किस्त भरने का झांसा देकर हड़प ली 60 फीसदी राशि, 5 के विरूद्ध धोखाधड़ी का केस दर्ज

अंबिकापुर। ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से लोन दिलाने के नाम पर 57.55 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि 5 लोगों ने साजिश के तहत विभिन्न बैंकों से उनके नाम पर एक करोड़ 5 लाख 92 हजार रुपये का ऋण स्वीकृत कराया, इसके बाद ऋण की 60 प्रतिशत राशि अपने खातों में ट्रांसफर करा ली और कुछ रकम नकद ले ली। शुरुआती 5 किस्त जमा करने के बाद आरोपियों ने भुगतान करना बंद कर दिया, जिससे ऋण राशि की वसूली का दबाव बढ़ा। पुलिस मामले में धोखाधड़ी का अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के मुताबिक, कृषि विभाग में पदस्थ लुण्ड्रा निवासी ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी लालसाय राम बखला ने धौरपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई है कि वर्ष 2024 में घर निर्माण के लिए ऋण की जरूरत थी। इसी दौरान सुरेंद्र सिंह और संतोष दास ने उनकी मुलाकात किशुनपुर निवासी शिवशंकर दास से कराई। शिवशंकर ने जरूरत के अनुरूप ऋण दिलाने का भरोसा दिलाया और सभी दस्तावेज लेकर विभिन्न बैंकों से संपर्क किया।

शिकायत के मुताबिक, दस्तावेज जमा कराने के बाद अलग-अलग बैंकों से आये ओटीपी शिवशंकर के कहने पर उन्होंने साझा कर दिया। इसके बाद उनके नाम पर छह बैंकों से कुल 1.05 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण स्वीकृत हो गया। जब उन्होंने अधिक ऋण की राशि आने पर आपत्ति जताई तो आरोपी ने भरोसा दिलाया कि ऋण का 60 प्रतिशत राशि उन्हें दे दें, शेष राशि वे अपने उपयोग के लिए रख लें, सभी किस्तों का भुगतान वे स्वयं करेंगे। इतना ही नहीं, ऋण नहीं चुका पाने की स्थिति में अपनी जमीन और मकान देने के लिये भी इन्हें आश्वस्त किया गया। आरोपियों के कहने पर वे आरटीजीएस के जरिए करीब 41.05 लाख रुपये शिवशंकर दास, अरविंद कुमार और आशा मानिकपुरी के खातों में ट्रांसफर कर दिये। इसके अलावा 16.55 लाख रुपये अलग-अलग समय में नकद भी दे दिये। इसके बाद आरोपियों ने शुरुआती पांच किस्तों का भुगतान किया, बाद में किस्त जमा करना बंद कर दिया।

वेतन खाता सीज होने से बनी आर्थिक संकट की स्थिति

अधिकारी के नाम पर आईसीआईसीआई, एचडीएफसी, एसबीआई, एक्सिस बैंक, चोला मंडलम और ग्रामीण बैंक से ऋण वसूली का नोटिस मिलने लगा। इनका वेतन खाता भी सीज कर दिया गया, जिससे आर्थिक संकट की नौबत बन गई। धौरपुर पुलिस ने शिकायत के आधार पर शिवशंकर दास, सुरेंद्र सिंह, संतोष दास, अरविंद कुमार और आशा मानिकपुरी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) एवं 61(2) के तहत अपराध दर्ज कर लिया है, और विवेचना शुरू कर दी है।

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