एक ही व्यक्ति की मृत्यु दो अलग-अलग तिथि में, कूटरचित मृत्यु प्रमाण पत्र से हो रही पुष्टि

 

गिरजा ठाकुर, छ. ग. फ्रंटलाइन 

अंबिकापुर। सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर के नगर निगम क्षेत्र में रिंग रोड स्थित रिंग बांध तालाब को नियम-विरुद्ध तरीके से पाटने का विवाद तेजी से गहराता जा रहा है। जल भराव क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण और शासकीय अभिलेखों में कथित हेराफेरी का गंभीर मामला सामने आने के बाद स्थानीय भाजपा नेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश मिश्रा ने सर्किट हाउस में पत्रकारों से चर्चा करते हुए आरोप लगाया कि अतिक्रमणकारी आजाद इराकी द्वारा स्वयं को भूमि का स्वामी बताते हुए जल भराव क्षेत्र को पाट दिया गया है, और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर संदिग्ध नामांतरण करा लिया गया है। उन्होंने कलेक्टर सरगुजा से तत्काल हस्तक्षेप करते हुए उक्त नामांतरण निरस्त करने, जल भराव क्षेत्र को पुनर्जीवित करने की मांग की है, साथ ही पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ थाने में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है।

कैलाश मिश्रा ने बताया कि मूल रूप से 6.25 एकड़ निस्तार भूमि वाले रिंग बांध तालाब का क्षेत्रफल अब मात्र 57 डिसमिल (लगभग 0.57 एकड़) रह गया है। जनवरी 2026 में इस बची हुई भूमि की भी रजिस्ट्री कर दी गई। रातोंरात बड़े हिस्से को मिट्टी से पाट दिया गया, जिससे तालाब की जल संरक्षण क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई है। उन्होंने सरगुजा सेटलमेंट में खसरा नंबर 3714 की भूमि जो रिंग बांध की भूमि का हिस्सा है, का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि जो भूमि पहले कृष्ण बहादुर सिंह पिता राम सिंह के नाम पर थी, वह 1982-83 में अचानक जयलाल के नाम पर कैसे दर्ज हो गई? इसकी कोई जांच नहीं की गई। सबसे गंभीर मामला मृत्यु प्रमाण-पत्रों का है।कैलाश मिश्रा ने कहा कि ग्राम नवापारा सख़ौली निवासी ननकी बाई द्वारा जयलाल के मृत्यु उपरांत स्वयं को उसका वारिस बताते हुए फौत नामांतरण प्रकरण में जयलाल का मृत्यु प्रमाण-पत्र लगाया गया, जिसमें मृत्यु तिथि 23 अप्रैल 1976, होली क्रॉस अस्पताल अंबिकापुर बताई गई, जबकि प्रमाण-पत्र का पंजीकरण नगर निगम द्वारा 24 फरवरी 2018 को किया गया। बाद में आवेदिका की मृत्यु के कारण यह प्रकरण नस्तीबद्ध हो गया।

इसके बाद चंद्रशेखर यादव (पिता स्व. जगतपाल यादव, निवासी दर्रीपारा अंबिकापुर) ने तहसीलदार अंबिकापुर में नया नामांतरण प्रकरण दायर किया। इसमें जयलाल पिता बोधन का मृत्यु प्रमाण-पत्र लगाया गया, जिसमें मृत्यु 12 अप्रैल 1963 को अमलभिट्टी लखनपुर सरगुजा बताया गया है, जबकि प्रमाण-पत्र ग्राम पंचायत अमलभिट्टी से 62 वर्ष बाद एक सितंबर 2025 को जारी किया गया।

“एक ही व्यक्ति की मृत्यु दो अलग-अलग तिथियों और स्थानों पर कैसे हो सकती है? यह स्पष्ट रूप से फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल है।” गौर करने वाली बात यह भी है, कि क्यूआर स्कैन करने पर एक मृत्यु प्रमाण पत्र अन्य व्यक्ति के नाम पंजीकृत बता रहा है, जो अंबिकापुर के निवासी थे। ऐसे में दस्तावेजी कूटरचना स्पष्ट उजागर हो रहा है। उन्होंने अन्य संलग्न दस्तावेजों में भी हेराफेरी का आरोप लगाया और आजाद इराकी के पक्ष में हुए नामांतरण को तुरंत निरस्त करने की मांग की।

शहर के जल संसाधनों पर खतरा

रिंग बांध तालाब अंबिकापुर शहर के लिए महत्वपूर्ण जल भराव क्षेत्र रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे अतिक्रमण से न केवल पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है, बल्कि शहर में बाढ़ और जल संकट की स्थिति भी पैदा हो सकती है। भाजपा नेता कैलाश मिश्रा ने प्रशासन से अपील की कि तालाबों और जल भराव क्षेत्रों को बचाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में शहर के प्राकृतिक जल स्रोत सुरक्षित रह सकें।

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