कलेक्टर द्वारा गठित उच्च स्तरीय संयुक्त जांच कमेटी ने अपनी कार्रवाई तेज की

अंबिकापुर। शहर के श्री राम मंदिर के सामने स्थित गली में पटाखा व प्लास्टिक गोदाम में 23 अप्रैल को लगी भीषण आग के बाद जली हुई इमारत खतरे का सबब बना हुआ है। आग में पूरी तरह क्षतिग्रस्त भवन फिलहाल पूरी तरह से मजबूती खो चुके खंभे के सहारे खड़ी है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका है। इसे देखते हुए नगर निगम आयुक्त ने संचालक को तत्काल भवन को डिस्मेंटल करने का नोटिस जारी किया है। आसपास घनी आबादी होने के कारण स्थानीय लोगों में डर का माहौल है। निगम ने इसे सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा है। इधर मामले में कलेक्टर के द्वारा गठित उच्च स्तरीय संयुक्त जांच कमेटी ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। सोमवार को फोरेंसिक एक्सपर्ट की टीम ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य एकत्र किया। घटना को लेकर मोहल्ले के लोगों का आक्रोश बरकरार है।

जानकारी के मुताबिक, फॉरेंसिक विभाग के कुलदीप कुजूर अपनी टीम के साथ सोमवार को श्री राम मंदिर के सामने गली में स्थित घटनास्थल पहुंचे और जले हुए पटाखों के रैपर, खोखे के अलावा प्लास्टिक सामग्री का सैंपल एकत्र किया। टीम दुकान और गोदाम में पहुंच स्थल तक का बारीकी से निरीक्षण की, और जले हुए पटाखों के रैपर, खोखे और प्लास्टिक के पिघले हुए सैंपल ग्राउंड फ्लोर से प्रथम, द्वितीय तक के लिए हैं। इन सैंपलों की जांच से यह स्पष्ट होगा कि, आग लगने का मुख्य कारण क्या था, और किस श्रेणी के विस्फोटकों का यहां पर भंडारण किया गया था। भवन में गर्माहट और खतरे की स्थिति होने के कारण टीम पूरी तरह से अंदर तक प्रवेश नहीं कर पाई। साक्ष्यों के आधार पर आग लगने के कारणों के साथ ही लापरवाही या साजिश की भूमिका की जांच की जाएगी। कलेक्टर के निर्देश पर बनी उच्च स्तरीय, संयुक्त जांच कमेटी मामले में हर पहलू से जांच कर रही है। कमेटी को 7 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपना है। जांच में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और रिहायशी इलाके में विस्फोटक भंडारण की अनुमति जैसे बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। यह तो स्पष्ट है कि, घनी आबादी वाले क्षेत्र में स्थित इस भवन में अवैध रूप से पटाखों का भंडारण काफी मात्रा में किया गया था, जिस कारण रह-रहकर धमाके हो रहे थे, जिस कारण आसपास के लोग दहशत में रहे। इन सबके बीच नियमों की अनदेखी करके रिहायशी इलाके में विस्फोटकों के भंडारण ने प्रशासन की भूमिका को भी सवालों के घेरे में ला दिया है। स्थानीय लोगों में घटना को लेकर गहरा आक्रोश है, और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है।

बता दें कि, 23 अप्रैल को भीषण आगजनी की घटना सामने आने के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम के साथ आग बुझाने के लिए ताकत झोंक रहे अग्निशमन विभाग के फायर मैनों को दो दिनों तक लगातार रात-दिन एक करके ताकत झोंकनी पड़ी। आग को काबू करने में पुलिस विभाग के वरूण वाहन और एयरपोर्ट के वाहन की भी बड़ी भूमिका रही। घटनास्थल के आसपास रहने वाले लोग अपना घर छोड़कर श्री राम मंदिर भजनाश्रम और अपने परिचितों, रिश्तेदारों के यहां पनाह लेकर समय काट रहे थे। बिजली, पानी की सुविधा ठप रहने के कारण लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। प्रभावितों में भीषण गर्मी के बीच आग की जद में आकर क्षतिग्रस्त हुए घर और अंदर रखे सामानों की तबाही की टीस आक्रोश के रूप में आज भी उभरकर सामने आ रही थी, वे पुन: पटरी पर कैसे आ पाएंगे, इसकी चिंता भी है। इधर अग्निकांड में प्रभावित एक परिवार की ओर से मुकेश प्लास्टिक और पटाखा के संचालकों प्रवीण और मुकेश अग्रवाल के विरूद्ध कोतवाली थाने में अपराध भी पंजीबद्ध कराया गया है। हालांकि, कानून के जानकार इसे अपराध दर्ज करने के नाम पर खानापूर्ति मानकर चल रहे हैं। कहना है कि, मामले में वास्तव में जिन धाराओं के तहत कार्रवाई की जानी थी, नहीं की गई है। वहीं, पुलिस जांच के सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर अन्य धाराओं के तहत कार्रवाई करने की बात कह रही है।

भवन को हटाने निगम ने जारी किया नोटिस

नगर पालिक निगम अंबिकापुर ने भवन मालिक मुकेश अग्रवाल को नोटिस जारी किया है। छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 310 के तहत भवन को असुरक्षित एवं अनुपयुक्त घोषित करते हुए 24 घंटे के भीतर उसे सुरक्षित तरीके से हटाने का निर्देश दिया गया है। नोटिस में कहा गया है कि, आग के कारण भवन के कॉलम और बीम कमजोर हो चुके हैं और पूरा ढांचा एक ओर झुक गया है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इन सबके बीच शहरवासियों को जांच रिपोर्ट का इंतजार है, जिससे भीषण अग्निकांड के बीच सामने आ रही तमाम बातों की सच्चाई सामने आ सके।

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