संभागीय आबकारी उड़नदस्ता ने की कार्रवाई

अंबिकापुर। संभागीय आबकारी उड़नदस्ता सरगुजा की टीम ने प्रतिबंधित नशीले कैप्सूल के साथ तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से 896 नग कैप्सूल जब्त करने में टीम सफल हुई, तीनों आरोपियों को जेल दाखिल कर दिया गया है।
जानकारी के मुताबिक 18 फरवरी को संभागीय आबकारी उड़नदस्ता टीम, सहायक जिला आबकारी अधिकारी रंजीत गुप्ता के नेतृत्व में दरिमा थाना क्षेत्र के कतकालो बाजार पहुंची थी। यहां एक संदिग्ध मोटरसाइकिल सवार को देखकर टीम ने रोकने का प्रयास किया लेकिन वह भागने लगा, जिसे पीछा करके पकड़ने में आबकारी अमला सफल हुआ। पूछताछ करने पर वह अपना नाम मुकेश गुप्ता निवासी करजी थाना दरिमा का होना बताया। तलाशी लेने पर उसके पास रखे झोले से 224 नग स्पैसमो प्राक्सीवॉन प्लस नशीला कैप्सूल मिला, जिसे टीम ने बरामद किया और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। इसी क्रम में टीम को 18 फरवरी की शाम को मुखबिर से पुन: सूचना मिली कि बतौली थाना क्षेत्र के सुआरपारा में पानी टंकी के पास दो लड़के नशीले कैप्सूल का सप्लाई करने वाले हैं। सहायक जिला आबकारी अधिकारी अपनी टीम ने घेराबंदी करके दोनों लड़कों राहुल तिग्गा एवं नितेश चौहान निवासी ग्राम बिरिमकेला को पकड़ा। इनके कब्जे से 472 नग स्पैसमो प्राक्सीवान प्लस कैप्सूल जप्त किया गया। आरोपियों को एनडीपीएस एक्ट की धारा 22सी के तहत गिरफ्तार किया गया। 19 फरवरी को तीनों आरोपियों को विशेष न्यायालय अंबिकापुर में रिमांड हेतु पेश किया गया, जहां से जेल दाखिल का आदेश प्राप्त हुआ। कार्रवाई में सहायक जिला आबकारी अधिकारी के साथ मुख्य आरक्षक रमेश दुबे, कुमारु राम, अशोक सोनी, नगर सैनिक गणेश पांडे, ओमप्रकाश गुप्ता, महिला सैनिक चंद्रावती की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

डिहरीऑनसान से लाते थे नशीला कैप्सूल, पहली बार पकड़ में आए
सहायक जिला आबकारी अधिकारी रंजीत गुप्ता ने बताया सरगुजा को नशा मुक्त करने की दिशा में लगातार प्रयास जारी है। इसके पहले उन्होंने टीम के साथ कई बड़ी कार्रवाई करते हुए नशीले इंजेक्शन की छोटी-बड़ी खेप को बरामद किया था। अंतर्राज्यीय मदिरा की बड़ी खेप पकड़ने में भी टीम को सफलता मिली थी। इस बार नशे के प्रयोग में लाए जाने वाले कैप्सूल के साथ आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता मिली है। आरोपी झारखंड के डिहरीऑनसान से नशीले कैप्सूल की खेप लेकर आते थे, और बिक्री करते थे। जब्त किए गए नशीले कैप्सूल की कीमत 50 हजार रुपये हैं, जिसे नशेड़ियों को ये अधिक दाम में खपाते थे। सहायक जिला आबकारी अधिकारी ने बताया कि इनके द्वारा नशीले कैप्सूल का कारोबार करने की सूचना करीब दो वर्ष से मिल रही थी, लेकिन ये हाथ नहीं लग रहे थे। पहली बार इन्हें पकड़ने में टीम को सफलता मिली है।

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