सुकमा। जिले में सुरक्षाबल के जवानों को बड़ी सफलता मिली है, मंगलवार को 22 नक्सलियों ने पुलिस अधिकारियों के सामने सरेंडर कर दिया। सरकार की नक्सल उन्मूलन नीति और पूना मारगेम पुनर्वास से पुनर्जीवन अभियान से प्रभावित होकर इन्होंने सरेंडर करने का फैसला किया था। सरेंडर करने वाले नक्सलियों ने मुख्यधारा में शामिल होकर सरकार के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई। नक्सलियों ने कहा कि वह माओवादियों की खोखली विचारधारा से तंग आ गए थे जिस कारण से उन्होंने सरेंडर करने का फैसला किया।

हिंसा का रास्ता छोड़ पुनर्वास नीति पर भरोसा
नक्सलियों के सरेंडर की जानकारी देते हुए पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिले में लगातार नक्सल विरोधी अभियानों, नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना, सुदृढ़ सड़क संपर्क और विकास कार्यों की बढ़ती पहुंच के चलते माओवादी संगठन का प्रभाव कमजोर पड़ रहा है। इसी का परिणाम है कि माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ पुनर्वास नीति पर भरोसा जताया है।

कमजोर पड़ गया है नक्सली संगठन
सुकमा पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने कहा कि, नक्सल संगठन अब कमजोर पड़ गया है। 22 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ा और मुख्यधारा में लौट आए हैं। सभी आत्मसमर्पित माओवादियों को शासन की पुनर्वास नीति का लाभ दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस पूरी कार्रवाई में डीआरजी सुकमा, जिला बल, आरएफटी जगदलपुर, CRPF और कोबरा बटालियन की अहम भूमिका रही है। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, आने वाले समय में और भी माओवादी आत्मसमर्पण कर सकते हैं।

31 मार्च 2026 नक्सल समस्या से मुत्ति की तारीख
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नक्सलवाद के खात्मे को लेकर डेडलाइन तय की है। सरकार की डेडलाइन के अनुसार, छत्तीसगढ़ समेत पूरे देश में नक्सलवाद 31 मार्च 2026 तक नक्सल समस्या से मुत्ति मिलेगी। सुरक्षाबल के जवान लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। हाल ही में बीजापुर, सुकमा समेत बस्तर के कई जिलों में जवानों ने नक्सलियों द्वारा बनाए गए स्मारक को ध्वस्त किया गया है।

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