नवीन विश्रामगृह से महमूद अंसारी के घर तक 3डी एलाइनमेंट सड़क का हो रहा निर्माण

प्रभावित भू-स्वामियों ने कलेक्टर को शिकायत पत्र सौंपा, निष्पक्ष जांच कराने की मांग

बलरामपुर। जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-343 के निर्माण कार्य को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। ग्राम भनौरा के पास चल रहे सड़क निर्माण में गंभीर अनियमितताओं और पक्षपातपूर्ण कार्यप्रणाली के आरोप सामने आए हैं। इस संबंध में प्रभावित भू-स्वामियों द्वारा जिला कलेक्टर, बलरामपुर को लिखित शिकायत सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।

शिकायत में बताया गया है कि एनएच-343 के निर्माण के दौरान स्वीकृत 3डी एलाइनमेंट और भारतीय सड़क के मानकों का उल्लंघन किया जा रहा है। नियमों के अनुसार सड़क का विस्तार केंद्र रेखा दोनों ओर समान रूप से होना चाहिए, किंतु यहां बिना किसी तकनीकी बाधा के सड़क को एक ओर झुका दिया गया है। आरोप है कि कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से जान-बूझकर एलाइनमेंट में बदलाव किया गया है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, पश्चिम दिशा के भू-स्वामियों की भूमि अधिग्रहण के बाद पहले स्थापित मार्ग अधिकार (राइट ऑफ वे ) पिलरों को राजस्व अमले द्वारा बदल दिया गया और नए पिलर पूर्व दिशा की ओर खिसकाते हुए लगभग 7.5 मीटर तक कम कर दिया गया है। इसके बाद राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों को उसी बदले हुए एलाइनमेंट के अनुसार निर्माण करने के निर्देश दिए गए, जिससे कार्य विधि-विरुद्ध तरीके से तेजी से जारी है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि इस पूरे बदलाव की जानकारी प्रभावित भू-स्वामियों को नहीं दी गई, जिससे पारदर्शिता का अभाव स्पष्ट रूप से सामने आता है। एलाइनमेंट में परिवर्तन के कारण निजी एवं शासकीय भूमि के राजस्व रिकॉर्ड तथा मुआवजा प्रक्रिया में भी विसंगतियां उत्पन्न हो रही हैं। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि नवीन विश्राम गृह से महमूद अंसारी के घर तक लगभग 2.5 किलोमीटर के हिस्से में इस बदलाव का प्रभाव देखा जा रहा है। वहीं, बदले हुए एलाइनमेंट की जिम्मेदारी लेने से संबंधित अधिकारी, ठेकेदार और राजस्व विभाग के कर्मचारी भी बचते नजर आ रहे हैं, जिससे प्रभावित लोगों में भय और असमंजस की स्थिति बनी हुई है। तकनीकी दृष्टि से भी यह निर्माण कार्य सवालों के घेरे में है। सड़क को एक ओर अधिक झुकाने से दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है। वाहनों के पलटने का खतरा बना हुआ है। साथ ही, इससे स्थानीय लोगों की निजी संपत्तियों को भी नुकसान होने की बात सामने लाई गई है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में पहले ही साइट इंजीनियर और अन्य संबंधित अधिकारियों को मौखिक रूप से अवगत कराया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

प्रभावित पक्षों ने जिला प्रशासन से की मांग
प्रभावितों ने सड़क निर्माण के इस हिस्से का तत्काल तकनीकी ऑडिट कराने की मांग की है। इसके अलावा निर्माण कार्य के लिए स्वीकृत भौगोलिक डेटा 3डी एलाइनमेंट के अनुसार दुरुस्त करने, मौके पर राजस्व एवं तकनीकी टीम भेजकर पुन सीमांकन कराने, जांच पूरी होने तक निर्माण कार्य को स्थगित रखने, दोषी अधिकारियों एवं ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की गई है। शिकायत कर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि 5 दिनों के भीतर इस गंभीर मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो वे न्याय और सार्वजनिक सुरक्षा की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठने के लिए बाध्य होंगे, इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर आरोप पर क्या कदम उठाता है और प्रभावित ग्रामीणों को न्याय कब तक मिल पाता है।

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