अंबिकापुर। राममंदिर रोड स्थित मुकेश प्लास्टिक-पटाखा होलसेल दुकान में लगी भीषण आग के मामले में पुलिस ने दर्ज अपराध में गैर जमानती और विस्फोटक अधिनियम की धाराएं जोड़ दी हैं। सरगुजा आईजी ने मामले में मामूली धाराओं के तहत अपराध दर्ज करने पर सरगुजा एसपी के माध्यम से नोटिस जारी किया था।

एफएसएल की जांच में घटनास्थल रिपोर्ट में पटाखों के अवशेष मिलने की पुष्टि हो गई है। इसके बाद कोतवाली पुलिस ने मामले में मामले में अतिरिक्त धाराएं जोड़ी हैं।एक सप्ताह पहले गुरुवार को राम मंदिर गली में स्थित मुकेश प्लास्टिक होलसेल दुकान में भीषण आग लग गई। इस आग से तीन मंजिला बिल्डिंग पूरी तरह से तबाह हो गई।आग लगने के दौरान गोदाम में रखे पटाखों में विस्फोट हो गया, जिससे आग और तेजी से फैल गई। आसपास के छह घर भी इसकी चपेट में आ गए और प्रभावित हुए।इस हादसे में पूरी बिल्डिंग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसका एक हिस्सा गिर भी गया।

आगजनी के बाद दूसरे दिन भीषण आग पर काबू पा लिया गया था, लेकिन एक सप्ताह बाद भी बिल्डिंग के अंदर से धुआं निकल रहा है। घटना चौथे दिन सोमवार को एफएसएल टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की थी। हालांकि बिल्डिंग में आग जलते रहने के कारण असुरिक्षत भवन में अंदर घुसकर पुलिस जांच नहीं कर सकी।

एफएसएल की टीम ने घटनास्थल की प्रथम जांच रिपोर्ट में मौके पर पटाखों का अवशेष मिलना बताया है। हालांकि कितनी मात्रा में पटाखे रखे गए थे, इसके लिए टीम दुबारा जांच करेगी। आगजनी के दौरान खतरनाक विस्फोट के वीडियो सामने आने के बाद भी पुलिस ने मामले में दर्ज अपराध में मामूली धाराएं लगाई थी।

आईजी के नोटिस के बाद जोड़ी गई गैर जमानती धारा
सरगुजा आईजी दीपक कुमार झा ने मामूली धाराओं में अपराध दर्ज करने को लेकर सरगुजा एसपी को पत्र लिखकर थाना प्रभारी कोतवाली अंबिकापुर से स्पष्टीकरण लेने का निर्देश दिया। नोटिस में आईजी ने पूछा है कि मामले में बीएनएस की धारा 324, 326 (छ) व विस्फोटक अधिनियम की धारा 9 (ख) क्यों नहीं जोड़ी गई? सरगुजा आईजी के नोटिस के बाद मामले में कोतवाली पुलिस ने प्रतुल्य पांडेय की शिकायत पर दर्ज अपराध में ये धाराएं जोड़ दी हैं। मामले में मुकेश पटाखा एजेंसी के संचालक मुकेश अग्रवाल और उनके करीबी रिश्तेदार प्रवीण अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। जोड़ी गई धाराओं में 10 वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है।

भवन डिसमेंटल का आदेश, दुबारा जांच करेगी एफएसएल की टीम
नगर निगम आयुक्त डीएन कश्यप ने इस बिल्डिंग को खतरनाक श्रेणी में घोषित किया है। रविवार 26 अप्रैल की शाम आयुक्त ने संचालक मुकेश अग्रवाल को नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर असुरक्षित भवन को सुरक्षित तरीके से हटाने का आदेश दिया था। हालांकि बिल्डिंग अब तक नहीं तोड़ी जा सकी है। वहीं एफएसएल की जांच भी अभी अधूरी है। फारेंसिक अधिकारी कुलदीप कुजूर ने कहा कि एफएसएल की टीम दोबारा मौके पर जांच करेगी। इसमें बिल्डिंग में आगजनी के कारण, विस्फोटकों की मात्रा की जानकारी जुटाई जाएगी। भवन को ढहाने के पूर्व सूचित करने के लिए संबंधितों को कहा गया है। कुलदीप कुजूर ने बताया कि अभी मामले में केमिकल एनालिसिस रिपोर्ट नहीं आई है। घटनास्थल की जांच रिपोर्ट भेज दी गई है। रिपोर्ट में मौके पर जले हुए पटाखों के अवशेष मिलना बताया गया है। मात्रा की जानकारी जांच पूरी होने के बाद ही मिल सकेगी।

 

 

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