहित अन्य नेताओं को बलपूर्वक गिरफ्तार कर लिया।

लाठीचार्ज अमानवीयता की पराकाष्ठा

कांग्रेस के सरगुजा जिला अध्यक्ष बालकृष्ण पाठक ने कहा कि ‘छात्र देश के भविष्य हैं। उन पर लाठीचार्ज अमानवीयता की पराकाष्ठा है। यह हमला संघ के गुंडों द्वारा किया गया। यह सीधे संघ, मोदी और शाह की निजी सेना है।’ उन्होंने प्रधानमंत्री से माफी और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की।

‘देश ब्रिटिश हुकूमत से नहीं डरा तो तानाशाह सरकार से क्या डरेगा’

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री एवं सरगुजा संभाग प्रभारी राजेश दुबे अधिवक्ता ने जंतर-मंतर नई दिल्ली में आंदोलनरत छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की घटिया शिक्षा नीति और बार-बार हो रहे पेपर लीक से परेशान होकर देशभर के छात्र-छात्राएं जंतर-मंतर पर शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहे थे। उन पर की गई बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज मोदी सरकार की तानाशाही और क्रूर मानसिकता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि ‘नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और सांसद प्रियंका गांधी घायल छात्रों से मिलने के बाद प्रधानमंत्री से चर्चा के लिए शांतिपूर्ण धरने पर बैठे थे। राहुल गांधी को घसीटकर गिरफ्तार किया गया और प्रियंका गांधी को पुरुष पुलिस द्वारा खींचा-धकेला गया। यह लोकतंत्र, कानून व्यवस्था और संविधान को शर्मसार करने वाला कृत्य है। राजेश दुबे ने ब्रिटिश सरकार से तुलना करते हुए कहा कि जिस तरह ब्रिटिश सरकार भारतीयों की आवाज दबाने के लिए दमनात्मक रवैया अपनाती थी, उसी तरह मोदी सरकार देश की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। यह देश उस ब्रिटिश हुकूमत से नहीं डरा तो इस तानाशाह सरकार से क्या डरेगा।

बुधवार को कांग्रेस के प्रदर्शन के पूर्व स्वामी विवेकानन्द चौक में रैली के शक्ल में पहुंचे छात्र-छात्राओं ने भी नीट पेपर लीक एवं शिक्षा नीति के विरोध में जमकर नारेबाजी करते हुए केंद्र सरकार को कोसा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री से इस्तीफा की मांग की।

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