अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के प्रांतीय आह्वान पर मंगलवार को जिला मुख्यालय अंबिकापुर में स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। जिले के सभी विकासखंडों से आए स्वास्थ्य कर्मचारियों ने घड़ी चौक में एकत्र होकर रैली निकाली और मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री एवं स्वास्थ्य सचिव के नाम कलेक्टर सरगुजा को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन का मुख्य कारण स्वास्थ्य विभाग में प्रस्तावित निजीकरण, आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा का विरोध तथा वर्ष 2023 के अनिश्चितकालीन कामबंद आंदोलन के बाद शासन द्वारा किए गए वादों को पूरा करवाना है।

स्वास्थ्य कर्मचारियों की मांग

ज्ञापन के माध्यम से कर्मचारियों ने पुनरीक्षित वेतनमान तत्काल लागू करने, रेडिएशन भत्ता, जोखिम भत्ता देने, समान कार्य के लिए समान वेतन सुनिश्चित करने, स्वास्थ्य विभाग में निजीकरण, आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा पर पूर्ण रोक लगाने, एक पाली में ओपीडी संचालन, पदनाम परिवर्तन, समय पर पदोन्नति एवं समयमान वेतनमान देने, संविदा कर्मचारियों के लिए नियमित भर्ती में 50 प्रतिशत पद आरक्षित करने, आधार आधारित उपस्थिति प्रणाली में व्यवहारिक सुधार, स्वास्थ्य संस्थाओं में कर्मचारियों के लिए आवास की व्यवस्था और स्वास्थ्य आयोग का गठन करने की मांग की है।

सीएचओ संघ ने भी दिया समर्थन

आंदोलन में छत्तीसगढ़ प्रदेश सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि भारत सरकार की आयुष्मान भारत-हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर ऑपरेशनल गाइडलाइन के अनुसार सीएचओ के लिए 25,000 प्रतिमाह निश्चित मानदेय एवं कार्य आधारित प्रोत्साहन का प्रावधान है। राज्य स्वास्थ्य समिति की शासी निकाय द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना में वेतनमान पुनर्निर्धारण का प्रस्ताव भी अनुमोदित हो चुका है, लेकिन आज तक आदेश जारी नहीं हुआ है। संघ ने मांग की कि अनुमोदित प्रस्ताव के अनुरूप तत्काल आदेश जारी कर लाभ दिया जाए।

वर्षों पुरानी मांगों की लगातार उपेक्षा

संघ के प्रांतीय अध्यक्ष अनिल कुमार पाण्डेय ने कहा कि स्वास्थ्य कर्मचारी जनस्वास्थ्य सेवाओं को समर्पित भाव से चला रहे हैं, लेकिन उनकी वर्षों पुरानी मांगों की लगातार उपेक्षा हो रही है। यदि शासन द्वारा शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो स्वास्थ्य कर्मचारी संघ प्रदेशव्यापी एवं उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। इस दौरान प्रांत, जिला एवं विकासखंड स्तर के पदाधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, स्टाफ नर्स, एएनएम, आरएचओ, लैब टेक्नोलॉजिस्ट, फार्मासिस्ट सहित बड़ी संख्या में नियमित एवं संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी उपस्थित रहे।

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