होटल संचालक ने नोटिस के जवाब में कहा-उनके कार्य से कोई प्राकृतिक निकास बाधित नहीं हो रहा, प्रशासन ने किया अमान्य

अंबिकापुर। शहर के पुराने तालाबों के घटते दायरे को नजरअंदाज करने से कई तालाब एकड़ से डिसमिल में सिमट गए हैं। ऐसे ही तालाबों में एक भाथुपारा तालाब है, जिसका रकबा कहने को 11 एकड़ 81 डिसमिल है, लेकिन वर्तमान में दो एकड़ भी तालाब का क्षेत्र सुरक्षित नहीं है। होटल पर्पल आर्किड के पीछे स्थित जमीन के बड़े हिस्से में होटल संचालक के द्वारा विरोध के बावजूद बाउंड्रीवाल खड़ा कर दिया गया था, इससे तालाब के पानी निकासी का प्राकृतिक मार्ग भी बंद हो गया। मामले को भाजपा व कांग्रेस के पार्षद ने जिला और निगम प्रशासन के संज्ञान में लाया था। इस पर निगम आयुक्त डीएन कश्यप ने होटल पर्पल आर्किड के संचालक मुकेश अग्रवाल को नोटिस जारी किया था, लेकिन उन्होंने नोटिस का जवाब नहीं दिया।

स्थानीय लोगों के विरोध के बाद आयुक्त ने 13 अप्रैल को मुकेश अग्रवाल को नोटिस जारी करके अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया। नोटिस में आयुक्त ने खसरा क्रमांक 4740/3 में किए गए अतिक्रमण को 7 दिनों में हटाने का अल्टीमेटम दिया था। इसके बाद भी स्थिति यथावत रही। नोटिस के जवाब में होटल संचालक ने उक्त भूमि को अपने स्वामित्व का बताते हुए स्पष्ट किया कि, उनके कार्य से किसी प्रकार का प्राकृतिक निकास का काम प्रभावित नहीं हो रहा है। परंतु पूर्व में तहसीलदार द्वारा कराए गए जांच व दिए गए प्रतिवेदन के आधार पर मुकेश अग्रवाल के जवाब को अमान्य करते हुए निगम आयुक्त द्वारा भाथु तालाब पर किये गये अतिक्रमण को हटाने के लिए आदेश जारी किया गया। मंगलवार को प्रशासनिक और निगम के अमले ने मौके पर चार एक्सीवेटर और डंफर लगवाकर भरे गए मिट्टी को हटवाने का काम शुरू किया। बाउंड्रीवॉल भी निगम अमले ने ध्वस्त कर दिया है। निगम प्रशासन द्वारा धारा 243 का प्रयोग पहली बार निजी भूमि से प्राकृतिक निकास को सुचारू करने के लिए किया गया है। इससे पूर्व इस धारा का उपयोग केवल शासकीय भूमि पर हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए किया जाता रहा है।

कलेक्टर ने सभी तालाबों का सीमांकन करने कहा है

निगम आयुक्त डीएन कश्यप ने कहा कि, तालाब के कितने हिस्से में कब्जा है, इसकी जांच राजस्व अमला करेगा। बता दें कि अंबिकापुर के तालाबों को पाटकर अवैध कब्जा करने का मामला नगर निगम की सामान्य सभा की बैठक में कांग्रेस और भाजपा के पार्षदों ने उठाया था, इसके बाद निगम ने सर्वसम्मति से तालाबों का सीमांकन करने के लिए प्रशासन को पत्र भेजने का निर्णय लिया है। निगम आयुक्त ने बताया कि, सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत ने निगम के अधीन सभी तालाबों पर कब्जे का चिन्हांकन करने और अतिक्रमण रोकने के निर्देश भी दिए हैं।

भाथु तालाब रिकार्ड में 11.81 एकड़

भाजपा पार्षद आलोक दुबे ने बताया कि भाथुपारा तालाब नगर निगम का है। रिकार्ड में यह 11 एकड़ 81 डिसमिल है, इसके अधिकांश हिस्से को पाटकर कब्जाधारियों ने कब्जा कर लिया है। वर्तमान में तालाब का रकबा दो एकड़ भी शेष नहीं है। इसका सीमांकन करके अतिक्रमण हटाया जाना आवश्यक है। बरसात के समय में पानी प्राकृतिक रूप से भाथू तालाब की ओर जाता है, जिस कारण तालाब भर जाता है। इस भूमि को अपना बताने वाले होटल संचालक मुकेश अग्रवाल ने बड़े हिस्से को मिट्टी से पाट दिया गया, जिससे बीते वर्ष बरसात के मौसम में कुंडला सिटी में बाढ़ की स्थिति बन गई थी।

होटल संचालक के जवाब को किया अमान्य

भूमि स्वामी मुकेश अग्रवाल को निगम द्वारा प्राकृतिक निकास जलप्रवाह (प्राकृतिक निकास) को बाधित करने पर छ.ग. नगर पालिक निगम, अधिनियम का उल्लंघन व उक्त कार्य को पूर्णतया अवैधानिक बताते हुए मिट्टी भराव को हटाने नोटिस जारी किया गया था, परंतु भूमि स्वामी ने ना तो नोटिस का जवाब दिया और ना ही कोई कार्रवाई की। 13 अप्रैल को पुन: निगम द्वारा नोटिस जारी करके 7 दिन में मिट्टी को हटाकर सूचित करने कहा गया था, तब भूमि स्वामी ने जवाब प्रस्तुत करते हुए अपने स्वामित्व की भूमि से किसी प्रकार के प्राकृतिक निकास का मार्ग नहीं होने तथा उनके कार्य से कोई प्राकृतिक निकास बाधित नहीं होने का जवाब दिया गया, परंतु पूर्व में तहसीलदार द्वारा कराए गए जांच व दिए गए प्रतिवेदन के आधार पर मुकेश अग्रवाल के जवाब को अमान्य करते हुए निगम आयुक्त द्वारा भाथु तालाब पर किये गये अतिक्रमण को हटाने के लिए आदेश जारी किया गया।

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